इटावा...चंबल नदी में जलीय जीवों की गिनती शुरू:ठंड में धूप लेने बाहर आते हैं मगरमच्छ और घड़ियाल, गिनती करने पहुंची टीम

इटावा5 महीने पहले
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इटावा में चंबल नदी में जलीय जीवों की गिनती शुरू। - Dainik Bhaskar
इटावा में चंबल नदी में जलीय जीवों की गिनती शुरू।

इटावा में मगरमच्छ, घड़ियाल एवं डॉल्फिन के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली चंबल नदी में सेंचुरी विभाग के अधिकारियों ने जलीय जीवों की गिनती का काम शुरू कर दिया है। मुरैना बॉर्डर से पचनद तक जलीय जीवों की गिनती का काम होगा। चंबल सेंचुरी के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि जाड़े के दिनों में मगरमच्छ और घड़ियाल अपने शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए धूप लेने पानी से बाहर आते हैं। जिस कारण इन दिनों में इनकी गिनती करने में आसानी होती है।

दो बार होती है गणना

रेंजर हरिकिशोर शुक्ला ने बताया कि दिसंबर महीने के साथ ही फरवरी में एक बार दोबारा गिनती की जाएगी। जिसके बाद ही पता चलेगा कि इस बार चंबल में जलीय जीवों की संख्या पिछले साल के मुकाबले कितना बढ़ी है या इस बार आई बाढ़ के चलते कही यह संख्या कम तो नहीं हुई है। पिछले साल सबसे ज्यादा संख्या में यहां घड़ियाल पाए गए थे। उसके बाद मगरमच्छों की संख्या थी। वहीं डॉल्फिन की संख्या 200 के करीब थी। इस वर्ष का आंकलन फरवरी तक होगा।

नदी से निकलकर बाहर धूप लेता मगरमच्छ।
नदी से निकलकर बाहर धूप लेता मगरमच्छ।

राजस्थान के धौलपुर से इटावा के भरेह तक बहने वाली चंबल नदी इटावा के सेंचुरी इलाके में जिसकी लंबाई 80 किलोमीटर तक है। इस पूरे 80 किलोमीटर में बड़ी संख्या में मगरमच्छ, घड़ियाल एवं डॉल्फिन पाई जाती है। साथ ही सर्दी के मौसम में माइग्रेट बर्ड्स पक्षी भी यहां देखने को मिलते हैं। जिसके चलते चंबल का नजारा बेहद ही खूबसूरत नजर आता है।

सेंचुरी विभाग हर वर्ष दिसंबर के महीने में चंबल के मगरमच्छ, घड़ियाल एवं डॉल्फिन की गिनती करता है। जिससे पता चल सके कि यहां एक साल में जलीय जीवों की संख्या में कितनी बढ़ोतरी हुई है या फिर हर वर्ष आने वाली बाढ़ के चलते कहीं मगरमच्छ या घड़ियालों की संख्या में कोई कमी तो नहीं आई है। जिसके चलते दिसंबर एवं फरवरी में दो बार जलीय जीवों की गणना होती है।

धूप लेने रेत पर आते हैं जीव

दरअसल, सर्दियों के दिनों में अपने तापमान को नियंत्रित करने के लिए मगरमच्छ एवं घड़ियाल धूप लेने के लिए पानी के बाहर रेत पर निकल कर आते हैं। इसी वजह से इनकी गिनती करने में आसानी होती है। वहीं मार्च से लेकर मई तक मगर एवं घड़ियाल अंडे देते हैं एवं जून के महीने में चंबल सेंचुरी इलाके में हजारों की संख्या में मगरमच्छ एवं घड़ियाल के बच्चे निकलकर आते हैं।

नदी से निकलकर बाहर रेत पर धूप लेता मगरमच्छ।
नदी से निकलकर बाहर रेत पर धूप लेता मगरमच्छ।

पिछले साल पाए गए थे इतने जीव

वहीं बारिश के बाद हर वर्ष आने वाली बाढ़ से केवल 30 प्रतिशत मगरमच्छ एवं घड़ियाल के बच्चे ही जीवित बच पाते हैं। पिछले वर्ष की गणना में इटावा के चंबल सेंचुरी इलाके में 1,800 घड़ियाल, 850 मगरमच्छ एवं 150 डॉल्फिन पाई गई थी।

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