नोएडा में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर विवाद:गुर्जर और राजपूत समाज आमने-सामने, राजपूत समाज ने कहा- इतिहास के साथ की गई छेड़छाड़, सीएम योगी से करेंगे बात

नोएडाएक वर्ष पहले
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नोएडा में सम्राट मिहिर भोज की � - Dainik Bhaskar
नोएडा में सम्राट मिहिर भोज की �

नोएडा के दादरी में स्थापित होने वाली सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। रविवार को अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा और आखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट आमने सामने आ गए। वीर गुर्जर महासभा के आचार्य वीरेंद्र विक्रम ने इसे समस्त देशवासियों के लिए गौरव की बात बताया तो वहीं राजपूत समाज ने इसका पूरजोर विरोध करते हुए इतिहास के साथ छेड़छाड़ बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करेंगे बात

आखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट ने कहा कि इसे वह कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। वह लोग प्रतिमा के अनावरण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करेंगे। वार्ता के दौरान वीर गुर्जर महासभा के आचार्य वीरेंद्र विक्रम ने कहा कि गुर्जर सम्राट मिहिर भोज रघुवंशी सम्राट थे। वह गुर्जर प्रतिहार वंश के सबसे प्रतापी सम्राट थे। उन्होंने 53 वर्षों तक अखंड भारत पर शासन किया। उनकी पहचान समाज में गुर्जर सम्राट के नाम से ही है। उनके समकालीन शासकों राष्ट्रकूट और पालों ने अपने अभिलेखों में उनको गुर्जर कहकर ही संबोधित किया है।

अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा।
अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा।

1957 में डॉ. बैजनाथ पुरी ने गुर्जर जाति का सिद्ध किया

851 ईसवी में भारत भ्रमण पर आए अरब यात्री सुलेमान ने उनको गुर्जर राजा और उनके देश को गुर्जर देश कहा है। सम्राट मिहिर भोज के पौत्र सम्राट महिपाल को कन्नड़ कवि पंप ने गुर्जर राजा लिखा है। उन्होंने बताया कि प्रतिहारों को कदवाहा, राजोर, देवली, राधनपुर, करहाड़, सज्जन, नीलगुंड और बड़ौदा के शिलालेखों में गुर्जर जाति का लिखा है। 1957 में डॉ. बैजनाथ पुरी ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से गुर्जर प्रतिहारों पर पीएचडी की और उनको गुर्जर जाति का सिद्ध किया। भारत के इतिहास में 1300 ईसवी से पहले राजपूत नाम की किसी भी जाति का कोई उल्लेख नहीं है। क्षत्रिय कोई जाति नहीं है, क्षत्रिय एक वर्ण है, जिसमें जाट, गुर्जर, राजपूत, अहीर (यादव), मराठा आदि सभी जातिया आती हैं। उन्होंने बताया कि हमारे सारे प्रमाण मूल लेखों, समकालीन साहित्य और शिलालेखों पर आधारित हैं।

इतिहास के साथ नहीं होने दिया जाएगा खिलवाड़

वहीं क्षत्रीय समाज इस अनावरण का पुरजोर विरोध कर रहा है। वार्ता के दौरान अध्यक्ष ऋषिपाल परमार ने बताया कि गुर्जर शब्द एक स्थान विशेष व भौगोलिक है, न कि जातिवाचक। गुजरात पर शासन करने वाले राजा को गुर्जेश्वर या गुर्जर अधिपति की उपाधि मिलती थी, लेकिन एक समाज विशेष इसे अपनी जाति से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। सम्राट मिहिर भोज के वंशज आज भी नागौर में राजकुमार किले में रहते हैं। उन्होंने लिखकर दिया है कि हम लक्ष्मण के वंशज राजपूत हैं, न कि गुर्जर। इतिहास के साथ खिलवाड़ किया गया तो इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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