इटावा में सीएम ने किया सेंट्रल जेल का उद्घाटन:अखिलेश बोले- हमारा काम था, योगी ने कहा- जो धोखे से सरकार बनाते हैं, जनता उन्हें लोकार्पण लायक नहीं छोड़ती

इटावाएक महीने पहले

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा पहुंचे हैं। उन्होंने यहां सेंट्रल जेल का उद्घाटन किया। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पर तंज कसते कहा कि यह काम हमने कराया था, चुनाव से पहले क्रेडिट योगी सरकार लेना चाह रही है, हालांकि उनके दौरे से पहले अखिलेश ने यह बयान दिया।

अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ के इस उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर निशाना साधा। 3 नवंबर को अखिलेश यादव इटावा में थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि काम सपा सरकार ने कराया था। बाकी जिले में अधूरा काम बहुत पड़ा है, जो योगी सरकार में पूरा नहीं हो सका।

योगी सरकार के सारे काम आधे-अधूरे
अखिलेश ने कहा कि कोई हमारा ही काम होगा उसका उद्घाटन कर देंगे। उनके पास कोई अपना काम नहीं है। मैं तो इटावा वालों से कहूंगा कि पूछ लेना मुख्यमंत्री जी से कि आपने इटावा वालों के लिए क्या विशेष किया? जैसे कि सैफई की मेडिकल यूनिवर्सिटी का बजट काट लेना, सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनना था, ट्रॉमा सेंटर बनने थे, सड़कें बननी थी...यह सारे काम आधे-अधूरे ही पड़े हैं। सड़क चौड़ी तो नहीं हुई, उल्टा चंबल का पुल जर्जर हो गया। तंज कसते हुए कहा कि हो सकता है वो इसी का निरीक्षण को करने आ रहे हों।

शेर-भालुओं की हालत पर कसा तंज
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जो शेर समाजवादी सरकार में पैदा हुए हैं, हो सकता है उनसे मिलने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर शेर से न मिलें तो कम से कम भालुओं का हाल चाल ले लें।

सीएम योगी ने किया पलटवार
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों की नीयत साफ नहीं होती, अगर वह धोखे से सरकार बना भी लेते हैं तो जनता उन्हें लोकार्पण करने लायक नहीं छोड़ती। यह भी कहा कि तीन साल पहले जिन योजनाओं का शिलान्यास किया था, उनका लोकार्पण भी कर रहा हूं। कोविड का जिक्र करते हुए तंज कसा कि जो लोग घरों में थे। ट्विटर तक सीमित थे, उनसे कह देना कि ट्विटर ही उन्हें वोट दे देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली से लेकर अगले 4 महीने तक अंत्योदय परिवार को 35 किलो गेहूं या चावल दिया जाएगा। साथ ही, 1 किलो दाल, 1 किलो चीनी, 1 किलो खाद्य तेल, 1 किलो नमक मुफ्त में दिया जाएगा। इस दौरान सीएम ने 54 करोड़ 22 लाख की योजनाओं का लोकार्पण किया। साथ ही, 21 अन्य योजनाओं का शिलान्यास किया गया।

सपा सरकार में खरीदी गई थी जमीन
सैफई तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत फूलापुर के गांव महोला में सेंट्रल जेल बनाई गई है। यूपी पूर्व सीएम अखिलेश यादव की सरकार के दौरान 2015 में सेंट्रल जेल के लिए भूमि खरीदकर आधुनिक जेल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। प्रोजेक्ट मैनेजर जनार्दन राय ने बताया कि उस समय जेल की डिजाइन बनाकर लागत राशि 1 अरब 83 करोड़ 91 लाख रुपए निर्धारित की गई थी। राजकीय निर्माण निगम ने कार्य शुरू करने से पहले सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को डिजाइन दिखाई तो उन्हें पसंद नहीं आई। निगम के इंजीनियरों ने नई डिजाइन तैयार करके लागत राशि 2 अरब 52 करोड़ 26 लाख रुपए निर्धारित की थी।

योगी आदित्यनाथ ने साल 2020 में इतनी धनराशि की स्वीकृति प्रदान करके बजट निर्धारित कर दिया था। जुलाई 2021 में जेल का निर्माण कार्य 2 अरब 72 लाख में पूरा हो गया था।

जुलाई 2021 में जेल का निर्माण कार्य 2 अरब 72 लाख में पूरा हो गया था।
जुलाई 2021 में जेल का निर्माण कार्य 2 अरब 72 लाख में पूरा हो गया था।

जनार्दन राय ने बताया कि अखिलेश सरकार ने यह धनराशि उपलब्ध कराकर दिसंबर 2016 तक निर्माण कार्य पूरा करने का समय तय किया था। उस समय निर्माण कार्य तेजी से शुरू हुआ। मार्च 2017 में सत्ता परिवर्तन होने के बाद निर्माण कार्य की गति और ज्यादा सुस्त हो गई। जिससे जो धन उपलब्ध था, उसी से कार्य किया गया। करीब 14 फीसदी काम बचा रह गया था।

बीते दो साल से करीब 20 करोड़ रुपए की मांग शासन से की जा रही थी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने साल 2020 में इतनी धनराशि की स्वीकृति प्रदान करके बजट निर्धारित कर दिया था। जुलाई 2021 में जेल का निर्माण कार्य 2 अरब 72 लाख में पूरा हो गया था।

हर बैरक में 12-12 बंदी रखे जाएंगे। नई सेंट्रल जेल की बिल्डिंग में प्रशासनिक भवन भी बनाया गया है।
हर बैरक में 12-12 बंदी रखे जाएंगे। नई सेंट्रल जेल की बिल्डिंग में प्रशासनिक भवन भी बनाया गया है।

51 एकड़ में बनी नई सेंट्रल जेल
जेल में लगभग 1000 से ज्यादा बंदियों को रखने की क्षमता है। 30-30 बंदियों के लिए 58 बैरक हैं। किशोर बंदियों के लिए दो और महिला बंदियों के लिए तीन बैरक हैं। हाई सिक्योरिटी वेयरिंग भी बनाई गई है। जिनमें शातिर बड़े अपराधियों को कड़ी सुरक्षा में रखा जाएगा। हर बैरक में 12-12 बंदी रखे जाएंगे।

नई सेंट्रल जेल की बिल्डिंग में प्रशासनिक भवन भी बनाया गया है। इसमें जेल अधिकारी के अलावा अन्य अफसर, जेल अधिकारियों के कार्यालय पर कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था है। परिसर में टाइप4- के चार टाइप-3 के तीन और टाइप-2 के 120 आवास भी हैं। वहीं, जिला कारागार अभी 610 बंदियों की क्षमता है, जिसमें बीते डेढ़ दशक से क्षमता से तीन गुना कैदी रह रहे हैं।

प्रदेश में अभी हैं 5 सेंट्रल जेल
आगरा सेंट्रल जेल, वाराणसी सेंट्रल जेल, लखनऊ सेंट्रल जेल, नैनी सेंट्रल जेल, फतेहगढ़ सेंट्रल जेल। अब सैफई में यह प्रदेश की छठवीं सेंट्रल जेल होगी।

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