फर्रुखाबाद के 22 गांव में घुसा बाढ़ का पानी:136 सेंटीमीटर पर पहुंचा गंगा का जलस्तर, 6 गांवों की बिजली कटी

फर्रुखाबाद4 महीने पहले
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गांव छोड़कर जाते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
गांव छोड़कर जाते ग्रामीण।

गंगा का जलस्तर बढ़ने से फर्रुखाबाद के 22 गांव प्रभावित हो गए हैं। इन गांवों में गंगा का पानी घुस गया है। जिससे लोग गांव को छोड़कर दूसरी जगह जाने लगे हैं। शमशाबाद क्षेत्र के 6 गांव की बिजली काट दी गई है। कई परिवारों ने घरों को छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण ली है।

प्रशासन ने 77 गांवों में अलर्ट किया था। बाढ़ से निपटने के इंतजाम भी कर लिए थे। इसके लिए बाढ़ चौकिया आदि बनाई गई हैं। कायमगंज तहसील क्षेत्र के पलीतपुरा, गढ़ी, पथरामई, पुंथर और जटा आदि गांवों में पानी घुस गया है।

पथरामई गांव में नदी बिल्कुल सटकर बह रही है। सैकड़ों एकड़ खेत और फसल गंगा में समा गई है। गांव वाले लगातार बाढ़ के पानी की निगरानी कर रहे हैं। बाढ़ के पानी से खेतों में खड़ी फसलें डूब गई हैं। गांव वालों को चिंता सता रही है कि अगर बाढ़ का पानी और बढ़ा तो फसल खराब हो जाएगी। मृतपुर क्षेत्र के कई गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं।

गांव में भरा बाढ़ पानी। बच्चे नहाकर मस्ती कर रहे हैं।
गांव में भरा बाढ़ पानी। बच्चे नहाकर मस्ती कर रहे हैं।

रास्तों में भरा पानी
गंगा में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी गांवों के रास्तों पर भर गया है। जिससे लोगों को आवागमन करने में परेशानी हो रही है। बाढ़ का पानी ट्रांसफार्मर तथा खंभों के पास भर जाने से 6 गांव की बिजली काट दी गई है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से गांव समैचीपुर, पैलानी दक्षिण व कमथरी जाने वाले मार्गों पर पानी भर गया है। जिससे लोग पानी में घुसकर निकलने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि रास्तों पर पानी भर गया है तथा खेतों में भी पानी भरा है। जिससे फसल खराब होने की आशंका बन गई है। गांव कटरी तौफीक के सविलियन विद्यालय जाने वाले मार्ग पर भी पानी भर गया है। ऊगरपुर, रूपपुर मंगली, लालाराम की मड़ैया, परसादी की मड़ैया, कटरी तौफीक, हरसिंगपुर कायस्थ व गांव के किनारे चारों तरफ पानी भर जाने से विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई है।

साल 2018 में आई बाढ़ में सिंटू मिश्रा, पिंटू, राजू, अमरीश, वीरेंद्र, राजन, रामभरोसे, यादराम, मरारीलाल, हाकिम, रामऔतार, डौरू, बलवीर, जय सिंह, रामेश्वर, वीरपाल व दूंदेराम सहित करीब 24 लोगों के घर और करीब 5 सौ बीघा खेत बह गई थी। इस बार भी किसानों को चिंता सता रही है।