ट्रेन बम धमाकों में 28 साल बाद फैसले की उम्मीद:पिलखुवा के आतंकी ने पांच शहरों में प्लांट किए थे बम धमाके, 5 पॉइंट में जानिए अब्दुल करीम के कारपेंटर से आतंकी टुंडा बनने का सफर

गाजियाबादएक वर्ष पहले
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आतंकी अब्दुल करीम टुंडा मूल रूप से उत्तर प्रदेश में हापुड़ जिले के पिलखुवा कस्बे का रहने वाला है, उस पर बम धमाके के कई केस हैं। - Dainik Bhaskar
आतंकी अब्दुल करीम टुंडा मूल रूप से उत्तर प्रदेश में हापुड़ जिले के पिलखुवा कस्बे का रहने वाला है, उस पर बम धमाके के कई केस हैं।

अयोध्या में बाबरी विध्वंस की बरसी पर 6 दिसंबर 1993 को लखनऊ, कानपुर, हैदराबाद, सूरत और मुंबई की ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए। इसके आरोपी तीन आतंकियों पर चार्ज फ्रेम करने के लिए 24 सितंबर को अजमेर की टाडा कोर्ट में सुनवाई हुई है। किस-किस धारा में आरोपियों पर आरोप बनते हैं, इस पर कोर्ट अपना फैसला 30 सितंबर को देगी। इसके बाद टाडा कोर्ट में उन्हीं धाराओं में मुकदमा चलेगा, जिन धाराओं में चार्ज फ्रेम हुए हैं। माना जा रहा है कि बेहद जल्द बम धमाकों में फैसला आ सकता है। तीन में से एक आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा यूपी की गाजियाबाद जेल में बंद था। 24 सितंबर को उसको गाजियाबाद जेल से अजमेर पहुंचा दिया गया है। अब मुकदमे में फैसला आने तक वह अजमेर जेल में बंद रहेगा। टुंडा आखिरी बार साल-2013 में नेपाल बॉर्डर से पकड़ा गया था, तब से वह गाजियाबाद जेल में था। टुंडा के दो साथी शमशुद्दीन और इरफान उर्फ पप्पू पहले से अजमेर जेल में बंद हैं।

करीम टुंडा को 24 सितंबर को अजमेर टाडा कोर्ट में पेश किया गया है।
करीम टुंडा को 24 सितंबर को अजमेर टाडा कोर्ट में पेश किया गया है।

पिलखुवा का रहने वाला है आतंकी अब्दुल करीम टुंडा
अब्दुल करीम उर्फ टुंडा उत्तर प्रदेश में हापुड़ जिले के कस्बा पिलखुवा का रहने वाला है। अपने जीवन के शुरुआत में वह पिलखुवा कस्बे में कारपेंटर (बढ़ई) का काम करता था, लेकिन चला नहीं। इसके बाद कपड़े का कारोबार करने मुंबई चला गयाा। मुंबई के भिवंडी इलाके में उसके कुछ रिश्तेदार रहते थे। 1985 में भिवंडी के दंगों में उसके कुछ रिश्तेदार मारे गए। इनका बदला लेने के लिए उसने आतंकवाद की राह पकड़ी। 1980 के आसपास वह आतंकी संगठनों के संपर्क में आया।

आतंकी करीम टुंडा को बम बनाने में महारथ हासिल है, ऐसा कहा जाता है।
आतंकी करीम टुंडा को बम बनाने में महारथ हासिल है, ऐसा कहा जाता है।

33 क्रिमिनल केस, 40 धमाके कराने का आरोप

  1. 80 के दशक में अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से इसकी ट्रेनिंग ली और फिर लश्कर-ए-तैयबा के संपर्क में आया। 6 दिसंबर 1993 को ट्रेनों में विस्फोट के वक्त करीम टुंडा लश्कर का विस्फोटक विशेषज्ञ था।
  2. मुंबई के डॉक्टर जलीस अंसारी, नांदेड के आजम गौरी और करीम टुंडा ने 'तंजीम इस्लाम उर्फ मुसलमीन' संगठन बनाकर बाबरी विध्वंस का बदला लेने के लिए 1993 में पांच बड़े शहरों में ट्रेनों में बम धमाके किए थे।
  3. 1996 में दिल्ली में पुलिस मुख्यालय के सामने बम धमाके का आरोप भी टुंडा पर है। 1996 में सुरक्षा एजेंसी इंटरपोल ने उसका रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया।
  4. साल-2000 में टुंडा के बांग्लादेश में मारे जाने की खबरें आईं, लेकिन 2005 में दिल्ली में पकड़े गए लश्कर के आतंकी अब्दुल रज्जाक मसूद ने टुंडा के जिंदा होने का खुलासा किया।
  5. 2001 में संसद भवन पर हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से जिन 20 आतंकियों के प्रत्यर्पण की मांग की थी, उसमें टुंडा भी था। बम बनाते वक्त एक हाथ खो देने के बाद अब्दुल करीम का नाम 'टुंडा' पड़ा। उस पर करीब 33 क्रिमिनल केस हैं और करीब 1997-98 में करीब 40 बम धमाके कराने के आरोप हैं।
यह तस्वीर अक्तूबर-2017 की है, जब सोनीपत कोर्ट ने 1996 के बम धमाकों में अब्दुल करीम टुंडा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
यह तस्वीर अक्तूबर-2017 की है, जब सोनीपत कोर्ट ने 1996 के बम धमाकों में अब्दुल करीम टुंडा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट के रूख से सुनवाई में तेजी
11 साल से अजमेर जेल में बंद कथित आतंकी जहीरुद्दीन की याचिका पर 30 अगस्त 2021 को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर की टाडा अदालत को आदेश दिया था कि वह या तो आरोपी को दोषी ठहराएं या बरी करें। दो हफ्ते में इस याचिका पर निचली अदालत से जवाब मांगा गया था। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस रूख के बाद अजमेर की कोर्ट ने बम धमाकों के मामले की सुनवाई में तेजी दिखाई है।

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