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मनीष गुप्ता हत्याकांड:वारदात के 13 दिन बाद 180​ डिग्री पर घुम गई इंस्पेक्टर- दरोगा की जिंदगी, उनकी ही कुर्सी पर बैठ SIT अधिकारी दागते रहे सवाल, मुल्जिम बन देते रहे बेगुनाही का जवाब

गोरखपुर10 महीने पहले
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जिस कुर्सी पर बतौर इंस्पेक्टर 8 महीने बैठ वह बदमाशों से सवाल- जवाब करते रहे, उनके गुनाह कबूलवाते रहे, आज उसी कुर्सी पर बैठकर SIT अधिकारी उनसे सवाल दागते रहे। - Dainik Bhaskar
जिस कुर्सी पर बतौर इंस्पेक्टर 8 महीने बैठ वह बदमाशों से सवाल- जवाब करते रहे, उनके गुनाह कबूलवाते रहे, आज उसी कुर्सी पर बैठकर SIT अधिकारी उनसे सवाल दागते रहे।

कहते हैं ​न वक्त का पहिया घुमता है। जिंदगी कब, किसे और किस मोड़ पर लाकर खड़ी कर देगी, यह किसी को भी नहीं पता। ऐसा ही कुछ नजारा रविवार को गोरखपुर के रामगढ़ताल थाने में देखने को मिला। कानपुर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता हत्याकांड में आरोपित पुलिस वालों की किस्मत ने कुछ ऐसा करवट बदला कि वारदात के ठीक 13 दिन बाद उनकी जिंदगी 180 डिग्री पर लाकर उन्हें खड़ी कर दी।

इंस्पेक्टर- दरोगा का सबसे मुश्किल दिन रहा रविवार
यानी कि थाने में अपने चेंबर की जिस कुर्सी पर बैठ अब तक बदमाशों से उनके गुनाह कबूलवाने वाले इंस्पेक्टर जेएन सिंह की जिंदगी में रविवार का दिन ही शायद सबसे मुश्किल वाले दिनों में एक रहा होगा। जिस कुर्सी पर बतौर इंस्पेक्टर 8 महीने बैठ वह बदमाशों से सवाल- जवाब करते रहे, उनके गुनाह कबूलवाते रहे, आज उसी कुर्सी पर बैठकर SIT अधिकारी उनसे सवाल दागते रहे। जबकि इंस्पेक्टर और दरोगा उस जगह पर बैठे अपनी बेगुुनाही साबित करते रहे, जो कि आम फरियादियों के लिए बैठने की थी।

SIT के सामने बेबस दिखे इंस्पेक्टर- दरोगा, जवाब में उलझे
शाम करीब 5.30 बजे शुरू हुआ सवालों का दौर रात करीब 11 बजे तक बदस्तूर जारी रहा। इस दौरान SIT के 200 से अधिक सवालों में दोनों हत्यारोपित उलझ गए और वह अपने बयानों से अपनी ही बातों में फंसते चले गए। इस बीच होटल मैनेजर आदर्श पांडेय का भी दोनों हत्यारोपित पुलिस वालों से आमना- सामना कराया गया। लेकिन सभी एक- दूसरे से नजरें चुराते मुंह फेरते रहे। इस दौरान SIT टीम के प्रभारी आनंद प्रकाश तिवारी और SIT के विवेचना अधिकारी ब्रजेश श्रीवास्तव के अलावा पुलिस के अन्य अधिकारी लगातार इस वारदात से जुड़े सवाल- जवाब करते रहे। अधिकारियों के हर सवाल का जवाब देते हुए आरोपित इंस्पेक्टर और दरोगा खुद को बेगुनाह होने की सफाई देते रहे। कभी थाने पर कर्मियों और फरियादियों पर रौब झांडने वाले इंस्पेक्टर- दरोगा आज खुद को उसी थाने पर बेबस महसूस करते देखे गए।

कभी उनकी आंखें भर आती तो कभी गला
अधिकारियों के सवाल का जवाब देते कभी उनकी आंखें भर आती तो कभी गला। बार-बार दोनों पुलिसकर्मी अपने चेंबर के एक-एक कोने को बेहद गौर से निहारते रहे। शायद उस वक्त वह यहां अपने गुजारे वक्त को याद कर रहे थे। इस बीच चेंबर में आरोपित पुलिस वाले बार- बार जेब से रूमाल निकाल अपना पसीना और आंखें भी पोछते रहे। अंत में अधिकारियों ने उन्हें समझा- बुझाकर सबकुछ सच कबूल करने को कहा और फिर कोर्ट के आदेश पर उन्हें देर रात उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया।

