गोरखपुर...पुलिस की बर्बरता से भूतहा हो गया शाहपुर था:लॉकअप में बंद करते ही होता है बड़ी घटना, 16 साल में लॉकअप में हुई है 9 लोगों की मौत; भीड़ ने फूंकी थी असुरन चौकी

गोरखपुर2 महीने पहले
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वर्ष 2006 के बाद से ही आज तक किसी को भी बंद नहीं किया जाता है। अनहोनी से बचने को किसी की सलाह से थाने में ही हनुमान मंदिर बना दिया गया। - Dainik Bhaskar
वर्ष 2006 के बाद से ही आज तक किसी को भी बंद नहीं किया जाता है। अनहोनी से बचने को किसी की सलाह से थाने में ही हनुमान मंदिर बना दिया गया।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का एक ऐसा थाना है शाहपुर, ​​​जहां छोटी सी चूक बड़ी घटना को दावत दे देते हैं, यही वजह है पुराने पुलिस वालों से लेकर अब तक यहां पर लॉकअप का इस्तेमाल ही बंद कर दिया गया है। लॉकअप वर्षों से खाली है। काम चलाने के लिए थानेदार के ऑफिस को ही लॉकअप बना दिया गया है। कहा जाता है कि यहां पुलिस की बर्बरता से हुई मौतों से यह थाना आज भी भूतों का ठिकाना बना हुआ है।

शायद यही वजह है कि इस थाने में जब भी लॉकअप का इस्तेमाल हुआ बड़ा अपशगुन हुआ। 12 साल पहले जिसे के शाहपुर क्षेत्र के सुनील साहनी को लॉकअप में बंद किया गया था। अगली सुबह उसका शव कुसम्ही जंगल में मिला था।

1990 में बना था शाहपुर थाना
तब सुनील के परिजनों ने थाने में जमकर बवाल किया था। गुस्साई भीड़ ने असुरन पुलिस चौकी फूंक दी थी। आरोप था कि चोरी के आरोप में पकड़े गए सुनील को पुलिस ने बेरहमी से पीटा जिससे उसकी मौत हो गई। फिर शव को कुसुम्ही जंगल में फेंक दिया। मामले में तत्कालीन थानेदार श्रीप्रकाश गुप्ता सहित कई निलंबित किए गए। इसके बाद से लॉकअप को अशुभ मान लिया गया। वहीं, 1990 में बने इस शाहपुर थाने में तब से 2006 तक वहां 9 लोगों की मौत हुई।

अब लॉकअप बन गया हनुमान मंदिर
इन मौतों के दौरान ज्यादा बवाल तीन मौतों को लेकर हुआ था। 31 जनवरी 2001 को राजेश शर्मा नाम के एक व्यक्ति की पिटाई के बाद लॉकअप में मौत हो गई। तत्कालीन थानेदार संजय सिंह के साथ ही तीन सिपाहियों पर हत्या का केस दर्ज हुआ। इसलिए शाहपुर थाने के लॉकअप में वर्ष 2006 के बाद से ही आज तक किसी को भी बंद नहीं किया जाता है। अनहोनी से बचने को किसी की सलाह से थाने में ही हनुमान मंदिर बना दिया गया।

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