11 तस्वीरों में देखिए काले हिरणों की खूबसूरती:इटावा सफारी पार्क में ये अलग-अलग झुंड में दिखते हैं; 5 सालों में 4 गुना बढ़ी तादाद, हुए 80, VIDEO देख पीएम मोदी भी हुए मुरीद

इटावा10 महीने पहले
इटावा सफारी पार्क में शेर के अलावा बड़ी संख्या में काले हिरण भी हैं।

इटावा सफारी पार्क में काले हिरण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं, इनको भी इटावा सफारी पार्क खूब रास आ रहा है। इनका कुनबा लगातार बढ़ रहा है। पांच सालों में इनकी तादाद चार गुना ज्यादा हो गई है। इटावा सफारी पार्क में शेर के अलावा ज्यादातर लोग काले हिरनों को भी देखने आ रहे हैं।

3 दिन पहले गुजरात के नेशनल पार्क के ट्विटर हैंडल से काले हिरणों के दौड़ते हुए झुंड का एक खूबसूरत वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया गया था, जिसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रीट्वीट करते हुए इन्हें बेहद खूबसूरत बताया था।

वन रेंजर ने बताया कि इनके रहने के लिए अनुकूल व्यवस्था के चलते सफारी में इनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
वन रेंजर ने बताया कि इनके रहने के लिए अनुकूल व्यवस्था के चलते सफारी में इनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

सफारी पार्क में 80 हैं काले हिरण
इटावा सफारी पार्क में साल 2016 में 20 काले हिरण लाए गए थे। इसमें दस नर और दस मादा थे। तब से अब तक इनकी तादाद चार गुना ज्यादा बढ़ गई है। सफारी में इनकी उछल-कूद देखने के लिए दर्शकों की भी संख्या में इजाफा होता जा रहा है। दूर-दूर से पर्यटक इनको देखने के लिए आते हैं। बच्चों के लिए इनका उछल-कूद करना काफी मनमोहक दृश्य रहता है।

इटावा सफारी पार्क में इनको संरक्षण के उद्देश्य से लाया गया था, काले हिरण को कृष्ण मृग भी कहा जाता है और यह अपनी खूबसूरती के कारण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इनका शिकार प्रतिबंधित है।
इटावा सफारी पार्क में इनको संरक्षण के उद्देश्य से लाया गया था, काले हिरण को कृष्ण मृग भी कहा जाता है और यह अपनी खूबसूरती के कारण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इनका शिकार प्रतिबंधित है।
सफारी के रेंजर विनीत सक्सेना बताते है कि मादा काला हिरण गर्भधारण के पांच महीने में बच्चे को जन्म देती है। यही कारण है कि इनकी संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
सफारी के रेंजर विनीत सक्सेना बताते है कि मादा काला हिरण गर्भधारण के पांच महीने में बच्चे को जन्म देती है। यही कारण है कि इनकी संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
काले हिरण आम तौर पर घास चरते हैं, लेकिन थोड़ी-बहुत हरियाली वाले अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में भी पाए जाते हैं।
काले हिरण आम तौर पर घास चरते हैं, लेकिन थोड़ी-बहुत हरियाली वाले अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में भी पाए जाते हैं।
काले हिरण या ब्लैक बक को इंडियन एंटेलोप भी कहा जाता है। ये आम तौर पर भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाए जाते हैं।
काले हिरण या ब्लैक बक को इंडियन एंटेलोप भी कहा जाता है। ये आम तौर पर भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाए जाते हैं।
माना जाता है कि भारत में करीब दो सौ साल पहले इनकी आबादी 40 लाख थी। 1947 में 80 हज़ार बचे थे। 1970 के दशक में इनकी आबादी घटकर करीब 22-24 हज़ार पहुंच गई, जबकि 2000 तक ये 50 हजार हो गई थी।
माना जाता है कि भारत में करीब दो सौ साल पहले इनकी आबादी 40 लाख थी। 1947 में 80 हज़ार बचे थे। 1970 के दशक में इनकी आबादी घटकर करीब 22-24 हज़ार पहुंच गई, जबकि 2000 तक ये 50 हजार हो गई थी।
भारत में काले हिरण आम तौर पर राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में पाए जाते हैं। नेपाल में ये क़रीब दो सौ, अर्जेंटीना में 8600 और अमरीका में 35 हज़ार है।
भारत में काले हिरण आम तौर पर राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में पाए जाते हैं। नेपाल में ये क़रीब दो सौ, अर्जेंटीना में 8600 और अमरीका में 35 हज़ार है।
दक्षिण भारत में इनकी एक आबादी ऐसी भी है जो कभी काले नहीं होते, लेकिन इसके बावजूद नर, मादा और बच्चों के रंग की तुलना में ज़्यादा गाढ़े रंग के होते हैं।
दक्षिण भारत में इनकी एक आबादी ऐसी भी है जो कभी काले नहीं होते, लेकिन इसके बावजूद नर, मादा और बच्चों के रंग की तुलना में ज़्यादा गाढ़े रंग के होते हैं।
मादा ब्लैक बक भी नर की तरह सफ़ेद रंग लिए होती है। दोनों की आंखों के चारों ओर, मुंह, पेट के हिस्से और पैरों के भीतरी हिस्से पर सफ़ेद रंग होता है। दोनों की पहचान में सबसे बड़ा अंतर सींग का होता है। नर के लंबे सींग होते हैं जबकि मादा के मामले में ऐसा नहीं होता।
मादा ब्लैक बक भी नर की तरह सफ़ेद रंग लिए होती है। दोनों की आंखों के चारों ओर, मुंह, पेट के हिस्से और पैरों के भीतरी हिस्से पर सफ़ेद रंग होता है। दोनों की पहचान में सबसे बड़ा अंतर सींग का होता है। नर के लंबे सींग होते हैं जबकि मादा के मामले में ऐसा नहीं होता।
नर काले हिरण रंग भी बदलते हैं। मानसून के अंत तक नर हिरनों का रंग खासा काला दिखता है, लेकिन सर्दियों में ये रंग हल्का पड़ने लगता है और अप्रैल की शुरुआत तक एक बार फिर भूरा हो जाता है।
नर काले हिरण रंग भी बदलते हैं। मानसून के अंत तक नर हिरनों का रंग खासा काला दिखता है, लेकिन सर्दियों में ये रंग हल्का पड़ने लगता है और अप्रैल की शुरुआत तक एक बार फिर भूरा हो जाता है।
काले नर हिरण का वज़न आम तौर पर 34-45 किलोग्राम होता है। कंधे पर उसकी ऊंचाई 74-88 सेंटीमीटर होती है। मादा का वज़न 31-39 किलोग्राम होता और ऊंचाई नर से ज़रा कम होती है।
काले नर हिरण का वज़न आम तौर पर 34-45 किलोग्राम होता है। कंधे पर उसकी ऊंचाई 74-88 सेंटीमीटर होती है। मादा का वज़न 31-39 किलोग्राम होता और ऊंचाई नर से ज़रा कम होती है।
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