गाजीपुर बॉर्डर से 10 यादगार फोटो:सर्दी-गर्मी और बारिश की परवाह किए बिना साल भर डटे रहे किसान

गाजियाबाद6 महीने पहलेलेखक: सचिन गुप्ता
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उत्तर प्रदेश और दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहा किसान आंदोलन कभी भी खत्म हो सकता है। केंद्र सरकार किसानों की सभी मांगों पर सहमत है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) एक-दो बिंदुओं पर सरकार से स्पष्टीकरण चाहता है। माना जा रहा है कि इन बिंदुओं पर सरकार की तरफ से स्पष्टीकरण मिलते ही SKM कभी भी आंदोलन वापसी का ऐलान कर देगा।

अपनी लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिए किसानों ने कठोर संघर्ष किया। पुलिस ने दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए खूब जतन किए। दैनिक भास्कर एक साल तक चले किसान आंदोलन की उन्हीं 10 यादगार फोटो को ले आया है। देखिए किसान आंदोलन सालभर कैसे रहा...

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सैकड़ों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बैठकर 26 नवंबर 2020 को यूपी-दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे। वह संसद भवन जाना चाहते थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनको इसी बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। ऐसे में किसान वहीं डेरा डालकर धरने पर बैठ गए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सैकड़ों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बैठकर 26 नवंबर 2020 को यूपी-दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे। वह संसद भवन जाना चाहते थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनको इसी बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। ऐसे में किसान वहीं डेरा डालकर धरने पर बैठ गए।
शुरुआत के दिनों में किसानों ने टेंट-तंबू नहीं लगाए थे। ऐसे में उन्हें कई सर्द रातें खुले आसमान के नीचे सड़क पर गुजारनी पड़ीं। इस दौरान कई बुजुर्ग किसानों की विभिन्न बीमारियों से मौत भी हुई। जब किसानों को लगा कि यह आंदोलन लंबा चलेगा, तब उन्होंने अस्थायी ठिकाने बनाने शुरू किए।
शुरुआत के दिनों में किसानों ने टेंट-तंबू नहीं लगाए थे। ऐसे में उन्हें कई सर्द रातें खुले आसमान के नीचे सड़क पर गुजारनी पड़ीं। इस दौरान कई बुजुर्ग किसानों की विभिन्न बीमारियों से मौत भी हुई। जब किसानों को लगा कि यह आंदोलन लंबा चलेगा, तब उन्होंने अस्थायी ठिकाने बनाने शुरू किए।
दिसंबर के दूसरे हफ्ते में गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने सबसे पहले एक मंच बनाया। इसके आगे दरी बिछाई। मंच के जरिए अपनी बात को कहना शुरू किया। धीरे-धीरे झोपड़ियां बननी शुरू हो गईं। आखिरकार इस तरह से बॉर्डर पर किसानों की बस्ती बस गई।
दिसंबर के दूसरे हफ्ते में गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने सबसे पहले एक मंच बनाया। इसके आगे दरी बिछाई। मंच के जरिए अपनी बात को कहना शुरू किया। धीरे-धीरे झोपड़ियां बननी शुरू हो गईं। आखिरकार इस तरह से बॉर्डर पर किसानों की बस्ती बस गई।
26 जनवरी 2021 को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान लालकिले पर हिंसा हुई। इसके बाद ऐसा लगा कि अब आंदोलन खत्म होने की ओर है। 28 जनवरी को गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे राकेश टिकैत के आंसू निकल पड़े। टिकैत ने आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ नेता उनके आंदोलन को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं। इसके बाद आंदोलन में नई जान आ गई। किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र गाजीपुर बॉर्डर बन गया।
26 जनवरी 2021 को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान लालकिले पर हिंसा हुई। इसके बाद ऐसा लगा कि अब आंदोलन खत्म होने की ओर है। 28 जनवरी को गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे राकेश टिकैत के आंसू निकल पड़े। टिकैत ने आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ नेता उनके आंदोलन को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं। इसके बाद आंदोलन में नई जान आ गई। किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र गाजीपुर बॉर्डर बन गया।
