चेहल्लुम जुलूस के दौरान हुआ विवाद:पुलिस ने तुरंत मामले को शांत कराकर संपन्न कराया त्यौहार

करनैलगंज7 दिन पहले

कर्नलगंज नगर में आज अंजुमन सज्जादिया कमेटी के तत्वाधान में हजरत इमाम हुसैन की याद में निकाले गए चेहल्लुम जुलूस के दौरान सकरौरा चौराहे पर आपसी सामंजस्य के चलते छुटपुट विवाद हो गया। जिसमें देखते ही देखते विवाद ने मारपीट का रंग लेना शुरू कर दिया। लेकिन चेहल्लुम के जुलूस में तैनात पुलिसकर्मियों की तत्परता से विवाद को बढ़ने नहीं दिया गया, साथ ही मामले को शांत कराकर चेहल्लुम के पर्व का समापन कराया गया।

कर्नलगंज नगर में मुस्लिम वर्ग के लोगों ने बड़े ही धूमधाम के साथ चेहल्लुम के पर्व को लेकर चालिसवां का तहजिया जुलूस निकाला। जिसमें हजारों मुस्लिम वर्ग के लोगों के द्वारा तहजिया लेकर नगर के मुख्य मार्गों से जुलूस निकाला जाता है। साथ ही जुलूस के दौरान या हुसैन के नारों की गूंज पूरे क्षेत्र में सुनाई देती है। चालिसवां के जुलूस को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी मौजूद रही। उपजिलाधिकारी हीरालाल तथा क्षेत्राधिकारी मुन्ना उपाध्याय के नेतृत्व में प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह तथा कस्बा चौकी प्रभारी दिवाकर मिश्रा के साथ भारी पुलिस बल की तैनाती रही।

क्यों मनाया जाता है चेहल्लुम का पर्व
इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मोहम्मद साहब के नाती हजरत इमाम हुसैन जिनकी याद में मोहर्रम का पर्व मनाया जाता है। जिसके 40 दिन बाद चेहल्लुम मनाया जाता है। माना जाता है कि हजरत इमाम हुसैन और बादशाह यजीद के बीच जंग छिड़ गई थी, जिसमें बादशाह यजीद की सेना ने मिलकर हजरत इमाम हुसैन व उनके लोगों के लिए पीने का पानी रोक दिया था, जिससे लोग परेशान हो गए।

इस समस्या के समाधान को लेकर हजरत इमाम हुसैन के भाई अब्बास अलबरदार 72 लोगों के साथ बादशाह यजीद से बातचीत करने गए, लेकिन बात करने के बजाय बादशाह यजीद ने बातचीत ना करके जंग छेड़ दी, जिसमें हजरत इमाम हुसैन के पूरे परिवार के साथ 72 लोगों की हत्या कर दी गई थी। जिसके कारण मोहर्रम का पर्व मनाया जाता है। साथ ही मोहर्रम के पर्व के 40 दिन बाद जुलूस इसी घटना की याद में मनाया जाता है।

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