फिरोजाबाद में डायरिया के शिकार हो रहे बच्चे:बाल रोग विभाग में दिख रहा असर, प्रतिदिन 20 से अधिक बच्चे हो रहे भर्ती

फिरोजाबाद2 महीने पहले
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बाल रोग विभाग में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ रही है - Dainik Bhaskar
बाल रोग विभाग में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ रही है

मौसम की मार का असर बच्चों पर भी पड़ने लगा है। तेज धूप और उमस भरी गर्मी से डायरिया का प्रकोप बढ़ने लगा है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में इन दिनों बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। प्रतिदिन 20 से अधिक बच्चे वार्ड में भर्ती हो रहे हैं। वार्ड फूल होने से कई बेडों पर दो-दो बच्चों को भर्ती करना पड़ा।

लगातार बढ़ रहा तापमान
इन दिनों अधिकतम तापतान 45 और न्यूनतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह रहा है। गर्मी, दूषित खानपान और अन्य कारणों से डायरिया अधिकतर लोगों को परेशान कर रही है। बच्चों पर डायरिया की मार अधिक है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना कम से कम तीन सौ बच्चे पहुंच रहे हैं। उनमें करीब 50 प्रतिशत पेट दर्द, उल्टी-दस्त से पीड़ित होते हैं। उनमें से कुछ को भर्ती करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मरीजों को पूरी तरह ठीक होने में चार दिन का वक्त लग रहा है। सरकारी ट्रॉमा सेंटर पर भी पेट दर्द और डायरिया के मरीजों की लाइन लगी है।

मौसम के साथ ही बीमार बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है
मौसम के साथ ही बीमार बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है

झोला छाप से न कराएं इलाज
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गुप्ता ने बताया कि झाेला छाप डॉक्टर मरीजों को ठीक कम, हालत अधिक बिगाड़ रहे हैं। झोला छाप दवाएं देकर डायरिया को तुरंत रोकने का प्रयास करते हैं। इससे अनेक मरीजों की आंतों में दिक्कत आती है और मरीज का पेट फूल जाता है। झोला छाप को यह भी पता नहीं होता कि मरीज को कब सोडियम और पोटैशियम आदि इलेक्ट्रोलायट्स देने हैं। इसलिए वे मरीजों को अनाप-शनाप ग्लूकाेज की बोतल चढ़ा देते हैं। उससे मरीज की हालत बिगड़ जाती है।

वार्ड में डायरिया पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं
वार्ड में डायरिया पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं

बीमारियों से बचाव के उपाय-
- बच्चों को कटे-सड़े, गले फल न खिलाएं
- बासी खाना न खिलाएं
- दूषित पानी, अधिक ठंडा पेय पदार्थ न पिलाएं
- खेल कर या बाहर से घूमकर घर लौटने पर तुरंत ठंडा पानी न पिलाएं
- मरीजों का इलाज झोला छाप से न कराएं

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