IAS ऑफिसर की बेटी लव जिहाद में फंसी:पहले दोस्ती की, फिर उबला हुआ तेल डालकर बदसूरत करने का प्रयास; गाजियाबाद में हुई FIR

गाजियाबाद2 महीने पहले
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आईएएस ऑफिसर की शिकायत पर दिल्ली से जांच ट्रांसफर हुई। जिसके बाद गाजियाबाद नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ है। - Dainik Bhaskar
आईएएस ऑफिसर की शिकायत पर दिल्ली से जांच ट्रांसफर हुई। जिसके बाद गाजियाबाद नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ है।

दिल्ली में तैनात IAS ऑफिसर रणजीत कुमार सारंगी ने उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद में अब्दुल रहमान नामक व्यक्ति पर धोखाधड़ी करके बेटी से शादी करने की FIR दर्ज कराई है। ऑफिसर का सीधे तौर पर आरोप है कि रहमान ने यह शादी सिर्फ और सिर्फ उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन कराने के लिए की थी। इस साजिश में कई और भी लड़कियां फंसी हुई हैं। शादी कराने वाली दो संस्थाओं को भी FIR में शामिल किया गया है।

यूक्रेन से लौटते ही अब्दुल रहमान से संपर्क में आई युवती
मूल रूप से भुवनेश्वर (ओडिशा) निवासी RK सारंगी केंद्रीय सचिवालय दिल्ली में बतौर अंडर सैक्रेट्री तैनात हैं। उन्होंने बताया, बेटी डॉक्टर हर्षा भारती सारंगी साल-2016 में यूक्रेन से MBBS करके भारत लौटी थी। साल-2017 में एक हादसे के बाद हर्षा दिल्ली के एक हॉस्पिटल में इलाज करा रही थी। उसी दौरान वह मेरठ (यूपी) में मवाना कस्बा निवासी अब्दुल रहमान नामक शख्स के संपर्क में आ गई। रहमान ने खुद को यूनानी पद्धति से उपचार का अच्छा जानकार बताया था।

FIR के अनुसार, अब्दुल रहमान ने शुरुआत में मीठी बातों में फंसाया। फिर जब हर्ष भारती पूरी तरह काबू में आ गई तो दोनों लिव-इन में नोएडा के सेक्टर-137 स्थित एक सोसाइटी के फ्लैट में रहने लगे। यहां से हर्ष भारती के टॉर्चर करने की कहानी शुरू हुई।

पिता का सवाल- जब रहमान ने धर्म नहीं बदला तो हिन्दू रीति-रिवाज से कैसे रजिस्टर्ड हुई शादी?
पिता RK सारंगी के अनुसार, 18 नवंबर 2017 को अब्दुल रहमान ने खाना पकाने के उबले हुए तेल से हर्ष भारती का चेहरा जलाने का प्रयास किया, ताकि वह बदसूरत हो जाए और किसी अन्य व्यक्ति से शादी करने का विकल्प न रहे। 15 अक्तूबर 2018 को दोनों ने आर्य समाज मंदिर तीस हजारी दिल्ली में शादी कर ली। इस शादी को गाजियाबाद के रेलवे रोड स्थित वैदिक हिन्दू सभा कार्यालय में रजिस्टर्ड भी कराया गया।

सभी दस्तावेजों में अब्दुल रहमान और हर्ष भारती सारंगी नाम लिखा है। FIR में सवाल उठाया गया है कि जब अब्दुल रहमान ने अपना धर्म और नाम नहीं बदला तो हिन्दू रीति-रिवाजों से यह शादी कैसे रजिस्टर्ड कर दी गई? किन परिस्थितियों में पंडित/पुजारी ने अनुष्ठान किए? इसलिए इस विवाह को FIR में कानूनन शून्य बताया गया है।

'लव जिहाद की शिकार मेरी बेटी नहीं, कई और बेटियां पीड़ित'
RK सारंगी का कहना है कि यह शादी 15 अक्तूबर 2018 को एक मंदिर में दोपहर साढ़े तीन बजे के बाद संपन्न हुई और उसी दिन संस्था ने इस शादी को रजिस्टर्ड भी कर दिया। जबकि शादी रजिस्टर्ड करने से पहले कागजी दस्तावेजों की पूरी जांच होती है। दस्तावेजों के अनुसार, दूल्हा मुस्लिम और दुल्हन हिन्दू है। ऐसे में यह शादी हिन्दू रीति-रिवाज में कैसे रजिस्टर्ड कर ली गई। आईएएस ऑफिसर ने एफआईआर में लिखा है कि लव जिहाद की शिकार अकेले मेरी बेटी नहीं है, कई और मासूम बच्चियां इससे पीड़ित हैं।

शादी कराने और उसे रजिस्टर्ड करने वाली संस्थाएं भी आरोपी
आईएएस ऑफिसर ने दिसंबर-2021 में इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस में की। दिल्ली पुलिस ने लंबी जांच-पड़ताल के बाद प्रथम दृष्टया आरोपों को सही पाया और शून्य पर FIR दर्ज कर ली। इसके बाद यह केस गाजियाबाद जिले को ट्रांसफर किया गया। गाजियाबाद के नगर कोतवाली में 22 अप्रैल को यह मुकदमा दर्ज किया गया है। जिसमें अब्दुल रहमान सहित वैदिक हिन्दू सभा गाजियाबाद और आर्य समाज मंदिर दिल्ली के पदाधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

एसएसपी ने इस केस में विस्तृत जांच के बाद कोई कार्रवाई की बात कही है।
एसएसपी ने इस केस में विस्तृत जांच के बाद कोई कार्रवाई की बात कही है।

SSP बोले- दंपति साथ रह रहे, नियमानुसार कार्रवाई करेंगे
इस पूरे प्रकरण में गाजियाबाद के SSP मुनीराज जी. ने बताया, लड़की के पिता ने धोखाधड़ी से शादी का मुकदमा नगर कोतवाली में दर्ज कराया है। फिलहाल दोनों पति-पत्नी साथ रह रहे हैं। हमने मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करा रहे हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उस अनुसार कार्रवाई करेंगे।

मेरठ के दो केस नजीर बने, तब लागू हुआ था लव जिहाद कानून
उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश को 27 नवंबर 2020 को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंजूरी दी थी। इस अध्यादेश में विवाह के लिए छल-कपट, प्रलोभन देने या बलपूर्वक धर्मांतरण कराए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा का प्रावधान है। कानून लागू होने के शुरुआती एक महीने में ही यूपी में 14 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 51 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। 21 दिसंबर 2021 को कानपुर में इस कानून के तहत कोर्ट ने पहली सजा भी सुनाई। इस कानून को लागू करने में मेरठ के दो मामले नजीर बने थे, जिसमें दो मुस्लिम युवकों ने हिन्दू लड़कियों से सिर्फ प्रॉपर्टी हड़पने के लिए दोस्ती/शादी की और फिर उन्हें मार डाला।