जिसकी सत्ता, उसकी जिपं अध्यक्ष की कुर्सी:गाजियाबाद में विपक्ष पर 11 और भाजपा पर थी दो वोटें, भाजपा ने रचा चक्रव्यूह और हथिया ली कुर्सी

गाजियाबाद3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
गाजियाबाद में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हमेशा उसके पाले में रही है, जिसकी सत्ता रही है। - Dainik Bhaskar
गाजियाबाद में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हमेशा उसके पाले में रही है, जिसकी सत्ता रही है।

गाजियाबाद में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हमेशा उसके पाले में रही है, जिसकी सत्ता रही है। सीटें किसी भी पार्टी ने कितनी जीती हों, लेकिन कुर्सी पर वही बैठा जो सत्ताधारी खेमे में रहा। इस बार भी दो सीटें हासिल होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी की ममता त्यागी निर्विरोध अध्यक्ष बन गईं।

बसपा के 5 प्रत्याशियों पर था सारा दारोमदार
गाजियाबाद में जिला पंचायत के कुल 14 वार्ड हैं। इनमें 2 सीटें भाजपा, 5 बसपा, 3 सपा, 3 रालोद और एक सीट निर्दलीय ने जीती। भाजपा की दो सीटों में वार्ड-13 से अंशु मावी और वार्ड-14 से ममता त्यागी हैं। जिपं अध्यक्ष बनने के लिए किसी दल/प्रत्याशी को आठ वोट चाहिए थे। बसपा ने अपना अध्यक्ष प्रत्याशी घोसित नहीं किया। इसलिए विपक्षी दलों का सारा दारोमदार बसपा पर था। सपा-रालोद पहले ही कई जिलों में संयुक्त प्रत्याशी उतार चुके थे। इसलिए उनका मानना था कि यदि बसपा को भी अपने खेमे में मिला लिया जाए तो जिपं अध्यक्ष सीट कब्जाई जा सकती है।

विपक्ष की 11 वोटें, फिर भी नहीं कर पाए नामांकन
बसपा से निस्कासित विधायक असलम चौधरी की पत्नी नसीम बेगम चौधरी को विपक्ष ने साझा प्रत्याशी घोसित कर दिया। विपक्ष को उम्मीद थी कि असलम अब बसपा में नहीं हैं, इसलिए इसका फायदा विपक्ष को ही मिलेगा। भाजपा ने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि विपक्ष प्रत्याशी नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं कर पाईं। एकमात्र भाजपा से ममता त्यागी का पर्चा दाखिल हुआ। इसलिए वह दो वोट पाते हुए भी निर्विरोध जीत गईं। हालांकि विपक्षी दल लगातार आरोप लगाते रहे कि उनके प्रस्तावक को सत्ताधारी पार्टी ने बंधक बना लिया, इसलिए वे नामांकन नहीं कर सके।

जीत का सर्टिफिकेट हासिल करतीं ममता त्यागी।
जीत का सर्टिफिकेट हासिल करतीं ममता त्यागी।

गाजियाबाद जिपं अध्यक्ष का इतिहास
साल-2010 में बसपा की सरकार थी। बसपा के वरिष्ठ नेता मलूक नागर की पत्नी सुधा नागर जिपं अध्यक्ष बनीं। साल-2012 में गाजियाबाद से हापुड़ जिला अलग हो गया। 2012 में समाजवादी पार्टी सत्ता में आई। पूर्व मंत्री राजपाल त्यागी के बेटे अजितपाल त्यागी अध्यक्ष बने। अजितपाल वर्तमान में मुरादनगर के विधायक हैं। ढाई साल बाद ही अध्यक्ष कुर्सी को लेकर फिर खींचतान हुई तो एमएलसी आशु मलिक के भाई नूर हसन मलिक को साल-2015 में ढाई साल के लिए जिपं अध्यक्ष बनवा दिया गया। 2017 में सत्ता में भाजपा के आते ही नूर हसन मलिक के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ और उन्हें हटना पड़ा। भाजपा नेता पवन मावी की पत्नी लक्ष्मी मावी जिपं अध्यक्ष बन गईं। 2021 में भाजपा ने यहां सिर्फ दो सीटें जीती थीं। भाजपा ने ऐसा चक्रव्यूह बुना कि विपक्षी दल नामांकन ही नहीं कर पाए और दो सीटें होने के बावजूद भाजपा की ममता त्यागी अध्यक्ष बन गईं।

खबरें और भी हैं...