सनातन धर्म की महत्वपूर्ण कड़ी है गोरक्षपीठ की परंपरा:CM योगी बोले- समस्याओं से पलायन करने वाले खो देते हैं जनविश्वास

गोरखपुर3 महीने पहले

सीएम योगी बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 53वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 8वीं पुण्यतिथि में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति समाज, राष्ट्र और धर्म की समस्याओं से पलायन की आज्ञा नहीं देती है। समाज, राष्ट्र और धर्म की समस्या को हमें अपनी खुद की समस्या मानना होगा।

हमें खुद को हर चुनौती से निरंतर जूझने के लिए तैयार रखना होगा क्योंकि समस्याओं से पलायन करने वाले उनसे मुंह मोड़ने वाले जनविश्वास खो देते हैं। पलायन करने वालों को वर्तमान और भावी पीढ़ी कभी माफ नहीं करती है।

सीएम ने समारोह के अंतिम दिनमहंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किया।
सीएम ने समारोह के अंतिम दिनमहंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किया।

सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि
सीएम योगी गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 53वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्य नाथ की 8वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित कर रहे थे।

सीएम ने समारोह के अंतिम दिन बुधवार को ‘आश्विन कृष्ण चतुर्थी‘ पर महंत अवेद्य नाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्ष पीठ के पूज्य आचर्य द्वय ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्य नाथ ने धर्म, समाज और राष्ट्र की समस्याओं से पलायन न करने का आदर्श स्थापित किया।

उनके मूल्यों, सामर्थ्य और साधना की सिद्धि का परिणाम आज गोरखपुर के विभिन्न विकल्पों के माध्यम से देखा जा सकता है। उन्होंने गोरक्ष पीठ को सिर्फ पूजा पद्धति और साधना स्थली तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के विभिन्न आयामों से जोड़कर लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।

सीएम योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ की परंपरा सनातन धर्म की महत्वपूर्ण कड़ी है।
सीएम योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ की परंपरा सनातन धर्म की महत्वपूर्ण कड़ी है।

गोरक्षपीठ की परंपरा सनातन धर्म की महत्वपूर्ण कड़ी
सीएम योगी ने कहा कि गोरक्ष पीठ की परंपरा सनातन धर्म की महत्वपूर्ण कड़ी है। आश्रम पद्धति कैसे संचालित होनी चाहिए, समाज, देश और धर्म के प्रति हमारी क्या जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसका मार्गदर्शन इस पीठ ने किया है।

ऐसे दौर में जब बहुतायत लोग भौतिकता के पीछे दौड़ते हैं। देशकाल और समाज के अनुरूप कार्यक्रमों से जुड़कर यह पीठ ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्य नाथ द्वारा स्थापित आदर्शों को युगानुकूल तरीके से आगे बढ़ा रही है।

गोरखनाथ मंदिर में संतों के प्रवचन सुनने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचे थे।
गोरखनाथ मंदिर में संतों के प्रवचन सुनने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचे थे।

संतों ने आजादी के आंदोलन को नेतृत्व दिया
उन्होंने कहा कि जब देश पराधीन था तब यह धार्मिक पीठ सीमित संसाधनों से शिक्षा का अलख जगाने के अभियान से जुड़ती है। पूज्य संतों ने आजादी के आंदोलन को नेतृत्व दिया, उसने भागीदार बने और इस दिशा में गोरक्ष पीठ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

जब धर्म भी पराधीनता के दंश को झेल रहा था तो गोरक्षपीठ खुद को कैसे अलग रख सकती थी। सीएम योगी ने कहा कि आजादी का आंदोलन हो या आजादी मिलने के बाद राष्ट्र निर्माण के अभियान को गति देने की बात, गोरक्षपीठ ने महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्य नाथ के नेतृत्व में निरंतर प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा भारतीय नस्ल के गोवंश संरक्षण की वकालत वैश्विक मंचों से की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा भारतीय नस्ल के गोवंश संरक्षण की वकालत वैश्विक मंचों से की जा रही है।

वैश्विक मंच पर पड़ रही भारत की प्रतिष्ठा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के मार्ग प्रशस्त होने से भारत के लोकतंत्र व न्यायपालिका की ताकत वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित हुई है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन हो या फिर प्रयागराज दिव्य और भव्य कुंभ। हमारे सांस्कृतिक विजय के इस अभियान का हिस्सा है। यही नहीं अब भारतीय नस्ल के गोवंश संरक्षण की वकालत वैश्विक मंचों से की जा रही है।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने सीएम योगी की जमकर तारीफ की।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने सीएम योगी की जमकर तारीफ की।

सीएम योगी ही कराएंग मथुरा और काशी का पुनरुद्धार
श्रद्धांजलि समारोह में प्रयागराज से पधारे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद जैसे अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन रहा है।

उन्हें पूरा विश्वास है कि मथुरा और काशी का पुनरुद्धार भी उन्हीं के नेतृत्व में होगा। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर और काशी में भगवान शिव के मंदिर का नवोत्थान शुरू हो तभी वह ‘वासुदेवानंद सरस्वती‘ अपने शरीर का परित्याग करें।