नोएडा में कबाड़ वाहनों को स्क्रैप करने की यूनिट शुरू:गडकरी बोले-ऑटोमोबाइल सेक्टर में 12 फीसदी का बूम आएगा, 2 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा

गाजियाबाद/नोएडा13 दिन पहले
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नोएडा के सेक्टर-80 में मारुति और टाेयोटा ने मिलकर वाहन रिसाइकिल यूनिट लगाई है। नितिन गडकरी ने इसका उद्घाटन किया। - Dainik Bhaskar
नोएडा के सेक्टर-80 में मारुति और टाेयोटा ने मिलकर वाहन रिसाइकिल यूनिट लगाई है। नितिन गडकरी ने इसका उद्घाटन किया।

पुराने वाहनों को रिसाइकल करने की पहली यूनिट का नोएडा के सेक्टर-80 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुभारंभ कर दिया है। गडकरी ने कहा कि स्क्रैप पॉलिसी हेल्थ प्रॉब्लम और एयर पॉल्यूशन को सुधारने में मददगार होगी। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में ऑटोमोबाइल पार्ट्स के दाम गिरेंगे। स्क्रैप पॉलिसी से ऑटोमोबाइल सेक्टर में 10 से 12 फीसदी का बूम आएगा। 2 लाख लोगों को इस पॉलिसी से रोजगार मिलेगा।

गडकरी ने कहा कि एथेनॉल, सीएनजी, ग्रीन हाइड्रोजन से गाड़ियां चलने से पर्यावरण साफ होगा। भारत मे ग्रीन हाइड्रोजन से गाड़ियां चलाने की तैयारी की जा रही है। प्रदूषण की बढ़ती समस्या को हल करने के लिए यह स्क्रैप पॉलिसी लाई गई है। इसमें कबाड़ गाड़ियों को स्क्रैप बनाया जाएगा, ताकि वे सड़क पर न चलें।

मारुति और टोयोटा ने मिलकर ये यूनिट लगाई है। हर साल यहां 24 हजार पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप में तब्दील किया जा सकेगा।

2019 में गडकरी ने किया था स्क्रैप नीति का ऐलान
साल-2019 में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल प्रस्तावित वाहन कबाड़ नीति पर जल्द फैसला करेगा। इसके बाद वित्त मंत्रालय से भी इस नीति को मंजूरी मिल गई थी। उसी नीति के तहत मारुति और टोयोटा के बीच 6 नवंबर 2019 को इस यूनिट को लगाने पर करार हुआ था।

15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ी के जरूरी कलपुर्जों को सबसे पहले निकाल लिया जाता है।
15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ी के जरूरी कलपुर्जों को सबसे पहले निकाल लिया जाता है।

दोनों कंपनियों की इस यूनिट को लगाने में 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। यह यूनिट अपना टाइम पीरियड पूरा कर चुके वाहनों को कबाड़ या स्क्रैप में बदलेगी। दोनों कंपनियों ने मारुति सुजुकी टोयोत्सु इंडिया प्राइवेट लिमिटेड वेंचर बनाकर यह यूनिट बनाई है।

हर महीने दो हजार वाहन काटने की क्षमता
मारुति सुजुकी टोयोत्सु इंडिया की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में भारतीय कानूनों और वैश्विक स्तर पर मान्य गुणवत्ता और पर्यावरण मानदंडों के तहत ठोस एवं तरल कचरे का पूर्ण प्रबंधन शामिल होगा। शुरुआत में नोएडा की यूनिट हर महीने दो हजार वाहनों को कबाड़ में बदल देगी। इस प्रकार यह यूनिट एक साल में करीब 24 हजार वाहन स्क्रैप बनाएगी। बाद में इसकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है। नोएडा के बाद देश के दूसरे शहरों में इस तरह की यूनिट लगाने की तैयारी है। यह यूनिट ऑटोमोबाइल डीलरों के अलावा ग्राहकों से भी सीधे कबाड़ वाहनों को खरीदेगी।

सबसे पहले गाड़ी के पहिए और अन्य जरूरी सामान निकाल लिए जाते हैं। इसके बाद को अलग किया जाता है।
सबसे पहले गाड़ी के पहिए और अन्य जरूरी सामान निकाल लिए जाते हैं। इसके बाद को अलग किया जाता है।

रिसाइकिलिंग में क्या होता है?
स्क्रैपिंग से पुरानी और असुरक्षित कारों को अलग करने की प्रक्रिया है। इसमें कारों के उपयोगी कॉम्पोनेंट/पार्ट्स को अलग कर दिया जाता है, ताकि उन्हें दोबारा काम में लाया जा सके। इसमें मुख्य घटक स्टील होता है। बैटरी, धातु, ऑयल, कूलेंट को ग्लोबल एनवायरमेंट स्टैंडर्ड के अनुसार नष्ट कर दिया जाता है, क्योंकि इनका दोबारा प्रयोग नहीं हो सकता। जो ग्राहक इस विकल्प को चुनते हैं, उन्हें अपने वाहन का उचित मूल्य भी मिलता है। इसके अलावा कार को स्क्रैप करने के बाद ग्राहक को एक डिस्ट्रक्शन सर्टिफिकेट भी जारी किया जाता है, जिसका उपयोग और परिवहन कार्यालय में अपने वाहन के डी-रजिस्ट्रेशन हेतु कर सकते हैं।

महिंद्रा की ग्रेटर नोएडा में प्लांट की तैयारी
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी ग्रेटर नोएडा में कबाड़ गाड़ियों को ठिकाने लगाने के लिए रिसाइकिल प्लांट लगाने की घोषणा 2019 में की है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने यह प्लांट अपनी सब्सिडियरी कंपनी महिंद्रा असेलो के जरिए लगाने का प्लान बनाया है। इसके लिए पब्लिक सेक्टर की कंपनी एमएसटीसी के साथ गठजोड़ किया है।

इन सबके पीछे सरकार का मकसद क्या है?

  • वाहनों की समय पर रिसाइकिलिंग होने से 99% मटेरियल प्राप्त कर सकेंगे
  • कच्चे माल की लागत 40% तक कम हो सकती है
  • विनिर्माण में तेजी से करीब 35 हजार रोजगार पैदा हो सकते हैं
  • विनिर्माण लागत घटने से वाहन भी सस्ते हो सकते हैं

अहमदाबाद में सबसे बड़ी यूनिट की तैयारी
टाटा मोटर्स ने अहमदाबाद में कबाड़ केंद्र बनाने के लिए गुजरात सरकार से हाल ही में करार किया है। इस केंद्र में सालाना 36 हजार वाहनों की रिसाइकिलिंग की जाएगी। इसमें निजी और वाणिज्यिक दोनों तरह की गाड़ियां शामिल होंगी।