मरीजों को लिखीं जा रही बाहर की दवाएं:फिरोजाबाद जिला अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री के दावे बेअसर, डॉक्टर मरीजों को लिख रहे बाहर की दवाएं

फिरोजाबाद7 महीने पहले
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डिप्टी CM बृजेश पाठक को जब स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली तो वह सबसे पहले फिरोजाबाद के दौरे पर आए। यहां उन्होंने डॉक्टरों से कहा ​था कि मरीजों को भगवान समझें और उन्हें बाहर की दवाएं न लिखें, लेकिन इसके बाद भी जिले में डॉक्टरों द्वारा मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।

बाहर मेडिकल स्टोर के लिए लिखी दवाएं
जाटवपुरी निवासी महिला शरीफन बेगम को पेट संबंधी बीमारी है। उनका मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में इलाज चल रहा है। वह डॉक्टर के कक्ष से हाथ में पर्चा लेकर जब बाहर निकलीं तब उनसे पूछा गया कि कहां जा रही हैं, तब उन्होंने बताया, मेडिकल से दवा लेने। उनको बताया गया कि यहां तो दवाएं अस्पताल से ही मिलती हैं तो उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने बाहर से लेने के लिए कहा है।

अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन।
अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन।

सुनील भी भागते नजर आए
गौंछ का बाग के पास रहने वाले 32 वर्षीय सुनील अपनी वृद्ध मां का इलाज कराने के लिए अस्पताल आए थे, जहां डॉक्टरों ने दवा का पर्चा लिखा तो वह उसे लेकर मेडिकल स्टोर पर जाते नजर आए। उन्होंने बताया, अस्पताल में जो दवा डॉक्टर ने लिखी, वह है नहीं। इसलिए बाजार से खरीदने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग भले ही अस्पताल के ड्रग स्टोर में हर मर्ज की दवा उपलब्ध होने का दम भरता हो, लेकिन यहां तमाम दवाएं मिलती नहीं हैं।

यहां के डॉक्टर बाहर की दवाइयां लिखते हैं। खास कर बाल रोग विभाग, मानसिक रोग विभाग, त्वचा रोग विभाग के डॉक्टर कुछ दवाएं अस्पताल की तो कुछ मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए बड़ी कंपनियों की दवाएं लिख देते हैं। हालत यह है कि करीब 30 फीसदी दवाएं जेनरिक लिखी जाती हैं, 70 फीसद दवाइयां बाहर की लिख दी जाती हैं।

दवाओं में है कमीशन का खेल
बताया जाता है कि कुछ लोग अपनी दवाएं बेचने के लिए डॉक्टरों से मिलकर सांठ-गांठ करते हैं और डॉक्टर उनकी दवाओं को मरीजों के पर्चे पर लिखते हैं। अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर्स पर उसी कंपनी की दवाइयां रखवाई जाती हैं और महीने के आखिरी में हिसाब होता है। दवा लिखने वाले डॉक्टरों से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। म​​​​​​

​रीजों से बात की तो उन्होंने बताया कि अधिकतर डॉक्टर दवाएं अस्पताल की ही लिखते हैं, लेकिन एक-दो दवाएं अलग से एक सादे कागज पर लिख देते हैं। इस मामले को लेकर जब मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में हर मर्ज की दवा उपलब्ध है। बाहर की दवाएं लिखने की जांच कराएंगे। ऐसा होता मिला तो संबंधित डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे।

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