किसान आंदोलन में अब तक 700 किसानों की मौत:26 नवंबर को धरने को पूरा हो रहा एक साल, आंदोलन ने देखें कई उतार-चढ़ाव

गाजियाबाद17 दिन पहले
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दिल्ली के बॉर्डर पर 26 नवंबर 2020 से चल रहे किसान आंदोलन को 7 दिन बाद (26 नवंबर) एक साल पूरा हो जाएगा। - Dainik Bhaskar
दिल्ली के बॉर्डर पर 26 नवंबर 2020 से चल रहे किसान आंदोलन को 7 दिन बाद (26 नवंबर) एक साल पूरा हो जाएगा।

दिल्ली के बॉर्डर पर 26 नवंबर 2020 से चल रहे किसान आंदोलन को 7 दिन बाद (26 नवंबर) पूरा एक साल हो जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा का दावा है कि एक साल के भीतर आंदोलन में करीब 700 किसानों की मौत हो चुकी है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने किसान आंदोलन में 24 नवंबर 2020 से 21 सितंबर 2021 तक मृत हुए सभी किसानों का डेटाबेस तैयार करके एक ब्लॉग (https://humancostoffarmersprotest.blogspot.com) बनाया है। इस पर 605 किसानों का नाम, पता, उम्र और उनके निधन की तारीख फोटो सहित लिखी है।

इसमें एसकेएम ने 605 किसानों की प्रोफाइल के साथ न्यूज आर्टिकल के लिंक भी दिए हैं। हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े हरिंदर हैप्पी का कहना है कि इस ब्लॉग के बनाए जाने के बाद से भी करीब 100 किसानों की मौत हो चुकी है। इस प्रकार किसान आंदोलन में अब तक 700 किसान शहीद हो चुके हैं।

किसान आंदोलन के टर्निंग पॉइंट

  • 24 से 26 नवंबर 2020 के बीच दिल्ली के गाजीपुर, सिंघु, टिकरी और शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसानों के जत्थे पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।
  • 26 जनवरी 2021 को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली। इस दौरान कई जगह पर हिंसा हुई। लालकिले पर धार्मिक झंडा फहराया गया। हिंसा में दिल्ली में 59 मुकदमे दर्ज किए गए। 158 किसान गिरफ्तार हुए।
  • 28 जनवरी को गाजीपुर बॉर्डर पर भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसू निकले जिसके बाद माहौल बदलता चला गया। आंदोलन का केंद्र बिंदु गाजीपुर बॉर्डर हो गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में राकेश टिकैत, चौधरी अजीत सिंह, जयंत चौधरी ने तमाम किसान पंचायतें कीं।
  • 22 जुलाई से 9 अगस्त तक दिल्ली में जंतर-मंतर पर किसान संसद चली। किसान रोजाना सिंघु बॉर्डर से बसों में आते, जंतर-मंतर पर बैठते और शाम को लौट जाते। मकसद था कि मानसून सत्र में आ रहे सांसद उनकी आवाज बनें।
  • 28 अगस्त को करनाल में सीएम मनोहर लाल खट्टर का विरोध कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज हो गया। इसमें कई दर्जन किसान चोटिल हुए। एक किसान की मौत हो गई। चार दिन तक करनाल में मिनी सचिवालय के बाहर धरना चला।
  • 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चा ने महापंचायत की। दावा किया कि इसमें 10 लाख से ज्यादा किसान आए। इस महापंचायत से सरकार के खिलाफ मिशन यूपी और मिशन उत्तराखंड की शुरुआत हुई है।
  • 03 अक्टूबर लखीमपुर खीरी में प्रदर्शन कर रहे किसानों को मंत्री की गाड़ी से कुचल दिया गया। हादसे और हिंसा में 8 लोगों की मौत हुई थी।

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