नोएडा में 40 मंजिला इमारतें गिरेंगी:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सुपरटेक एमराल्ड के दोनों टॉवर 3 महीने में गिराएं, निवेशकों का पैसा 12% ब्याज के साथ लौटाएं

नोएडा3 महीने पहले
2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इन दोनों टॉवर को गिराने का आदेश दिया था।

नोएडा में बने सुपरटेक एमेराल्ड की 40 मंजिल की दो इमारतों को सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के अंदर गिराने का आदेश दिया है। ये दोनों इमारतें नोएडा एक्सप्रेस-वे के पास बनी हैं। दोनों में एक-एक हजार फ्लैट्स हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब नक्शा पास हुआ था, जब दोनों टॉवरों की अथॉरिटी से अनुमति नहीं ली गई थी। नियमों का उल्लंघन करके यह टॉवर बनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निवेशकों को 12% ब्याज के साथ पूरी रकम लौटाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि टॉवर तोड़ते समय दूसरी इमारतों को नुकसान न पहुंचे इसका ख्याल रखा जाए। इसके अलावा सुपरटेक की तरफ से RWA को दो करोड़ रुपए का हर्जाना भी देना होगा।

24 की मंजूरी लेकर 40 फ्लोर बनाए
नोएडा प्राधिकरण ने 2006 में सुपरटेक को 17.29 एकड़ (लगभग 70 हजार वर्ग मीटर) जमीन सेक्टर-93 ए में आवंटित की थी। इस सेक्टर में एमेराल्ड कोर्ट ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के तहत 15 टावरों का निर्माण किया गया था। प्रत्येक टॉवर में 11 मंजिल बनी थीं। 2009 में नोएडा अथॉरिटी के पास सुपरटेक बिल्डर ने रिवाइज्ड प्लान जमा कराया।

इस प्लान में एपेक्स व सियान नाम से दो टावरों के लिए एफएआर खरीदा। बिल्डर ने इन दोनों टावरों के लिए 24 फ्लोर का प्लान मंजूर करा लिया। इस पर बिल्डर ने 40 फ्लोर के हिसाब से 857 फ्लैट बनाने शुरू कर दिए। इनमें 600 फ्लैट की बुकिंग हो गई। ज्यादातर ने फ्लैट की रकम भी जमा करानी शुरू कर दी।

कोर्ट ने तीन महीने के अंदर इन दोनों बिल्डिंग्स को गिराने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने तीन महीने के अंदर इन दोनों बिल्डिंग्स को गिराने का आदेश दिया है।

आरडब्लूए ने किया विरोध
सेक्टर-93 ए के परिसर में 11 मंजिल वाले 15 टावरों के बीच जब दो ऊंचे टावर बनने शुरू हुए तो रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन यानी आरडब्ल्यूए ने आपत्ति दर्ज कराई। मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की गई। तर्क था कि जिस एरिया में ग्रीनरी बताई थी, वहां पर ये टावर बनाए गए। इसके साथ यह भी कहा गया कि यूपी अपार्टमेंट एक्ट की शर्तों के तहत 60 पर्सेंट बायर्स की बिना सहमति के रिवाइज्ड प्लान को अप्रूवल नहीं दिया जा सकता था। इसकी एनओसी नहीं ली गई। आरडब्लूए ने कहा कि बिल्डिंग का निर्माण 24 मंजिल के हिसाब से किया गया है, उसे अब 40 मंजिल का बनाया जा रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में भी पैरवी की गई थी।

2014 में हाईकोर्ट ने दिया था गिराने का आदेश
इस मामले में चल रही सुनवाई के दौरान 11 अप्रैल 2014 में हाईकोर्ट ने दोनो टावरों को गिराने का आदेश दिया। तब तक एपेक्स टावर में 21 मंजिल और सियान टावर में 17 मंजिल बन चुकी थे। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि इन टावरों में फ्लैट खरीदने वालों के लिए दो विकल्प दिए जाएं।

इनमें बिल्डर रिफंड मांगने वालों को 14 फीसदी ब्याज के साथ रकम वापस करेगा। यदि बायर पैसा वापस नहीं लेना चाहते हैं तो उन्हें दूसरे प्रोजेक्ट में शिफ्टिंग का विकल्प भी दिया जाए। इस फैसले के विरोध में बिल्डर सुप्रीम कोर्ट चले गए और सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के टावरों को गिराने के आदेश पर स्टे दे दिया।

बिल्डर का तर्क था कि पूरे टॉवर को गिराने का आदेश अव्यवहारिक है। इसमें जितने तक की अप्रूव बिल्डिंग थी, उसे कैसे गिराया जा सकता है। इसके साथ-साथ जिन बायर्स ने फ्लैट बुक कराए थे उनके हितों का भी ध्यान रखा जाना था।

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