जामताड़ा का साइबर ठग सहारनपुर से अरेस्ट:पेंशन अधिकारी बन रिटायर्ट कर्मियों से अकाउंट डिटेल लेकर उड़ा लेता था रकम; पंजाब के CM की पत्नी समेत यूपी के पुलिस अफसरों से अब तक 5 करोड़ ठगे

नोएडा/सहारनपुर6 महीने पहले
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नोएडा की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा से जुड़े शातिर साइबर अपराधी नूर अली को मंगलवार को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया। वह ट्रेजरी ऑफिसर बनकर पेंशनधारकों को कॉल करता था और डेटा अपडेट करने के नाम पर उनके बैंक खाते खाली कर देता था। यह गिरोह पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी के खाते से भी 23 लाख रुपए भी निकाल चुका है।

दसवीं पास नूर अली पंजाब में फतेहगढ़ साहिब स्थित न्यू शांतिनगर कॉलोनी में रह रहा था। हालांकि वह मूल रूप से बिहार में के भागलपुर जिले के गांव मुरली का मूल रहने वाला है। पुलिस ने उसके कब्जे से 80 बैंक खातों की पासबुक, 40 ई-वॉलेट खाते बरामद किए हैं। बैंक खातों और ई-वॉलेट में मौजूद करीब सवा दो लाख रुपए पुलिस ने फ्रीज करा दिए हैं।

अब तक 5 करोड़ रुपए ठगे
साइबर क्राइम थाना प्रभारी विनोद पांडेय के अनुसार, नूर मोहम्मद और उसका गैंग ज्यादातर ऐसे लोगों को ठगता था, जो सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होते थे। उन्हें वह ट्रेजरी ऑफिसर या कर्मचारी बनकर कॉल करता था और कहता था कि उनका पेंशन का डेटा अपडेट होना है। इस बहाने वह सेवानिवृत्त लोगों से उनकी बैंक डिटेल पूछकर खाते से रुपए निकाल लेता था। आरोपी यह पैसा फर्जी नाम-पते पर खुलवाए हुए बैंक खातों, बिजली बिल या अमेजन कूपन में ट्रांसफर कर देता था। वह अब तक करीब 5 करोड़ रुपए की ठगी कर चुका है। इस गिरोह ने बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया है। बनारस के रिटायर पुलिसकर्मी से 40 लाख और आगरा के रिटायर पुलिसकर्मी से 16 लाख रुपए ठगे गए थे।

जामताड़ा जेल में बंद है ठग नूर भाई अफसर
साल-2019 में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी सांसद परनीत कौर से 23 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई थी। इसमें पंजाब पुलिस ने नूर अली के भाई अफसर अली को पकड़ा था। अफसर अली के गिरोह से पुलिस को 18 लाख रुपए, 800 सिमकार्ड और 200 बैंक खाते बरामद हुए थे। अफसर अली को बाद में झारखंड की जामताड़ा पुलिस ले गई थी। अफसर अभी जामताड़ा जेल में बंद है।

काली कमाई से कोठी बनाई, स्क्रैप फैक्ट्री खोली
काली कमाई से नूर अली ने पंजाब के गोविंदगढ़ में आलीशान कोठी बनाई है। इसी कोठी के पास उसने स्क्रैप की फैक्ट्री लगा रखी है। इसकी देखरेख नूर अली का पिता कर रहा है। इसी फैक्ट्री के पास ही नूर अली का दूसरा भाई मोबाइल शोरूम चलाता है। पुलिस यह पता कर रही है कि आरोपी ने काली कमाई का पैसा कहां-कहां निवेश किया है।

ऐसे ठगी करता था यह गिरोह

  • यह गिरोह सबसे पहले रिटायर होने वाले लोगों का डेटा जुटाता था।
  • उन्हें कॉल करके पेंशन अपडेट करने का झांसा देता था।
  • रिटायरकर्मियों के मोबाइल पर OTP भेजकर उसे हासिल करता था।
  • OTP पाकर रिटायरकर्मी के बैंक खाते की नेट बैंकिंग चालू करता था।
  • नेट बैंकिंग से रिटायरकर्मी का पैसा दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लेता था।