पूर्वांचल के 2 मंत्रियों की कहानी:संजीव गोंड अपने राजनीतिक गुरु को हराकर बने थे विधायक, पोस्टमैन की बेटी संगीता बिंद को मनोज सिन्हा ने दिलाया था टिकट

सोनभद्र/गाजीपुर4 महीने पहले
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यूपी मंत्रिमंडल विस्तार में पूर्वांचल के दो विधायकों को राज्यमंत्री बनाया गया है। इनमें सोनभद्र के ओबरा से संजीव कुमार गोंड और गाजीपुर सदर से विधायक संगीता बिंद शामिल हैं। अपने चिरपरिचित अंदाज में क्षेत्र और जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने पहली बार विधायक बने लोगों पर दांव लगाया है। संजीव गोंड जहां सोनभद्र में आदिवासी जनजाति का प्रतिनिधित्व करते हैं तो संगीता बिंद मल्लाहों का प्रतिनिधित्व करती हैं। पूर्वांचल में दोनों ही जातियों की अच्छी संख्या है।

पहली कहानी: अपने राजनीतिक गुरु को पटकनी देकर बने थे विधायक
2017 विधानसभा चुनाव में संजीव कुमार गोंड पहली बार लाइम लाइट में आए। दरअसल, सोनभद्र जिले की ओबरा विधानसभा सीट और दुद्धी विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए पहली बार आरक्षित की गई थी। जिसके बाद भाजपा ने कैंडिडेट की तलाश शुरू की तो ओबरा विधानसभा सीट से संजीव कुमार गोंड पर भाजपा ने दांव लगाया। जबकि दुद्धी विधानसभा सीट भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल के खाते में चली गई।

संजीव कुमार गोंड सामान्य परिवार से आते हैं। ओबरा पीजी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान संजीव कुमार की मुलाकात अनुसूचित जनजाति के बड़े नेता विजय कुमार गोंड से हुई। विजय गोंड तब सपा से जुड़े हुए थे। यहीं से उनकी राजनीति शुरू हुई। कुछ सालों में ही वह विजय गोंड के काफी करीब हो गए। हालांकि, जब चुनाव हुआ तो ओबरा सीट से विजय कुमार गोंड के बेटे वीरेंद्र सिंह गोंड जोकि बसपा से लड़ रहे थे उन्हें पटकनी देकर चुनाव जीते थे। इस तरह भाजपा से प्रदेश के इकलौते अनुसूचित जनजाति के विधायक बने।

संजीव कुमार गोंड के करीबी बताते हैं कि पहले वह खनन क्षेत्र में पेटी कांट्रेक्टर का काम करते थे। उनके चचेरे दादा रघुनाथ प्रसाद बिल्ली मारकुंडी ग्रामसभा के 35 साल तक प्रधान रहे। यहीं से संजीव कुमार ने राजनीति का कह्करा सीखा। बीते साढ़े 4 साल में विजय कुमार गोंड ने अनुसूचित जनजातियों पर अच्छी पकड़ बना ली है। जिले की चार विधानसभा सीटों पर ही 3 लाख से ज्यादा अनुसूचित जनजातियां हैं। इसके साथ अगल बगल के जिले चंदौली, मिर्जापुर, बलिया में भी गोंड समाज की अच्छी खासी संख्या है। विधायक ओबरा चार भाइयों में दूसरे नंबर पर हैं। संजीव सिंह गोंड़ की पत्नी लीला देवी भी चोपन से ब्लॉक प्रमुख चुनी गई हैं। उनके तीन बेटे हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं।

संजीव सिंह गोंड़ की पत्नी लीला देवी भी चोपन से ब्लॉक प्रमुख चुनी गई हैं।
संजीव सिंह गोंड़ की पत्नी लीला देवी भी चोपन से ब्लॉक प्रमुख चुनी गई हैं।

दूसरी कहानी: पोस्टमैन की बेटी बनी मंत्री

गाजीपुर जिले की सदर सीट से विधायक संगीता बलवंत बिंद पहली बार 2017 में चुनाव जीतकर विधायक बनी थी। सामान्य परिवेश से आने वाली संगीता बिंद के पिता पोस्टमास्टर थे। गाजीपुर में ही जन्मी संगीता छात्र राजनीति में भी सक्रिय रही हैं। वह गाजीपुर पीजी कॉलेज छात्रसंघ की उपाध्यक्ष भी रही हैं। सोशल वर्क से भी जुडी रही हैं। जमीनी कार्यकर्ता होने के नाते वह तत्कालीन गाजीपुर सांसद और वर्तमान में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा के संपर्क में आ गई। मनोज सिन्हा की पैरवी के चलते ही 2017 में उन्हें गाजीपुर सदर विधानसभा सीट से टिकट भी मिल गया और वह जीत कर विधायक बन गई।

संगीता बिंद ने गाजीपुर के होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ अवधेश प्रसाद से शादी की है। गाजीपुर के लु्र्दस कांवेन्ट बालिका इंटर कालेज से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रवेश लिया। 1997 में पीजी कालेज से छात्रसंघ का चुनाव लड़ा, जिसमें उपाध्यक्ष चुनी गईं। इसके बाद राजनीति में सक्रिय हो गईं। वर्ष 2005 में सदर तृतीय से जिला पंचायत का चुनाव लड़ीं और रिकार्ड तोड़ 6600 मत पाकर जीत दर्ज की।

इसके बाद राजनीति में उनके सितारे बुलंद होते गए। संघर्षों की बदौलत ही उन्हें नेशनल वीमेन वेलफेयर दिल्ली में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का उन्हें मौका मिला। उन्हें महिला आयोग समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 20 फरवरी 2020 को दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें आदर्श युवा विधायक सम्मान से सम्मानित किया गया। इस वर्ष यह सम्मान पाने वाली संगीता बिंद प्रदेश में इकलौती विधायक थीं।

संगीता बिंद ओबीसी से आती हैं और मल्लाह जाति का प्रतिनिधित्व करती हैं। पूर्वांचल में ओबीसी की बड़ी संख्या है। साथ ही मल्लाह की उपजातियों की संख्या भी लगभग 5 से 6 फ़ीसदी तक है। ऐसे में भाजपा ने पूर्वांचल में एक ओबीसी चेहरे को मंत्री बनाकर अपना चुनावी दांव चल दिया है। हालांकि, संगीता बिंद के पास मंत्री पद के साथ कुछ करने के लिए बहुत समय नहीं बचा है।

संगीता बिंद ओबीसी से आती हैं और मल्लाह जाति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
संगीता बिंद ओबीसी से आती हैं और मल्लाह जाति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
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