रैपिड रेल बनाने वाली कंपनी 15 साल करेगी रखरखाव:30 ट्रेन रैपिड और 10 ट्रेन मेरठ मेट्रो के लिए आएंगी, 100% स्वदेशी है यह प्रोजक्ट

गाजियाबाद3 महीने पहले
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पहली रीजनल रैपिड रेल अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें बैठने के बाद आपको हवाईजहाज जैसी फीलिंग आएगी। - Dainik Bhaskar
पहली रीजनल रैपिड रेल अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें बैठने के बाद आपको हवाईजहाज जैसी फीलिंग आएगी।

देश की पहली रीजनल रैपिड रेल पूरी तरह स्वदेशी है। हैदराबाद में इसे डिजाइन किया गया था और गुजरात के सांवली स्थित एल्सटॉम कंपनी के प्लांट में यह बनकर तैयार हुई है। यह रैपिड रेल 'मेक इन इंडिया' और 'मेड इन इंडिया' दोनों ही बातों को पूरा करेगी।

NCRTC के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने बताया, एल्सटॉम कंपनी ने ही रैपिड रेल तैयार की है। अब यही कंपनी इसका अगले 15 साल तक रखरखाव भी करेगी। भारत सरकार से हुए अनुबंध में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के लिए रेल डिजाइनिंग, डिलीवरी, इन्स्टॉलिंग, टेस्टिंग एंड सिग्नलिंग, ट्रेन कंट्रोल, सुपरविजन, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और दूरसंचार प्रणाली शामिल हैं। मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल के लिए गुजरात से कुल 30 ट्रेनें आएंगी, जबकि तीन कोच वाली 10 ट्रेनें मेरठ सिटी मेट्रो के लिए आएंगी।

RRTS को पहली रैपिड रेल की चाभी मिल गई है। अगले दो हफ्ते में यह रेल गाजियाबाद के दुहाई डिपो में पहुंच जाएगी।
RRTS को पहली रैपिड रेल की चाभी मिल गई है। अगले दो हफ्ते में यह रेल गाजियाबाद के दुहाई डिपो में पहुंच जाएगी।

हर साल ढाई लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड कम होने का अनुमान

अपने स्लीक और आधुनिक डिजाइन के साथ ये ट्रेनसेट रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से लैस हल्के वजन वाले होंगे। ये ट्रेन सेट ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी), ऑटोमेटिक ट्रेन कंट्रोल (एटीसी) और ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन्स (एटीओ) से लैस होंगे। रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम इन ट्रेनों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है कि यह ब्रेक लगाने पर बिजली पैदा करती है और यह उत्पादित बिजली ट्रेन सिस्टम के ओवरहेड ट्रैक्शन के माध्यम से वापस इलेक्ट्रिक ग्रिड में चली जाती है।

RRTS कॉरिडोर से प्रतिवर्ष वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में ढाई लाख टन कार्बन डाइ ऑक्साइड कम होने का अनुमान है। लगभग आठ लाख यात्रियों के साथ RRTS सबसे अधिक ऊर्जा कुशल फ्यूचरिस्टिक ट्रांजिट सिस्टम होगा।

गुजरात के सांवली डिपो में रैपिड रेल के कोच का निर्माण हो रहा है। यह जल्द ही ट्रैक पर दौड़ती हुई नजर आएगी।
गुजरात के सांवली डिपो में रैपिड रेल के कोच का निर्माण हो रहा है। यह जल्द ही ट्रैक पर दौड़ती हुई नजर आएगी।

इस ट्रेन की विशेषताएं

  • लंबी नाक और प्लग-इन-दरवाजे के साथ एयरोडायनेमिक प्रोफाइल हाई स्पीड पर हवा का खिंचाव कम करेगी।
  • प्रवेश और निकास के लिए यात्रियों के लिए अधिकतम स्थान के लिए चौड़े गलियारे के साथ एसी कोच।
  • टिंट वाले बड़ी खिड़की में लगे हुए शीशे से यात्री सफर के दौरान बाहर का मनोरम दृश्य देख सकेंगे।
  • एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई 2X2 ट्रांसवर्स सीटिंग, ओवरहेड लगेज रैक वाली कुशनदार सीटें।
  • हर ट्रेन में एक 'प्रीमियम क्लास कार' लगी होगी, जो आरामदेह, सुविधाजनक और यूजर फ्रेंडली होगी।
  • अधिक लेगरूम, कोट हैंगर के साथ चौड़ी सीटें होंगी और वेंडिंग मशीन की सुविधा से सुसज्जित होगी।
  • महिलाओं के लिए आरक्षित एक कोच। एनर्जी एफिसियेंट, रोशनी-आधारित ऑटो कंट्रोल लाइट सिस्टम।
  • सीसीटीवी निगरानी, आधुनिक पैसेंजर अनाउंसमेंट और डिजिटल पैसेंजर इनफार्मेशन सिस्टम (PAPIS)।
  • वाई-फाई और ऑनबोर्ड इन्फोटेनमेंट के साथ ही हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग के लिए यूएसबी पोर्ट होगा।
  • दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर का स्थान और आपातकालीन चिकित्सा परिवहन के लिए स्ट्रेचर की जगह दी।
  • डायनैमिक रूट मैप डिस्प्ले, आपातकालीन संचार सुविधाएं, इंडोर और आउटडोर सर्विलांस सिस्टम मौजूद।
  • उन्नत सुरक्षा के लिए उन्नत ETCS स्तर II सिग्नलिंग, स्वचालित ट्रेन संचालन और प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर आधारित डिजाइन और निर्माण खतरे का आकलन कर सकने में सक्षम है।
  • आग के लिए फायर डिटेक्शन सिस्टम। वेसाइड उपकरण के साथ एक्सल बॉक्स के तापमान की निगरानी।

दो हफ्ते में गाजियाबाद आ जाएगी पहली ट्रेन

दिल्ली से मेरठ के बीच 82 किलोमीटर लंबे रूट पर रीजनल रैपिड रेल दौड़ेगी। पहले चरण में गाजियाबाद के साहिबाबाद से दुहाई डिपो तक साल 2023 में इसका संचालन होगा। इसके लिए पहले चरण का काम तेजी से चल रहा है। कुल 30 ट्रेन सेट गुजरात से आने हैं, जिसकी पहली डिलीवरी शनिवार को हुई है। पहला ट्रेन सेट अगले दो हफ्ते में गाजियाबाद के दुहाई स्थित डिपो में पहुंच जाएगा।

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