फर्रुखाबाद में मंकीपॉक्स को लेकर अलर्ट:चिकित्सक बोले- लक्षण दिखने पर कराएं जांच, मास्क लगाएं और उचित दूरी बनाएं

फर्रुखाबाद2 महीने पहले
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किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत - Dainik Bhaskar
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत

मंकीपॉक्स को लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। यदि किसी में लक्षण है, तो वह जांच कराए। किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय के डॉक्टर ने बताया, "कोविड काल में जो प्रोटोकॉल था, उसे अपनाकर बचा जा सकता है। मास्क लगाना और एक-दूसरे से उचित शारीरिक दूरी बनाकर संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने में कारगर है।

"चकत्ते और बड़े दाने मंकी पॉक्स के लक्षण"
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने कहा, "मंकीपॉक्स चेचक जैसा कम गंभीर लक्षण वाला एक वायरल रोग है। मंकीपॉक्स का चिकनपॉक्स से कोई नाता नहीं है। मंकी पॉक्स का एक प्रमुख लक्षण शरीर पर चकत्ते और बड़े दाने निकलना है। इसके साथ ही लिम्फ नोड में सूजन या दर्द, बुखार और सिर दर्द जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।"

मानव से मानव में इसका संक्रमण फैलता है। लम्बे समय तक रोगी के संपर्क में रहने, रोगी के घावों की मरहम-पट्टी आदि के सीधे संपर्क में आने या संक्रमित व्यक्ति के कपड़ों या बिस्तर के इस्तेमाल से फैल सकता है। संक्रमण क्षेत्र वाले जानवरों जैसे- बंदर, गिलहरी और चूहे आदि के काटने या खरोच से भी इसका संक्रमण फैल सकता है। इसे देखते हुए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जहां मंकी पॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है, वहीं भारत सरकार ने भी एडवाइजरी जारी की है।

ये सावधानी बरतें

- बुखार, सिर और बदन दर्द के साथ शरीर पर चकत्ते या दाने दिखाई दें, तो मरीज को अलग कमरे में आइसोलेट करें

- अलग बाथरूम का उपयोग करें या हर उपयोग के बाद अच्छी तरह साफ करें

- मरीज के बर्तन, चादर आदि को छूने के बाद हाथ को साबुन-पानी से धुलें

- सतहों को कीटाणुनाशक से अच्छी तरह से साफ करें

- अलग बर्तन, तौलिये और बिस्तर का प्रयोग करें

- वेंटीलेशन के लिए खिड़कियां खुली रखें

- दूसरों से उचित शारीरिक दूरी बनाकर रखें

- शरीर के दाने या घाव को कपड़े या पट्टियों से ढककर रखें

- अच्छी तरह से फिट होने वाला ट्रिपल लेयर मास्क पहनें

"साल 1958 में हुई थी मंकी पॉक्स की खोज"
डॉ. सूर्यकांत ने कहा, "मंकीपॉक्स की खोज साल 1958 में हुई थी, जब शोध के लिए रखे गए बंदरों की कॉलोनियों में चेचक जैसी बीमारी के दो प्रकोप हुए थे। मंकीपॉक्स नाम होने के बावजूद बीमारी का स्रोत अज्ञात है। मंकीपॉक्स का पहला मानव मामला वर्ष 1970 में दर्ज किया गया था। इस साल के प्रकोप से पहले कई मध्य व पश्चिमी अफ्रीकी देशों के लोगों में मंकीपॉक्स की सूचना मिली थी।"