मजदूर के माथे में आरपार हुआ 20 फीट लंबा सरिया:गाजियाबाद में 50 डॉक्टरों की टीम ने चार घंटे के ऑपरेशन में निकाला सरिया, सर्जरी को खोलनी पड़ी आधी खोपड़ी

गाजियाबाद2 महीने पहले
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गाजियाबाद में कंस्ट्रक्शन साइट पर एक हादसे में मजदूर के सिर में 20 फीट लंबा सरिया पार हो गया। सर्जरी के बाद अब मजदूर की हालत ठीक है। - Dainik Bhaskar
गाजियाबाद में कंस्ट्रक्शन साइट पर एक हादसे में मजदूर के सिर में 20 फीट लंबा सरिया पार हो गया। सर्जरी के बाद अब मजदूर की हालत ठीक है।

गाजियाबाद में कंस्ट्रक्शन साइट पर 12 एमएम मोटा और 20 फीट लंबा सरिया एक मजदूर के माथे में आर-पार हो गया। फ्लोरेस हॉस्पिटल के 50 डॉक्टरों-कर्मचारियों की टीम ने ऑपरेशन करके सरिये को निकाला। इस ऑपरेशन में मरीज की आधी खोपड़ी खोलनी पड़ गई। फिलहाल मरीज होश में है और रिकवरी कर रहा है।

सैटरिंग खोलते वक्त 20वीं मंजिल से गिरा था सरिया

गाजियाबाद के प्रताप विहार में एक साइट पर निर्माण कार्य चल रहा है। चार दिन पहले 20वीं मंजिल की सैटरिंग खोली गई थी। इस दौरान झारखंड का 24 वर्सीय मजदूर साइट के बराबर से होकर गुजर रहा था। सैटरिंग खोलते वक्त 20 फीट लंबा सरिया बहुमंजिला बिल्डिंग से नीचे गिरा। मजदूरों से बचने के लिए जैसे ही शोर मचाया तो पैदल जा रहे मजदूर ने आसमान की तरफ देखा। इतने में भारी-भरकम सरिया उसके माथे को आर-पार कर गया। मजदूरों ने कटर से सरिये को माथे के दोनों तरफ से काटा और घायल को फ्लोरेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया।

डॉक्टरों ने चार घंटे की सर्जरी के बाद सरिये को माथे से निकाल दिया।
डॉक्टरों ने चार घंटे की सर्जरी के बाद सरिये को माथे से निकाल दिया।

चार घंटे तक चली सर्जरी

गाजियाबाद में प्रताप विहार स्थित फ्लोरेस हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. अभिनव गुप्ता ने बताया, चार दिन पहले एक मरीज आया। उसके माथ में सरिया आर-पार निकला हुआ था। उसके बचने की उम्मीद न के बराबर थी। माथे के दोनों तरफ यह सरिया आर-पार दिख रहा था। डॉ. अभिनव और डॉ. गौरव की टीम ने सरिये को निकालने के लिए चार घंटे की मैराथन सर्जरी की।

फ्लोरेस हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी दी।
फ्लोरेस हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी दी।

सरिये को हड्डी से अलग करना था चुनौतीपूर्ण

डॉ. अभिनव के अनुसार, 20 साल में उनके न्यूरो सर्जरी करियर में अपने तरह का यह पहला मामला था। यह सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। सबसे पहले सरिये को हड्डी से अलग करने के लिए उन्हें खोपड़ी का आधा भाग खोलना पड़ा। बड़ी चुनौती बिना कोई और नुकसान पहुंचाए मस्तिस्क से लोहे की छड़ को निकालना था, जो सफलतापूर्वक हो गया। हड्डी को जीवनक्षम बनाए रखने के लिए पेट की दीवार की त्वचा के नीचे रखा गया। हॉस्पिटल के वरिस्ठ चिकित्सक डॉ. एमके सिंह ने कहा कि मरीज की हालत में पहले से सुधार है। अब वह होश में है।

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