मिहिर भोज के नाम पर, समुदायों में रार:'गुर्जर सम्राट' का बोर्ड एक गांव में लगा तो दूसरे ने 'राजपूत सम्राट' लिखवाया, 5 मुकदमे और 250 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

गौतम बुद्ध नगर2 महीने पहले
दादरी में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के शिलापट पर पीला कपड़ा ढक दिया है।

उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के दादरी कस्बे में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के शिलापट पर शुरू हुई महाभारत कानून व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। अब तक पांच मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। करीब 250 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

गांव-गांव क्षत्रियों और गुर्जरों में खाई बननी शुरू हो गई है। क्षत्रिय (राजपूत) और गुर्जर गांवों में अपनी-अपनी जाति के बोर्ड लगा रहे हैं। यह विवाद ठीक वैसा ही है, जैसा कि 2017 में राजपूतों और दलितों के बीच हुआ था, जिसके चलते सहारनपुर में जातीय हिंसा हुई थी।

दादरी में 22 सितंबर को सीएम ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था।
दादरी में 22 सितंबर को सीएम ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था।

दादरी में विवाद क्यों है?
कस्बा दादरी में मिहिर भोज डिग्री कॉलेज है। इसका संचालन गुर्जर विद्या सभा करती है। करीब दो साल पहले समिति ने कॉलेज परिसर में सम्राट मिहिर भोज की 15 फुट ऊंची प्रतिमा लगवाई थी। कोरोना की वजह से उसी वक्त प्रतिमा का अनावरण नहीं हो पाया। गुर्जर विद्या सभा के निमंत्रण पर 22 सितंबर को यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दादरी आकर इस प्रतिमा का अनावरण किया था।

प्रतिमा का जब शिलापट तैयार हुआ तो उस पर सम्राट मिहिर भोज के नाम से पहले गुर्जर शब्द लिखवाया गया। जब क्षत्रियों को यह बात पता चली, तो उन्हें अच्छा नहीं लगा। उनका कहना था कि मिहिर भोज राजपूतों के वंशज हैं। उनकी जाति बदलना अपमान है। यदि मिहिर भोज को गुर्जर बताकर प्रतिमा का अनावरण किया गया तो आंदोलन तेज होगा। विरोध ज्यादा बढ़ने लगा तो 22 सितंबर को गुर्जर शब्द के ऊपर काले रंग का पेंट कर दिया गया और फिर सीएम से अनावरण कराया गया।

इस तस्वीर में एक ही प्रतिमा के चार शिलापट हैं। चारों को पढ़कर अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे बार-बार नामों पर कालिख पोती गई।
इस तस्वीर में एक ही प्रतिमा के चार शिलापट हैं। चारों को पढ़कर अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे बार-बार नामों पर कालिख पोती गई।

शिलापट पर तीन बार पुत चुकी है कालिख
मुख्यमंत्री जब कार्यक्रम करके चले गए, तब गुर्जरों को यह बात पता चली। इसके बाद गुर्जरों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने इसके विरोध में 26 सितंबर को दादरी के चिटहेरा गांव में महापंचायत भी की। आखिरकार, 27 सितंबर की देर रात प्रतिमा के शिलापट पर पुन: गुर्जर शब्द लिख दिया गया।

भाजपा के राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर ने दावा किया कि सरकार से अनुमति लेकर उन्होंने समाज को सम्मान वापस दिलाया है। 28 सितंबर की सुबह समाजवादी पार्टी से जुड़े कुछ लोग प्रतिमा स्थल पर पहुंचे और शिलापट पर लिखे मुख्यमंत्री समेत सभी भाजपा नेताओं के नाम पर कालिख पोत दी। हालांकि, सपा ने इस मामले में खुद की संलिप्तता से इनकार किया है।

ग्रेटर नोएडा के घोड़ी बछेड़ा गांव में राजपूतों ने जाति-सूचक बोर्ड लगाया है।
ग्रेटर नोएडा के घोड़ी बछेड़ा गांव में राजपूतों ने जाति-सूचक बोर्ड लगाया है।

गांव-गांव जाति-सूचक बोर्ड लगाए जा रहे
26 सितंबर की महापंचायत में गुर्जरों के नेता कपिल गुर्जर ने ऐलान कर दिया कि अब गांव-गांव गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के नाम से बोर्ड लगाए जाएंगे। दनकौर क्षेत्र के दो गांवों में ऐसे बोर्ड लगाए भी जा चुके हैं। सहारनपुर के गांव अहमदपुर में गुर्जर चौक पर बोर्ड लगाया गया है।

ग्रेटर नोएडा के गांव बारसाबाद में राजपूतों ने 'राजपूत सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार क्षत्रिय गांव बारसाबाद' नाम से बोर्ड लगा दिया है। घोड़ी बछेड़ा गांव में भी ऐसा ही बोर्ड लगा है। राजपूतों ने भी कहा है कि इस तरह के बोर्ड सभी गांवों में लगने चाहिए।

