फिरोजाबाद के गांव में डेंगू के डर से पलायन:जिले में 48 घंटे में 20 और मौतें, ग्रामीण बोल रहे- इससे पहले कि बुखार से मर जाएं, अच्छा है कहीं चले जाएं

फिरोजाबाद3 महीने पहले
फिरोजाबाद के नगला अमान गांव में डेंगू से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है।

'तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है'... अदम गोंडवी की कविता की यह लाइनें फिरोजाबाद पर सटीक बैठ रही हैं। फिरोजाबाद में केंद्र और प्रदेश के एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम लगी हुई है। इसके बावजूद यहां डेंगू बुखार कंट्रोल नहीं हो रहा है। बीते 48 घंटों में 20 की मौत हुई है, जबकि अब तक कुल 163 लोगों की जान जा चुकी है।

यही नहीं हालात इतने बदतर हो गए हैं कि यहां के सबसे ज्यादा प्रभावित गांव नगला अमान से ग्रामीणों ने पलायन शुरू कर दिया है। गांव में लगभग एक दर्जन से ज्यादा घरों में ताले लटके हुए हैं। गांव वालों का कहना है कि डेंगू से मरने से अच्छा है कि कहीं और चले जाएं।

शहर में महज 15 किमी दूर गांव में पसरा है सन्नाटा
फिरोजाबाद शहर से लगभग 15 किमी दूर कोटला रोड पर बसे नगला अमान गांव में अब सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव में किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कोरोना के बाद डेंगू का ऐसा भयानक रूप भी सामने आएगा और लोगों को अपना गांव छोड़ना पड़ेगा।

बीते डेढ़ महीने के अंदर गांव के 10 लोगों की डेंगू से मौत के बाद भयभीत ग्रामीण गांव छोड़ने को विवश हो गए। किसी ने रिश्तेदारी में शरण ली है तो कोई गांव से दूर किसी शहर में जाकर इस महामारी के कम होने का इंतजार कर रहा है।

गांव में लगभग एक दर्जन से ज्यादा घरों में ताले लटके हुए हैं।
गांव में लगभग एक दर्जन से ज्यादा घरों में ताले लटके हुए हैं।

यहां हर घर में मरीज, अब तक 10 की मौत
नगला अमान की आबादी करीब दो हजार है। हर घर में डेंगू का एक मरीज है। इस गांव में गंदगी, जलभराव और जगह-जगह कूड़े के ढेर बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं। जिले में फैली डेंगू महामारी और वायरल फीवर के कारण ग्रामीण दहशत में हैं। जिन घरों में कल तक बच्चों की किलकारी और लोगों की आवाज सुनाई देती थीं, वहां अब सन्नाटा है।

गांव के दीपक ने बताया कि इस गांव में लगातार बच्चे और बड़े बीमार हो रहे हैं। ऐसा कोई घर नहीं है, जहां लोग बीमार न हों। गांव के ही रामवीर बताते हैं कि बच्चों के इलाज के लिए लोगों के पास पैसे नहीं हैं। मजबूरन लोग गांव छोड़ने को विवश हो रहे हैं।

बड़े पैमाने पर इस गांव में लोग बीमार हैं।
बड़े पैमाने पर इस गांव में लोग बीमार हैं।

अब तो इलाज के लिए पैसा भी नहीं बचा

गांव की गलियों में कुछ लोग अपने घरों के सामने बैठे हैं तो कुछ बरामदे में लेटे हुए हैं। ग्रामीण बताते हैं कि हर दिन गांव का कोई न कोई बीमार पड़ रहा है। दीपक कहते हैं कि जब सीएम योगी आये थे, तब गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम आई थी। उसके बाद से कोई यहां देखने भी नहीं आया। गांव के ज्यादातर लोग बाहर कमाई करने जाते थे। कोरोनाकाल में अधिकतर लोग लौट आए। पैसों की कमी से पहले से ही जूझ रहे थे, इस बीमारी ने यहां हर घर को कर्ज में दबा दिया है। हालत यह हैं कि अब कोई कर्ज भी नहीं दे रहा है। अब आदमी कहां से इलाज करवाए।

गांव में गंदगी का अंबार है, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे हैं।
गांव में गंदगी का अंबार है, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे हैं।

18 अगस्त को आया था पहला मामला
गांव में डेंगू से मौत का पहला मामला 18 अगस्त को सामने आया था। उसके बाद यह बीमारी पूरे जिले भर में फैल गई। अब तक 150 से अधिक मौतें इस बीमारी से हो चुकी हैं, जबकि अभी भी अस्पतालों में जगह नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव में 10 लोगों की मौत डेंगू से हो चुकी है और अभी भी 100 से ज्यादा ग्रामीण बीमार हैं। जो अस्पताल या फिर अलग-अलग स्थानों पर अपना इलाज करा रहे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी नीरज सिन्हा का कहना है कि डेंगू को लेकर पूरे गांव में दवाओं का छिड़काव कराया गया है।

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