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गोरखपुर की बेटी के जुनून के कायल हुए राहुल गांधी:बाढ़ में 700 मीटर अकेले चप्पू चलाकर स्कूल जाती है संध्या; राहुल बोले- ये साहस बहुत कुछ सीखाता है

गोरखपुर22 दिन पहले
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संध्या की नाव चलाकर स्कूल जाते फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल। - Dainik Bhaskar
संध्या की नाव चलाकर स्कूल जाते फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल।

गोरखपुर में बाढ़ के तांडव के बीच एक बेटी के शिक्षा के जुनून का मामला सामने आया है। यहां बहरामपुर गांव में 11वीं में पढ़ने वाली छात्रा संध्या साहनी अकेले नाव से स्कूल आ-जा रही है। गोरखपुर की इस बिटिया के हौसले और जज्बे को देखकर हर कोई हैरान है।

वहीं, संध्या के शिक्षा के इस जुनून को देखकर कांग्रेस नेता राहुंल गांधी ने भी उसकी तारीफों के पुल बांधें हैं। उधर, संध्या की नाव चलाकर स्कूल जाते फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।

निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुंचे मिलने
वहीं, बहादुर बेटी संध्या से मिलने सोमवार को निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संजय निषाद उसके घर पहुंचे। डॉक्टर संजय निषाद ने संध्या के हौसले की तारीफ की और उसके परिवार को हर तरह से मदद का भरोसा दिलाया। डॉ. संजय निषाद ने कहा कि संध्या सहानी उनकी बिरादरी के लिए अब एक रोल मॉडल बन चुकी है। संध्या जैसी दूसरी बेटियों के पढ़ाई के लिए वह जल्द ही हर जिले में निषादों के लिए एक अलग से विद्यालय खुलवाएंगे। संध्या को हॉस्टल में भर्ती कराने और बाद में नौकरी दिलवाने के साथ-साथ उसके परिवार की हर जरूरत को पूरा कराएंगे। (

डॉ. संजय निषाद ने कहा कि संध्या सहानी उनकी बिरादरी के लिए अब एक रोल मॉडल बन चुकी है।
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि संध्या सहानी उनकी बिरादरी के लिए अब एक रोल मॉडल बन चुकी है।

शिक्षक दिवस पर राहुल गांधी ने ट्वीट की फोटो

शिक्षक दिवस के मौके पर राहुल गांधी ने गोखपुर की इस बेटी संध्या की नाव चलाते फोटो ट्वीट कर लिखा है - 'ये बच्ची मुश्किल परिस्थिति, ठप प्रशासन व अनिश्चित भविष्य होने पर भी हिम्मत नहीं हारी...संध्या का साहस बहुत कुछ सिखता है'। दरअसल, बहरामपुर इलाका इन दिनों पूरी तरह बाढ़ में डूबा हुआ है। हाल ये है कि कई परिवार यहां से सुरक्षित जगह पर पलायन भी कर चुके हैं।

इसी बहरामपुर के रहने वाले दिलीप सहानी कारपेंटर का काम करते हैं। इनके 4 बच्चे हैं, जिनमें संध्या सहानी सबसे बड़ी बेटी है। संध्या साइंस साइड से जिले राजकीय एडी कन्या विद्यालय में 11वीं में पढ़ती हैं। संध्या का स्कूल पिछले 1 साल से कोरोना की वजह से बंद था और पिछले महीने जब स्कूल कॉलेज खुले तो बाढ़ की विभीषिका ने इनके गांव को हर तरफ से घेर लिया।

रेलवे में नौकरी करना चाहती हैं संध्या
गांव की दूसरे बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया, लेकिन संध्या के मन में पढ़ाई के प्रति जुनून था। इसकी वजह से संध्या ने घर में बैठने के बजाय नाव से ही स्कूल आना-जाना शुरू कर दिया। संध्या रेलवे में नौकरी करना चाहती हैं। संध्या ने बताया कि उसका घर 15 दिन से पानी में डूबा हुआ है। वह लोग छत पर जिदंगी गुजार रहे हैं। स्मार्ट फोन नहीं होने की वजह से घर से पढ़ पाना उसके बस की बात नहीं थी। स्कूल की दूसरी सहेलियों से पढ़ाई के बारे में हर रोज सुनकर संध्या ने फैसला लिया कि वह स्कूल जाएगी। फिर उसने अकेले नाव से स्कूल आना-जाना शुरू कर दिया।

700 मीटर दूरी तक संध्या नाव चलाकर स्कूल जाती है।
700 मीटर दूरी तक संध्या नाव चलाकर स्कूल जाती है।

परिवार समेत हवाई जहाज में घुमना चाहती है संध्या
संध्या के मुताबिक, वह अपनी शिक्षा के जरिए अपने परिवार को मजबूत करना चाहती है। उसके समाज में लोग लड़कियों की शिक्षा को जरूरी नहीं मानते, लेकिन तंगहाली में जीवन काटने के बावजूद उसके माता-पिता उसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। उनके हौसले को देखकर ही उसने इस कठिन वक्त में भी अपनी पढ़ाई जारी रखी है। संध्या का सपना है कि अच्छी पढ़ाई कर वह रेलवे में नौकरी कर सके, जिससे परिवार की आर्थिक मुश्किलें खत्म हो सके। इसके साथ ही संध्या हवाई जहाज में भी घूमना चाहती है।

बेटी का जज्बा देखकर पिता भी खुश
वहीं, संध्या के पिता दिलीप का कहना है कि बेटी रेलवे में नौकरी करना चाहती है। वह दिन-रात पढ़ाई भी करती है। इधर, बाढ़ की वजह से वह लोग बहुत परेशान हो गए हैं। घर का सारा सामान अस्त-व्यस्त पड़ा हुआ है दिन और रात वक्त गुजार रहे हैं, लेकिन बेटी का जज्बा देखकर उनको अपना सारा कष्ट अब कम लगने लगा है।

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