पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Ghaziabad
  • Farmers Of Six Villages, Seeking Compensation From The New Policy, Lay Down By Digging Pits, Said They Will Not Come Out Without Solving The Problem

गाजियाबाद में कब्र में लेटे किसान:जमीन अधिग्रहण के विरोध में 6 गांवों के किसान जमीन खोदकर लेटे, बोले- समाधान हुए बिना बाहर नहीं निकलेंगे

गाजियाबाद9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
गाजियाबाद में मंडोला विहार योजना से प्रभावित किसानों ने इस तरह भू-समाधि ले ली है। - Dainik Bhaskar
गाजियाबाद में मंडोला विहार योजना से प्रभावित किसानों ने इस तरह भू-समाधि ले ली है।

गाजियाबाद में आवास-विकास की मंडोला विहार योजना से प्रभावित 6 गांवों के कई किसानों ने बुधवार सुबह भू-समाधि ले ली। वे जमीन में कब्र खोदकर लेट-बैठ गए। इस दौरान किसानों ने कहा कि जब तक मुआवजा संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, वे कब्र से बाहर नहीं निकलेंगे।

मंडोला विहार योजना के तहत साल 1998 में 6 गांव (मंडोला, नानू, मिलक बामला, अगरोला, नवादा, मक्सूदाबाद) की 2614 एकड़ भूमि अधिग्रहित की थी। उस वक्त 1100 रुपए की दर से किसानों को मुआवजा दिया गया था। 2 दिसंबर 2016 को मंडोला समेत 6 गांव के किसानों ने '2013 भूमि अधिग्रहण अधिनियम' के तहत भूमि का मुआवजा देने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

तब से आज तक धरना जारी है। इस दौरान किसानों ने विरोध के कई तरीके बदले, लेकिन समस्या हल नहीं हुई। अब किसानों ने ऐलान किया था कि 14 सितंबर तक उनकी समस्या हल नहीं हुई तो वे जिंदा ही भू-समाधि ले लेंगे। इसके लिए किसानों ने धरना स्थल के नजदीक कई दिन पहले गड्ढे भी खोद लिए थे।

1998 में जमीन का अधिग्रहण हुआ था। किसानों की मांग है कि उन्हें नई अधिग्रहण नीति के अनुसार ही मुआवजा दिया जाए।
1998 में जमीन का अधिग्रहण हुआ था। किसानों की मांग है कि उन्हें नई अधिग्रहण नीति के अनुसार ही मुआवजा दिया जाए।

10 सितंबर को एडीएम से भी वार्ता हुई विफल
बुधवार सुबह किसान नेता मनवीर तेवतिया के नेतृत्व में 20 से ज्यादा किसान कब्र खोदकर लेट-बैठ गए। किसान नेता नीरज त्यागी ने कहा कि अनेक बार वह धरने-प्रदर्शन कर चुके हैं। तमाम बार अफसरों से वार्ता हो चुकी है। 10 सितंबर को एडीएम प्रशासन ऋतु सुहास ने यहां आकर भरोसा दिया था कि समस्या का हल निकल जाएगा, मगर कुछ नहीं हुआ। इसलिए, किसान अब इन गड्ढों से तभी बाहर निकलेंगे, जब उनकी समस्या हल हो जाएगी।

मुआवजे को लेकर अनेक बार किसानों और जिला प्रशासन के बीच वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
मुआवजे को लेकर अनेक बार किसानों और जिला प्रशासन के बीच वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

कौन हैं किसान नेता मनवीर तेवतिया?
इस आंदोलन की अगुवाई अब प्रमुख किसान नेता मनवीर तेवतिया कर रहे हैं। मनवीर मूल रूप से बुलंदशहर जिले में गुलावठी क्षेत्र के ग्राम नत्थूगढ़ी के रहने वाले हैं। छात्र राजनीति में वह एबीवीपी से जुड़े रहे। साल-2006 में बसपा के टिकट पर नगर पालिका गुलावठी चेयरमैन का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। मुआवजे को लेकर ग्रेटर नोएडा के भट्टा पारसौल और अलीगढ़ के टप्पल में चले किसान आंदोलनों का नेतृत्व मनवीर तेवतिया ने किया। दोनों जगह हिंसा हुई। मनवीर तेवतिया जेल भी गए थे।

खबरें और भी हैं...