SIT के इन सवालों का जवाब दिए इंस्पेक्टर और दरोगा

  • सवाल: 27 सितंबर की रात किसके आदेश पर होटल चेकिंग करने गए थे?
  • जवाब: पुलिस की ओर से चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के तहत गए थे।
  • सवाल: उस रात होटल में ऐसा क्या हुआ, जिससे मारपीट हो गई?
  • जवाब: कोई मारपीट नहीं हुई थी। युवकों ने शराब पी रखी थी। चेकिंग के दौरान उनमें से एक लड़का नशे में गिर गया।
  • सवाल: ऐसा क्या सबूत है, जिससे यह साबित हो सके कि तुम लोगों ने मनीष को नहीं पीटा?
  • जवाब: हम लोग उसे क्यों मारेंगे, हमारी उनसे कोई रंजिश थोड़े थी। हम बेगुनाह हैं।
  • सवाल: घटना के बाद जीडी में कुछ और दर्ज किया है और हकीकत कुछ और है, इसका क्या मतलब?
  • जवाब: उस समय सभी लोग काफी प्रेशर में थे। लिखने में शायद कुछ चूक हो गई होगी।
  • सवाल: अगर सही थे तो फिर घटना के बाद भागे क्यों?
  • जवाब: पुलिस पर लगातार एफआईआर और गिरफ्तारी का प्रेशर था। उस दिन हमारी बात कौन सुनता। इसलिए भागना पड़ा। भागने का इरादा होता तो गोरखपुर से बाहर चले जाते।
  • सवाल: घायल को मानसी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज ले जाने में घंटों का वक्त क्यों लगा?
  • जवाब: उसे चोट लगी थी। डॉक्टर ने लेने से इंकार कर दिया था। कुछ अन्य स्टॉफ को बुलाया गया और आपस में बातचीत कर मेडिकल कॉलेज ले गए। इतनी रात में प्राइवेट अस्पताल नहीं मिलता।
  • सवाल: वारदात में नामजद अन्य पुलिस वाले कहां हैं?
  • जवाब: हमें उनकी कोई जानकारी नहीं है। उस दिन के बाद से वह हमारे संपर्क में भी नहीं हैं।
  • सवाल: खुद पुलिस वाले होकर पुलिस से क्यों भाग रहे थे?
  • जवाब: हम लोग खुद हाजिर होकर अपनी बात रखना चाहते थे, उसके लिए उचित समय का इंतजार कर रहे थे।
  • सवाल: वारदात के बाद होटल के कमरे से खून क्यों साफ कराया?
  • जवाब: हमने खून नहीं साफ कराया। हम लोग तो वहां से लेकर अस्पताल चले गए। शायद होटल वालों ने किया होगा।
  • सवाल: अपनी सफाई में क्या कहना चाहते हो?
  • जवाब: हमने नहीं मारा, सभी आरोप पूरी तरह गलत हैं। इसकी सही से जांच होगी तो सब साफ हो जाएगा।

(नोट: आरोपित पुलिस वालों से SIT द्वारा पूछे गए इन सवालों की पुष्टि नहीं है। यह सवाल- जवाब पुलिस व SIT टीम के सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर है)

मौत के बाद लाश ठिकाने लगाना चाहते थे पुलिस वाले!
वहीं, SIT की जांच में मौत के बाद के उस खेल का भी पता लग गया, जोकि पुलिस वालों ने गढ़ी थी। मनीष की मौत के बाद उसे पुलिस वालों ने अस्पताल ले जाने में करीब पौने दो घंटे का वक्त क्यों लगा दिया, इसपर पहले तो आरोपितों ने SIT को घुमाने की कोशिश की, लेकिन फिर वह टूट गए और बताया कि मनीष की मौत के बाद उन्हें फंसने का संदेह होने लगा। इस बीच जब अस्पताल में पता चला कि मनीष की मौत हो चुकी है तो साथ में मौजूद पुलिस वाले उसकी लाश ठिकाने लगाने की बात करने लगे। उनमें से एक ने यहां तक कह दिया कि कहीं लावारिस दिखाकर सुबह बरामद कर लेंगे। इसपर इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने पुलिसर्मी को फटकार लगाते हुए कहा था कि इससे नहीं भी फंसना होगा तो फंस जाओगे। अभी अस्पताल लेकर जाओ, बाकी मैं संभाल लूंगा।

दरोगा ने दीवार से लड़ाया था सिर
वहीं, SIT की जांच में यह भी सामने आया है कि पुलिस वाले मनीष को मारने की नियत से होटल में नहीं गए थे, लेकिन मनीष के दोस्तों की ओर से पुलिस का विरोध करने पर दरोगा अक्षय मिश्रा दोनों दोस्तों को मारते हुए बाहर कर दिए। जबकि एक अन्य दरोगा राहूल दूबे और सिपाही अंदर जाकर मनीष को पीटना शुरू कर दिए। इस बीच मनीष की ओर से बीजेपी नेता को फोन करने से नाराज होकर पुलिस​कर्मियों ने मनीष को पहले जमकर पीटा और फिर उसका सिर दीवार से लड़ा दिया। जिससे उसे गंभीर चोट लग गई और उसकी मौत हो गई।

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