नोएडा में नालों पर बनेंगे STP:एक से दो एमएलडी की होगी क्षमता, शोधित पानी का सिंचाई में होगा प्रयोग

नोएडाएक महीने पहले
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कोंडली नाले में बनाया जा रहा कृतिम वेटलैंड - Dainik Bhaskar
कोंडली नाले में बनाया जा रहा कृतिम वेटलैंड

यमुना को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्राधिकरण नई योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत 30 छोटे नालों के अपस्ट्रीम पर एसटीपी बनाए जाएंगे। प्रत्येक नाले पर लगाए जाने वाले एसटीपी की क्षमता एक या दो एमएलडी की होगी। जो नालों में अप स्ट्रीम में आने वाले पानी शोधित करेगा।

इस पानी के लिए एक स्टोरेज भी वहीं बनाया जाएगा। स्टोरेज पानी का प्रयोग आसपास की ग्रीन बेल्ट और पार्कों में सिचाईं के लिए किया जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि 2023 तक नोएडा के सभी नाले और सिचाईं विभाग के नाले में दूषित पानी नहीं के बराबर ही रहेगा। यमुना में गिरने वाला पानी भी साफ होगा। जिससे प्रदूषण का स्तर कम होगा।

ये चित्र कोंडली नाले का है नोएडा के सभी छोटे नाले में इसमें गिरते है
ये चित्र कोंडली नाले का है नोएडा के सभी छोटे नाले में इसमें गिरते है

स्टोरेज प्लांट से पाइप के जरिए पार्कों और ग्रीन बेल्ट तक पानी को पहुंचाया जाएगा। इस पानी का प्रयोग सिचाईं के लिए किया जाएगा। शेष पानी को नाले में आगे के छोड़ दिया जाएगा। बड़ी गंदगी को रोकने के लिए नालों पर बंबू का प्रयोग किया गया है।

प्राधिकरण का प्रशासिनक खंड का कार्यालय
प्राधिकरण का प्रशासिनक खंड का कार्यालय

पांच कृतिम वेटलैंड तैयार किए जा रहे
कोंडली नाले को साफ करने के लिए सेक्टर-50 में वेटलैंड बनाया जा रहा है। इस पर करीब 7 करोड़ रुपए का खर्च किए गए है। पैसा नोएडा प्राधिकरण देगा जबकि निर्माण यूपी सिचाईं विभाग करवा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में सेक्टर-11, 137 सहित अन्य जगह वेटलैंड बनने प्रस्तावित हैं। कुल पांच कृतिम वेटलैंड तैयार किए जाएंगे।

नोएडा में बना एसटीपी प्लांट
नोएडा में बना एसटीपी प्लांट

190 एमएलडी पानी किया जा रहा शोधित
नोएडा में चार एसटीपी प्लांट है। जो पहले से ही 190 एमएलडी सिवरेज पानी को शोधित कर रहे है। इसमें 135 एमएलडी पानी का प्रयोग हो रहा है। नालों के ऊपर एसटीपी बन जाने से शोधन की क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा एसबीआर तकनीक पर 143.58 करोड़ रुपए की लागत से सेक्टर-168 में एसटीपी प्लांट तैयार है। इसकी क्षमता 100 एमएलडी है। इसके शुरू होने से सीवेज डिस्ट्रिक्ट-डी के कुल 91 सेक्टरों की आबादी को लाभ मिलेगा।

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