26 जनवरी को हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस सतर्क हो गई। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे की सारी लेन बंद कर दी। हालांकि, कई महीनों बाद दिल्ली से मेरठ आने वाली लेन खोल दी गईं। लेकिन, गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाली लेन इसी तरह एक साल से बंद पड़ी है। इससे लाखों लोग रोजाना परेशान होते हैं।
26 जनवरी को हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस सतर्क हो गई। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे की सारी लेन बंद कर दी। हालांकि, कई महीनों बाद दिल्ली से मेरठ आने वाली लेन खोल दी गईं। लेकिन, गाजियाबाद से दिल्ली जाने वाली लेन इसी तरह एक साल से बंद पड़ी है। इससे लाखों लोग रोजाना परेशान होते हैं।
पुलिस ने इन बैरिकेड्स के बीच में इस तरह लोहे की कीलें जमीन में गड़वा दीं, ताकि किसानों के ट्रैक्टर भी पार न होने पाएं। दिल्ली पुलिस की मंशा स्पष्ट थी कि 26 जनवरी की हिंसा के बाद किसान किसी भी तरह दिल्ली की सीमा में एंट्री न करें। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जब यह मुद्दा छाया तो पुलिस को कीलें हटवानी पड़ी।
पुलिस ने इन बैरिकेड्स के बीच में इस तरह लोहे की कीलें जमीन में गड़वा दीं, ताकि किसानों के ट्रैक्टर भी पार न होने पाएं। दिल्ली पुलिस की मंशा स्पष्ट थी कि 26 जनवरी की हिंसा के बाद किसान किसी भी तरह दिल्ली की सीमा में एंट्री न करें। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जब यह मुद्दा छाया तो पुलिस को कीलें हटवानी पड़ी।
29 अक्टूबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद दिल्ली पुलिस ने एक्सप्रेस-वे से बैरिकेडिंग हटा दी। लेकिन, अभी 10 दिन पहले पुलिस ने बैरिकेड्स फिर से लगा दिए हैं। यहां हर पल सीआरपीएफ के जवान तैनात रहते हैं। वह इस बैरिकेडिंग से सिर्फ इमरजेंसी वाहनों को ही दिल्ली में एंट्री देते हैं।
29 अक्टूबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद दिल्ली पुलिस ने एक्सप्रेस-वे से बैरिकेडिंग हटा दी। लेकिन, अभी 10 दिन पहले पुलिस ने बैरिकेड्स फिर से लगा दिए हैं। यहां हर पल सीआरपीएफ के जवान तैनात रहते हैं। वह इस बैरिकेडिंग से सिर्फ इमरजेंसी वाहनों को ही दिल्ली में एंट्री देते हैं।
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने अब आलीशान टेंट-तंबू लगा लिए हैं। कई तंबुओं में सोफे, डबल बैड और एयर कंडीशन की सुविधा भी है। अब ठंड का मौसम आ गया है तो कुछ तंबुओं में ब्लोअर भी लग गए हैं। किसानों ने चंदा इकट्ठा करके कई तंबुओं में रहने लायक सुविधाएं कराई हैं।
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने अब आलीशान टेंट-तंबू लगा लिए हैं। कई तंबुओं में सोफे, डबल बैड और एयर कंडीशन की सुविधा भी है। अब ठंड का मौसम आ गया है तो कुछ तंबुओं में ब्लोअर भी लग गए हैं। किसानों ने चंदा इकट्ठा करके कई तंबुओं में रहने लायक सुविधाएं कराई हैं।
किसान आंदोलन अब आखिरी मोड में है। केंद्र सरकार किसानों की ज्यादातर मांग पर सहमत दिख रही है। ऐसे में कभी भी आंदोलन वापसी का ऐलान हो सकता है। इसे लेकर गाजीपुर बॉर्डर पर हलचल है। अब पहले की अपेक्षा ज्यादा किसान जुट रहे हैं।
किसान आंदोलन अब आखिरी मोड में है। केंद्र सरकार किसानों की ज्यादातर मांग पर सहमत दिख रही है। ऐसे में कभी भी आंदोलन वापसी का ऐलान हो सकता है। इसे लेकर गाजीपुर बॉर्डर पर हलचल है। अब पहले की अपेक्षा ज्यादा किसान जुट रहे हैं।
किसान आंदोलन की वजह से गाजीपुर बॉर्डर पिछले एक साल से बंद है। यदि अब किसान आंदोलन वापस होता है तो कई लाख लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल उन्हें गाजियाबाद से दिल्ली जाने के लिए कई किलोमीटर घूमकर सफर तय करना पड़ता है। इसमें समय अतिरिक्त बर्बाद होता है।
किसान आंदोलन की वजह से गाजीपुर बॉर्डर पिछले एक साल से बंद है। यदि अब किसान आंदोलन वापस होता है तो कई लाख लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल उन्हें गाजियाबाद से दिल्ली जाने के लिए कई किलोमीटर घूमकर सफर तय करना पड़ता है। इसमें समय अतिरिक्त बर्बाद होता है।
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