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मनीष गुप्ता हत्याकांड:जेल में भी इंस्पेक्टर और दरोगा को कैदियों से खतरा, ब्रश नहीं मिला तो पेड़ से तोड़ा दातून; ब्रेड और चाय मिला नाश्ता, मिलने भी नहीं पहुंचा कोई

गोरखपुर7 महीने पहले
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इस बीच देर शाम खबर उड़ी कि SIT ने चारो फरार पुलिस वालों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि SIT या पुलिस अधिकारियों ने इसकी कोई पुष्टि नहीं की। - Dainik Bhaskar
इस बीच देर शाम खबर उड़ी कि SIT ने चारो फरार पुलिस वालों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि SIT या पुलिस अधिकारियों ने इसकी कोई पुष्टि नहीं की।

कानपुर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता हत्याकांड में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा की जेल में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। क्योंकि बाहर पब्लिक के साथ उन्हें जेल में बंद नाराज बंदियों के गुस्से का भी सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि उन्हें अन्य कैदियों से अलग नेहरू बैरक में रखा गया है। ताकि किसी भी कैदी का दोनों आरोपित पुलिस वालों से सामना न हो सके। क्योंकि गोरखपुर जेल में ऐसे तमाम बंदी है, जो इन दोनों की प्रताड़ना का शिकार हो चुके हैं। जबकि कई ऐसे भी हैं, जिन्हें इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने ही पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया था। वहीं कई को फर्जी केस में भी जेल भेजने के आरोप हैं।

बंद और चाय मिला सुबह का पहला नाश्ता
वहीं, जेल में 24 घंटे बीताने में दोनों दिग्गज पुलिस वालों के पसीने छूटने लगे। रविवार की रात जेल पहुंचने के बाद दोनों को नेहरू बैरक में शिफ्ट किया गया। पास में कोई बिस्तर या कपड़ा नहीं होने की वजह से उन्हें जेल से मिली कंबल को बिछाकर ही काम चलाना पड़ा। आधी रात जेल पहुंचने के कारण रात दोनों को बिना भोजन के ही सोना पड़ा। सुबह करीब 7 बजे जेल प्रेम प्रकाश खुद पहुंचकर बैरक खुलवाए। दोनों इंस्पेक्टर और दरोगा ने जेलर को बताया कि उनके पास ब्रश और मंजन भी नहीं है।

मिलने भी नहीं पहुंचा कोई
इसके बाद जेलर ने जेल में मौजूद नीम के पेड़ से दातून तोड़ने की सलाह दी। दोनों ने खुद मिलकर पेड़ से दातून तोड़ा और मंजन किया। कुछ देर बाद सुबह के नाश्ते में उन्हें कैदियों के लिए बना बंद और चाय मिला। जबकि दिन के भोजन में चावल और दाल मिली। शाम के नाश्ते में चना और रात के भोजन में रोटी, दाल और सब्जी नसीब हुई। जेल से जुड़े लोगों के मुताबिक तानाशाही की जिंदगी बीता चुके दोनों पुलिस वालों को जेल में 24 घंटे बीताने के बाद अब अपनी गलती का भी एहसास होने लगा। उनके चेहरे पर सिकन पड़ने लगी। हालांकि सोमवार को पूरा दिन उनसे मिलने कोई एक भी नहीं पहुंचा। ऐसे में दोनों जेल की सलाखों के पीछे खुद ही एक दूसरे का सहारा बने हुए हैं।

फरार आरोपितों के पकड़े जाने की चर्चा
इस बीच सोमवार को पूरे दिन SIT टीम और गोरखपुर पुलिस फरार चल रहे अन्य चार पुलिस वालों की तलाश में लगी रही। चारो के कोर्ट में सरेंडर करने की आशंका पर दीवानी कचहरी में सुबह से ही पुलिस तैनात रही। जबकि इस बीच देर शाम खबर उड़ी कि SIT ने चारो फरार पुलिस वालों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि SIT या पुलिस अधिकारियों ने इसकी कोई पुष्टि नहीं की। SIT अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

जल्द शुरू होगी बर्खास्तगी की कार्रवाई
इस बीच आरोपित पुलिस वालों के जेल जाते ही विभाग की ओर से उनकी बर्खास्तगी की कार्रवाई भी अब जल्द ही शुरू की जा सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इसकी प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। जल्द ही एसएसपी की ओर से इसकी रिपोर्ट तैयार कर डीआईजी को भेजी जाएगी। हालांकि इस बीच पुलिस की कोशिश है कि फरार आरोपितों को भी गिरफ्तार कर एक साथ सभी के बर्खास्तगी की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द से इसकी प्रक्रिया शुरू कर आरोपित पुलिस वालों को सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।

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