बाइक बोट घोटाले का मुकदमा 9 महीने में निपटाएं:इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, नासिक के 63 लोगों से ठगे थे 1.87 करोड़ रुपए

गाजियाबाद3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बाइक बोट घोटाले में दो पीड़ितों की याचिका पर हाईकोर्ट ने इन्हें जल्द निपटाने का आदेश दिया है। - Dainik Bhaskar
बाइक बोट घोटाले में दो पीड़ितों की याचिका पर हाईकोर्ट ने इन्हें जल्द निपटाने का आदेश दिया है।

पांच हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा के बाइक बोट घोटाले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुकदमा अपराध संख्या-340/2019 को 9 महीने में निपटाने का आदेश उत्तर प्रदेश सरकार को दिया है। नासिक (महाराष्ट्र) के 63 लोगों से 1 करोड़ 87 लाख रुपए की ठगी के मामले में यह मुकदमा मीना लालबाबू चौधरी की तरफ से गौतमबुद्धनगर जिले की दादरी कोतवाली में साल-2019 में दर्ज कराया गया था। मीना लालबाबू चौधरी के अनुसार, बाइक बोट जैसी पौंजी स्कीम में निवेश के नाम पर उन समेत कुल 63 लोगों ने अपना पैसा लगाया था। पैसा डूबने पर उन्होंने उप्र की दादरी कोतवाली में FIR कराई। यह केस गौतमबुद्ध नगर जिले की एसीजेएम-प्रथम कोर्ट में विचाराधीन है। मीना लालबाबू की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस केस को 9 महीने में निपटाने का आदेश दिया है। ठीक ऐसे ही मामले में मनीष लखवानी नामक शख्स ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के एसीजेएम को आदेश दिया है कि वह प्राथमिकता पर इस केस की सुनवाई करते हुए नतीजा दें। मनीष लखवानी से 32 लाख रुपए ठगे गए थे। उन्होंने भी दादरी कोतवाली में साल-2019 में मुकदमा दर्ज कराया था, जो कोर्ट में अब तक विचाराधीन है।

मीना लालबाबू चौधरी और मनीष लखवानी के मुकदमों की जांच यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) मेरठ कर रही थी, जिसमें पूर्व में ही चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है।

117 मुकदमों की जांच EOW और CBI पर
साल-2018 में बाइक बोट घोटाला हुआ था। यूपी में जिला गौतमबुद्धनगर के चीती गांव में इसका दफ्तर खोला गया। लोगों को झांसा दिया गया कि यह कंपनी किराए पर बाइक चलाती है। यदि कोई व्यक्ति एक बाइक का पैसा इन्वेस्ट करेगा तो उसे हर महीने करीब छह हजार रुपए रिटर्न मिलते रहेंगे। देशभर के लाखों लोगों ने अरबों रुपए इस पौंजी स्कीम में लगा दिए और उन्हें कुछ दिन बाद रिटर्न मिलना बंद हो गया।
12 जनवरी 2019 को गौतमबुद्धनगर जिले में पहली FIR हुई थी। इस मामले में अब तक 26 आरोपी गिरफ्तार हैं। 106 मुकदमों की जांच EOW मेरठ और 11 मुकदमों की जांच CBI कर रही है। देश की विभिन्न जांच एजेंसियां इस घोटाले की रकम अलग-अलग मानती हैं। EOW के अनुसार पांच हजार करोड़, सीबीआई के अनुसार 15 हजार करोड़, दिल्ली पुलिस के अनुसार 42 हजार करोड़ रुपए का यह घोटाला है।