गाजियाबाद...पार्क में जा रहे छात्र पर स्ट्रीट डॉग का हमला:आम्रपाली विलेज सोसाइटी में स्ट्रीट डॉग का आतंक, रेजीडेंट्स ने बच्चों को पार्क में भेजना किया बंद

गाजियाबाद2 महीने पहले
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सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में देख सकते हैं कि छात्र जमीन पर गिर गया और स्ट्रीट डॉग उसको काटकर भाग निकले। - Dainik Bhaskar
सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में देख सकते हैं कि छात्र जमीन पर गिर गया और स्ट्रीट डॉग उसको काटकर भाग निकले।

गाजियाबाद के इंदिरापुरम की हाईराइज सोसाइटी आम्रपाली विलेज में बुधवार शाम पार्क में जा रही एक छात्र पर स्ट्रीट डॉग ने हमला कर दिया। उसको पैर में दो जगह काट लिया। हमले में छात्र जमीन पर गिर भी गया। इस पूरे घटनाक्रम की जो सीसीटीवी सामने आई है, वह बेहद गंभीर है। रेजीडेंट्स ने दहशत के चलते बच्चों को पार्क में भेजना बंद कर दिया है। आम्रपाली विलेज निवासी आरिफ हुसैन जॉब करते हैं। उनका 15 वर्षीय बेटा फैय्याज हुसैन 9वीं का स्टूडेंट है। आरिफ के अनुसार, बुधवार शाम 6.07 बजे उनका बेटा फ्लैट से निकलकर पार्क में खेलने के लिए जा रहा था। सोसाइटी में दो स्ट्रीट डॉग उसके पीछे भाग लिए। बच्चा हड़बड़ाहट में नीचे गिर गया। इसके बाद स्ट्रीट डॉग उसकी टांग में दो जगह काटकर भाग गए। आसपास के लोगों ने दौड़कर बच्चे को बचाया। इसके बाद परिजन उसे अस्पताल ले गए और इंजेक्शन लगवाए।

रेजीडेंट्स का कहना है कि सोसाइटी में स्ट्रीट डॉग का आतंक है। नगर निगम इस बारे में कोई सुनवाई करने को तैयार नहीं है।
रेजीडेंट्स का कहना है कि सोसाइटी में स्ट्रीट डॉग का आतंक है। नगर निगम इस बारे में कोई सुनवाई करने को तैयार नहीं है।

सोसाइटी में हैं 18-20 स्ट्रीट डॉग
रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के अध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि आम्रपाली विलेज सोसाइटी में करीब 18-20 स्ट्रीट डॉग हर वक्त रहते हैं। कई बार वह हिंसक हो जाते हैं। महीने में दो-तीन घटनाएं इस प्रकार की हो जाती हैं। नगर निगम और डीएम को कई बार पत्र लिखे गए। फोन से भी अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। इस सोसाइटी में 1002 फ्लैट्स हैं, जिनमें तकरीबन पांच हजार लोग रहते हैं।
रेजीडेंट्स में दहशत, पार्क में नहीं भेजे बच्चे
आरडब्लूए अध्यक्ष ने बताया कि इस घटना के बाद से रेजीडेंट्स में अपने बच्चों को लेकर दहशत है। बुधवार शाम से उन्होंने एक भी बच्चा पार्क में नहीं भेजा है। अध्यक्ष का कहना है कि यदि वह स्ट्रीट डॉग को सोसाइटी से बाहर निकालते हैं तो एनिमल केयर वाली संस्थाएं इसका विरोध करती हैं। इस चक्कर में उन पर 2019 में एक मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। अध्यक्ष का कहना है कि हम किसके पास जाएं, कोई हमारी नहीं सुन रहा।

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