पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

छह गांव के किसानों का जीडीए पर धरना:2014 में गई थी 2614 एकड़ जमीन, नई नीति से मुआवजा मांग रहे दो हजार किसान; धरने में एक महिला हुई बेहोश

गाजियाबाद20 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
छह गांव के किसानों ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के बाहर धरना दिया, इसमें महिलाएं भी शामिल हुईं। - Dainik Bhaskar
छह गांव के किसानों ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के बाहर धरना दिया, इसमें महिलाएं भी शामिल हुईं।

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की मधुबन बापूधाम योजना से प्रभावित छह गांव के सैकड़ों किसानों ने सोमवार को जीडीए का घेराव किया। वह जीडीए के बाहर ही टैंट-तंबू लगाकर धरने पर बैठ गए हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई। आनन-फानन में उन्हें प्राथमिक उपचार दिलाया गया। किसानों की मांग है कि उन्हें नई नीति के अनुसार मुआवजा दिया जाए।
छह गांवों की गई थी 2614 एकड़ जमीन
लोनी इलाके में आवास-विकास परिषद ने मधुबन बापूधाम आवासीय योजना के लिए मंडोला, नानू, पंचलोक, लुतफुल्लापुर नवादा, अगरौला, मिलक बामला गांव की 2614 एकड़ जमीन का अधिग्रहण साल-2014 में किया था। किसानों की मांग है कि उन्हें जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए। इसके लिए पिछले पांच साल से आंदोलन जारी है। समय-समय पर अनेक बार धरना-प्रदर्शन हुए हैं। तमाम बार किसानों की अफसरों से वार्ता भी हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला।
नई नीति से मुआवजा मांग रहे दो हजार किसान
किसान आंदोलन के सहसंयोजक नीरज त्यागी के अनुसार, छह गांवों में दो हजार किसान प्रभावित हैं, जिनकी जमीन अधिग्रहण में गई थी। 2614 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने के लिए आवास-विकास ने साल-1998 में पहली अधिसूचना जारी की थी। जिसके बाद इस इलाके में खरीद-फरोख्त, ट्यूबवैल बोरिंग करने और मकान बनाने पर पाबंदी लगा दी गई। 2006 में शासन ने खुद ही इस योजना को स्थगित कर दिया। इस पर किसानोंने कहा कि अब यदि पुन: योजना लागू होती है तो नए सिरे से ढांचा बनेगा। लेकिन सरकार ने कुछ सालों बाद नया नियम लागू करके पुन: जमीन अधिग्रहित कर ली। किसानों की मांग है कि जब जमीन ली गई, उस वक्त के रेट के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए।
यह है किसानों की मांगें

  • इस योजना को भूमि अधिग्रहण अधिनियम पुर्नवास एवं पुर्नस्थापन नीति 2013 में शामिल किया जाए।
  • किसानों को बाजार भाव (सर्किल रेट) का चार गुना मुआवजा व 20 फीसदी विकसित भूखंड दिए जाएं।
खबरें और भी हैं...