सीईएल कंपनी बेचने की डील कैंसिल:2800 करोड़ वाली कंपनी 210 करोड़ रुपए में बेचने पर केंद्र सरकार ने जांच बैठाई, फिलहाल निजीकरण टला

गाजियाबाद14 दिन पहले
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केंद्र सरकार ने 29 नवंबर 2021 को सीईएल कंपनी को 210 करोड़ रुपए में बेचने की डील नंदल फाइनेंस से की थी। - Dainik Bhaskar
केंद्र सरकार ने 29 नवंबर 2021 को सीईएल कंपनी को 210 करोड़ रुपए में बेचने की डील नंदल फाइनेंस से की थी।

रडार सहित कई रक्षा उपकरण बनाने वाली गाजियाबाद (UP) की सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) को बेचने की योजना केंद्र सरकार ने फिलहाल टाल दी है। केंद्र सरकार ने इस पर भी जांच शुरू कर दी है कि 2800 करोड़ रुपए वाली कंपनी को कैसे महज 210 करोड़ रुपए में बेचा जा रहा था। यह 'दैनिक भास्कर' की खबर का बड़ा असर है। भास्कर ने 7 जनवरी को ही इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।

सचिव बोले- खरीदार कंपनी को जारी नहीं किया इंडेंट लेटर

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया को देखने वाले निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने बिक्री प्रक्रिया टालने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग कंपनी को फिलहाल लेटर ऑफ इंडेंट जारी नहीं किया गया है। नंदल द्वारा लगाई गई 210 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली में कम मूल्यांकन के आरोपों की जांच कराई जा रही है। बता दें कि 29 नवंबर 2021 को केंद्र सरकार के उपक्रम वाली सीईएल कंपनी 210 करोड़ रुपए में नंदल फाइनेंस को बेच दी गई थी, जबकि इसका मूल्यांकन करीब 2800 करोड़ रुपए आंका गया था। इसे लेकर पीएमओ समेत कई जगह कर्मचारियों ने चिट्ठी भेजी थी। एम्प्लाइज यूनियन अध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि बिक्री की डील कैंसिल हो गई है। यह कर्मचारियों की बड़ी जीत है।

गाजियाबाद में सीईएल कंपनी साल-1974 में स्थापित हुई थी।
गाजियाबाद में सीईएल कंपनी साल-1974 में स्थापित हुई थी।

रडार, मिसाल के उपकरण बनाती है यह कंपनी
गाजियाबाद के साहिबाबाद में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड साल-1974 में केंद्र सरकार के विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्थापित की थी। कहा जाता है कि देश में सबसे पहला सोलर पैनल बनाने वाली यही कंपनी थी। वर्तमान में इस कंपनी में फेज कंट्रोल मॉड्यूल डिवाइस बनती है जो रडार के एंटीना में लगती है। मिसाल में सबसे आगे लगने वाला रोडोम भी यहीं तैयार होता है। इसके अलावा तमाम रक्षा उपकरण बनते हैं। रेलवे के सेफ्टी इक्यूपमेंट मार्केट पर करीब 65 फीसदी कब्जा CEL का है। इस कंपनी में 1100 कर्मचारी कार्यरत हैं, इनमें करीब 300 कर्मचारी परमानेंट हैं।

सीईएल की कॉस्ट 2800 करोड़ रुपए
सीईएल एम्प्लाइज यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार के अनुसार, कंपनी की 50 एकड़ जमीन का वर्तमान सर्किल रेट 440 करोड़ रुपए है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 296 करोड़ रुपए टर्नओवर के साथ सारी देनदारियों को चुकाने के बावजूद इस कंपनी ने 24 करोड़ का लाभ पाया। 1500 करोड़ रुपए के ऑर्डर फिलहाल इस कंपनी को मिले हुए हैं। 34 करोड़ रुपए बिल्डिंग कॉस्ट, 67 करोड़ रुपए वीआरएस, 25 करोड़ रुपए का सैलरी और एरियर समेत इस कंपनी की अनुमानित कीमत करीब 2800 रुपए बैठती है। सरकार ने जिस कंपनी को बिड दी है, उसका कुल सालाना टर्नओवर ही 12 करोड़ रुपए का है। निजीकरण के खिलाफ एम्प्लाइज यूनियन के बैनर तले कर्मचारी पिछले कई दिन से आंदोलनरत हैं।

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