नोएडा...ड्रोन बताएगा कैसे गिरेंगे सुपरटेक के दो टावर:सियान और एपेक्स को गिराने के लिए ड्रोन से 4 घंटे हुआ सर्वे; लखनऊ SIT को आज दी जाएगी रिपोर्ट

नोएडाएक महीने पहले
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नोएडा के सुपरटेक एमराल्ड को कैसे गिराना है, ये ड्रोन बताएगा। सियान और एपेक्स दो टॉवर को गिराने के लिए ड्रोन सर्वे किया जा रहा है। चार घंटे का सर्वे पूरा हो चुका है, बचे चार घंटे का सर्वे आज किया जाएगा। सूत्रों से पता चला है कि 8 घंटे का सर्वे पूरा कर शाम तक रिपोर्ट प्राधिकरण अधिकारी को सौंपनी है। जिसे लखनऊ एसआईटी के पास भेजा जाएगा। इसके बाद दोनों बिल्डिंग के ध्वस्तीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। ड्राफ्टिंग बाह्य एजेंसी कर रही है। इससे दोनों टावरों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और बिल्डिंग गिराने में आसपास कोई नुकसान नहीं होगा।

31 अगस्त को कोर्ट ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को सुपरटेक के दोनों टावरों को तीन माह में ध्वस्त करने का आदेश दिया था। अदालत ने टावरों के निर्माण में प्राधिकरण और बिल्डर की मिलीभगत को भी उजागर किया। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच एसआईटी को सौंपी। एसआईटी की ओर से जांच पूरी कर फाइनल ड्राफ्टिंग की जा रही है। ऐसे में दोनों टावरों की वास्तविक स्थिति का आकलन भी जरूरी था। इसके लिए ड्रोन सर्वे कराया जा रहा है। हालांकि यह सर्वे पहले ही हो जाना था। लेकिन लगातार हो रही बारिश की वजह से सर्वे कार्य में बाधा आ रही है।

शुक्रवार को ड्रोन सर्वे की शुरुआत की गई। चार घंटे का सर्वे किया गया। शनिवार को दिन भर बारिश का सिलसिला जारी रहा। ऐसे में सर्वे करने वाले अधिकारी भी असमंजस में है। उनका कहना है कि जब तक मौसम साफ नहीं होगा ड्रोन सर्वे नहीं कराया जा सकता। संभावना है कि बचे हुए 4 घंटे का सर्वे आज किया जाएगा।

एमराल्ड के साथ एटीएस की भी देखी जा रही स्थिति

इसमें सुपरटेक एमराल्ड के साथ-साथ उससे लगे एटीएस की परियोजना की भी स्थिति देखी जा रही है। एसआईटी से ज्यादा ड्रोन की रिपोर्ट सीबीआरआई के लिए फायदेमंद होगी। टावर गिराने की प्रक्रिया करते समय उसको टावरों व आसपास की स्थिति की सटीक जानकारी पहले ही मिल जाएगी। ड्रोन के जरिये पूरे इस भूखंड की स्थिति, दोनों टावरों के बीच की ऊपर से स्पष्ट तस्वीर, अन्य टावरों से इसकी दूरी समेत कई बिंदुओं पर जांच की गई। ड्रोन के जरिए सटीक सर्वे होता है।

ड्रोन में लगे क्लोज सर्किट कैमरों की मदद से टावर की हर एक एंगल से फोटो ली जाएगी।
ड्रोन में लगे क्लोज सर्किट कैमरों की मदद से टावर की हर एक एंगल से फोटो ली जाएगी।

आठ घंटे के सर्वे के बाद तैयार होगा फाइनल ड्राफ्ट

दोनों टावरों के ऊपर व आस-पास आठ घंटे तक ड्रोन को उड़ाया जाएगा। ड्रोन में लगे क्लोज सर्किट कैमरों की मदद से टावर की हर एक एंगल से फोटो ली जाएगी। इसके बाद एजेंसी की ओर से इसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। एसआईटी की टीम इसका मिलान मैन्यूवल तैयार किए गए ड्राफ्ट से कर सकती है।

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