फर्रुखाबाद में खतरे में है एतिहासिक चिंतामणि तालाब:महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास, मान्यता है कि स्नान करने से दूर हो जाते हैं चर्म रोग

फर्रुखाबाद2 महीने पहले
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फर्रुखाबाद में खतरे में है एतिहासिक चिंतामणि तालाब। - Dainik Bhaskar
फर्रुखाबाद में खतरे में है एतिहासिक चिंतामणि तालाब।

फर्रुखाबाद में चिंतामणि के नाम से एक एतिहासिक तालाब है। कहते हैं कि पांडवों ने एक साल का अपना अज्ञातवास इसी तालाब के किनारे काटा था। उसी दौर में इसका निर्माण करवाया था। राजा चिंतामणि का इस तालाब में नहाने से कोढ़ दूर हो गया था। तभी से लोग इसमें नहाने लग गए। मान्यता हैं कि इसके पानी से कोढ़ व चर्म रोग दूर हो जाता है।

हरिद्वार जाते समय राजा चिंतामणि ने किया था स्नान
जिले के विकास खंड शमसाबाद के ग्राम नगला नान में स्थित महाभारत कालीन का यह तालाब बना है। बताया जाता है कि राजा चिंतामणि को कोढ़ था। वह गंगा नहाने के लिए हरिद्वार जा रहे थे। तभी रास्ते में उन्होंने इस रहस्मयी तालाब में स्नान किया। तो उन्हें कोढ़ में कुछ लाभ मिला। जिसके बाद राजा चिंतामणि नें उस तालाब में नहाना शुरू किया। इसी से इस तालाब का नाम भी चिंतामणि तालाब रखा उठा। आज भी मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से कुष्ठ रोग, चर्म रोग की समाप्ति हो जाती है।

हर साल कई बार लगता है किनारे पर मेला
राजा चिंतामणि तालाब के किनारे हर साल कार्तिक पूर्णिमा, माघी पूर्णिमा और ज्येष्ठ दशहरा को मेला लगता है। इस मेले में कई जिलों के लोग आकर अपने बच्चों का मुंडन और अन्न प्रासन आदि कार्यक्रम करते हैं। लोग तालाब में स्नान करने के बाद वहां बने शंकर व हनुमान मंदिर में पूजन कर सच्चे मन से जो भी मनोकामना मांगी जाती है। वह पूर्ण होती है, ऐसी मान्यता है। इसीलिए यहां हर साल कई जिलों से लोग आकर मन्नत पूरी होने पर पूजन-अर्चन करते हैं। तालाब में क्विंतलों मछलियां हैं लेकिन इनका शिकार नहीं करने दिया जाता है।

जीर्णोद्धार के लिए विधायक ने दिए थे 11 लाख रुपए
3 मई 20 12 को लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व एवं प्राचीन इतिहास विभाग की टीम नें रहस्यों को जानने लिए तालाब की खुदाई की थी। तालाब ऐतिहासिक होने के साथ ही पौराणिक मान्यता भी रखता है। लेकिन इसके बाद भी उसका जीर्णोद्धार नहीं किया गया। सिर्फ एक बार पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार ने 11 लाख रुपए इसके जीर्णोद्घार के लिए दिए थे। साल 2008 में पूर्व प्रधान शोभित गंगवार ने तालाब की मरम्मत एवं गेट बनवाते समय उस पर प्लास्टर करवा दिया था। तालाब की चाहरदीवारी छोटी ईंटों से बनी हैं। तालाब के उत्तर दक्षिण दो कोठरी बनी हैं और चारों कोनो पर गुंबद बने हैं।

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