फिरोजाबाद का जन औषधि केंद्र बीमार:यहां मरीजों को नहीं मिलती बीपी और डायबिटीज की दवा, प्रतिदिन भटकते हैं 200 से अधिक मरीज

फिरोजाबाद2 महीने पहले
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जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलती हैं दवाएं। - Dainik Bhaskar
जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलती हैं दवाएं।

फिरोजाबाद के अस्पताल में आने वाले मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए तीन साल पहले खोला गया जन औषधि केंद्र खुद ही बीमार है। यहां मरीजों को न तो ब्लड प्रेशर की दवाएं मिल पाती हैं और न डायबिटीज की। त्वचा संबंधी बीमारियों की दवाएं और सर्जिकल आयटम भी केंद्र मरीजों को मुहैया नहीं करा पा रहा है। डिमांड देने के लिए एक-एक माह तक जन औषधि केंद्र पर दवाओं की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।

सस्ती दर पर दवाएं मिलती हैं
भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत मेडिकल कालेज अस्पताल परिसर में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोला गया था। जेनरिक दवाओं की बिक्री होने से मरीजों को सस्ती दर पर यहां दवाए मिलती हैं, लेकिन जब दवाएं ही नहीं तो सस्ती कैसे मिलेंगी? केंद्र पर करीब 1250 तरह की दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। पड़ताल में पता चला कि केंद्र पर 300 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। तेज धूप पड़ने की वजह से तमाम लोग ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिमाग और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं, लेकिन इनकी दवाएं नहीं है। इसका फायदा अस्पताल के डॉक्टर उठा रहे हैं। वे हर तीसरे मरीज के पर्चों पर एक-दो ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। उन्हें खरीदने के लिए मरीज-तीमारदारों को जेब हल्की करनी पड़ रही हैं।

बीपीपीआइ करती हैं दवाओं की आपूर्ति
जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की आपूर्ति ब्यूरो आफ फार्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग आफ इंडिया (बीपीपीआइ) करती है। इसके अलावा केंद्र संचालक कहीं बाहर से दवाओं की खरीद नहीं कर सकते। केंद्र पर उपलब्ध दवाओं की सूची होनी चाहिए, ताकि मरीज यह जान सकें कि कौन सी दवा है और कौन उपलब्ध नहीं है। परंतु मौके पर दवाओं की सूची लगी नहीं मिली। फार्मासिस्ट अंकुर कुमार मौजूद थे। उन्होंने बताया कि दवाइयां की सूची है, लेकिन चस्पा नहीं की है। बता दें कि अस्पताल में करीब 200 से अधिक मरीज बीपी और डायबिटीज के आते हैं।

डिमांड के काफी समय बाद आती हैं दवाएं
जन औषधि केंद्र पर दवा लेने पहुंचे जाटवपुरी निवासी रिहान फारूख ने बताया कि डॉक्टर ने पर्चे में जो दवा लिखी है वह यहां पर है ही नहीं। बाईपास रोउड निवासी कैलाश चंद्र ने बताया कि उन्हें डायबिटीज और बीपी की समस्या है। यहां कई बार दवा लेने आए लेकिन मिलती ही नहीं है। जन औषधि केंद्र के सुपरवाइजर अतुल कुमार ने बताया कि कोरोना का दौर शुरू होने के बाद से अब तक दवाओं की आपूर्ति पटरी पर नहीं लौट सकी है। डिमांड देने के लिए एक-एक महीने बाद दवाओं की सप्लाई मिल रही है। एक लाख रुपये की दवाओं का आर्डर देने पर 40 हजार की ही दवाएं मिल पा रही हैं।

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