इटावा...दिल के मरीज फिजिशियन के भरोसे:जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में नहीं कार्डियोलॉजिस्ट, गेट के बाहर लगा है ताला; फिजिशियन करते हैं इलाज

इटावा9 महीने पहले
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इटावा में दिल के मरीज फिजिशियन के भरोसे। - Dainik Bhaskar
इटावा में दिल के मरीज फिजिशियन के भरोसे।

सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है। इस मौसम में ह्रदय रोगियों की संख्या अधिक बढ़ने लगती है। अगर आप अपने ह्रदय रोग संबंधित गंभीर मरीज को इटावा के डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय में ले जाने की सोच रहे हैं तो आपको यहां निराशा का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के चलते मरीजों को शहर से 22 किलोमीटर दूर सैफई विश्वविद्यालय रेफर किया जाता है, लेकिन वहां के भी हाल बेहाल हैं।

सैफई मेडिकल कॉलेज में हृदय रोगियों के इलाज की कोई भी सुविधा नहीं है। 1,100 बेड वाले मेडिकल संस्थान में कार्डियोलॉजिस्ट का पद लगभग 8 माह से खाली है। जिस कारण इटावा के अलावा अन्य जनपदों से आने वाले ह्रदय रोगियों को निराशा हाथ लगती है। मजबूरन गंभीर अवस्था वाले मरीजों को आगरा, ग्वालियर, कानपुर या फिर लखनऊ जाना पड़ता है।

इटावा से बाहर के जिलों को रेफर किए जाते हैं मरीज।
इटावा से बाहर के जिलों को रेफर किए जाते हैं मरीज।

घोटाले के चलते निलंबित हैं डॉक्टर

इटावा जिला अस्पताल के डॉक्टर सैफई मेडिकल कॉलेज में ह्रदय रोगी को रेफर करते हैं तो सैफई मेडिकल कॉलेज में जाने वाले ह्रदय रोगियों को लक्ष्मीपति सिंघानिया अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। 8 महीने पहले ही सैफई विश्वविद्यालय में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर सर्राफ घोटाले के चलते निलंबित किया जा चुका है। जिसकी वजह से जिला अस्पताल और सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का कार्डियोलॉजी विभाग सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गया है।

हृदय रोग विभाग में बंद पड़ा ताला।
हृदय रोग विभाग में बंद पड़ा ताला।

10 वर्षों से कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं

जिला अस्पताल में हृदय रोगियों का कोई भी इलाज की व्यवस्था नहीं है। यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को सैफई मेडिकल कॉलेज या फिर बाहरी जिलों के अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। इलाज की समुचित सुविधा न मिलने के चलते कई मरीजों को जान से भी हाथ धोना पड़ता है। जिला अस्पताल में कहने को 8 बेड की कार्डियोलॉजी है, लेकिन यहां पर 10 वर्षों से कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है।

सैफई मेडिकल कॉलेज।
सैफई मेडिकल कॉलेज।

जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के 2 पद स्वीकृत

जब तक जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. के. एस भदौरिया और वीके साहू तैनात रहे तब तक मरीजों को लाभ मिलता रहा, लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद कार्डियोलॉजी पूरी तरह से शोपीस बनकर रह गई है। जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के 2 पद स्वीकृत हैं, लेकिन दोनों ही पद खाली पड़े हुए हैं। आज तक शासन व प्रशासन के द्वारा इसके लिए कोई भी प्रयास नहीं किए गए हैं। समय-समय पर अधिकारी भी अस्पताल का दौरा करते हैं, लेकिन उनके द्वारा भी इस ओर कोई भी प्रयास नहीं किए गए। जिसका खामियाजा हृदय रोगियों को उठाना पड़ता है।

हृदय रोग विभाग में बंद पड़ा ताला।
हृदय रोग विभाग में बंद पड़ा ताला।

कानपुर रेफर किए जाते हैं मरीज

वहीं सैफई मेडिकल के एम.एस डॉ. आदेश कुमार ने बताया कि यहां प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 2 हजार मरीज अलग-अलग मर्जों का इलाज कराने के लिए आते हैं। ह्रदय रोगियों को जनरल मेडिसिन में देखा जाता है। गंभीर ह्रदय रोगियों जिनको पेसमेकर और एंजियोग्राफी, हार्ट स्टंट की जरूरत होती है, उन मरीजों को सैफई से कानपुर के लक्ष्मीपन्त सिंघानिया अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है।

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमएम आर्या।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमएम आर्या।

दो फिजिशियन कार्डियोलॉजिस्ट तैनात

वहीं जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एम.एम आर्या ने बताया कि प्रतिदिन 1,100 से 1,200 मरीज ओपीडी में आते हैं, जिसमें ह्रदय से संबंधित 20 से 25 मरीज आते हैं। जिनको सैफई में रेफर किया जाता है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 65 पद सृजित हैं, लेकिन अभी वर्तमान में 31 डॉक्टर ही अस्पताल में तैनात हैं। कार्डियोलॉजी के नियमित दो पद पिछले कई वर्षों से रिक्त हैं। जिस कारण संविदा पर दो फिजिशियन कार्डियोलॉजिस्ट तैनात किए गए हैं।