सम्राट मिहिर भोज के नाम पर सहारनपुर में गुर्जरों ने यह बोर्ड लगाया है।
सम्राट मिहिर भोज के नाम पर सहारनपुर में गुर्जरों ने यह बोर्ड लगाया है।

इस विवाद में अब तक पांच मुकदमे दर्ज
प्रतिमा अनावरण से पहले नोएडा जिले में विधायक तेजपाल नागर ने सीएम के होर्डिंग लगवाए। क्षत्रियों ने इन्हें फाड़ना शुरू कर दिया। तीन मुकदमे दादरी कोतवाली में दर्ज हुए। तीन-चार लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। इसके बाद 26 सितंबर को चिटहेरा में गुर्जर महापंचायत करने पर 700 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ। 250 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, इन्हें हाथों-हाथ जमानत दे दी गई।

अब शिलापट पर सीएम समेत भाजपा नेताओं के नाम पर कालिख पोतने में गुर्जर विद्या सभा सचिव आरसी वर्मा ने 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। इसमें से चार लोगों की पहचान पुलिस ने कर ली है।

दादरी के गांव चिटहेरा में 26 सितंबर को गुर्जरों ने महापंचायत की थी।
दादरी के गांव चिटहेरा में 26 सितंबर को गुर्जरों ने महापंचायत की थी।

दादरी सीट पर 38 फीसदी गुर्जर
यूपी का दादरी विधानसभा क्षेत्र गुर्जर बेल्ट है। यहां कुल आबादी में 38 फीसदी भागीदारी गुर्जरों की है। इस सीट पर ज्यादातर विधायक गुर्जर ही बनते आए हैं। चुनाव में अधिकांश पार्टियां गुर्जर प्रत्याशियों पर ही दांव आजमाती हैं। सम्राट मिहिर भोज के नाम पर दादरी इलाके में पांच स्कूल-कॉलेज हैं। स्कूल के ठीक बराबर में गुर्जर कॉलोनी भी है।

गुर्जर महासभा ने कहा- प्रतिमा विवाद पर जीत हुई
प्रतिमा शिलापट को लेकर चल रहे विवाद के बीच अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. यशवीर सिंह और राष्ट्रीय महासचिव डॉ. जिलेराम ने संयुक्त बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि गुर्जर महापंचायत के बाद भाजपा नेताओं व गुर्जर विद्या सभा ने शिलापट को बदल दिया है। शिलापट मामले में उनकी जीत हुई है। अभी मुख्य मुद्दा गुर्जर सम्राट मिहिर भोज विश्वविद्यालय के दादरी में बनाने का बाकी है, जो जारी रहेगा।

ग्वालियर में भी इस प्रतिमा के शिलापट पर लिखी जाति को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद अब यहां पुलिस-पीएसी तैनात कर दी गई है।
ग्वालियर में भी इस प्रतिमा के शिलापट पर लिखी जाति को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद अब यहां पुलिस-पीएसी तैनात कर दी गई है।

ग्वालियर में भी हुआ बवाल
ग्वालियर में आठ सितंबर को मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण हुआ, तो यहां भी उनकी जाति को लेकर विवाद शुरू हो गया। हाईकोर्ट के आदेश पर 25 सितंबर की रात पुलिस प्रतिमा पर कपड़ा ढकने के लिए पहुंची तो बवाल हो गया। लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। बाजार तक बंद तक हो गया। इस मामले में भी 150 लोगों पर एफआईआर हुई है।

2017 में सहारनपुर में क्या हुआ था?
यूपी के सहारनपुर में दलितों-ठाकुरों के बीच जातीय विवाद की शुरुआत गांव घड़कौली से हुई थी। यहां दलितों ने 'द ग्रेट चमार गांव घड़कौली' का बोर्ड लगाया, तो ठाकुरों ने इसका जवाब 'द ग्रेट राजपूताना' नामक बोर्ड लगाकर दिया। इसके बाद गांव-गांव इसी तरह के कई बोर्ड लगे।

सहारनपुर में साल-2016 में गांव-गांव ऐसे बोर्ड लगने शुरू हुए।
सहारनपुर में साल-2016 में गांव-गांव ऐसे बोर्ड लगने शुरू हुए।

दलितों और राजपूतों की तरफ से एक-दूसरे की बिरादरी के आयोजनों में व्यवधान पैदा किया गया और आखिरकार मई-2017 में जातीय हिंसा हो गई। हिंसा में कई वाहन फूंक दिए गए। 25 से ज्यादा घर जलाए गए। इस हिंसा में चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण का नाम प्रमुख रूप से उभरा, जो आजकल आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इसी हिंसा से चंद्रशेखर को राजनैतिक प्लेटफॉर्म मिला।

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