बेरोजगारी के गढ़ से LIVE रिपोर्ट:कोरोना के गढ़ मुंबई-पुणे से जितने लौट रहे; उससे ज्यादा काम की तलाश में जा रहे... UP से जाने वाली भी सभी ट्रेनें फुल

गोरखपुर/वाराणसी/कानपुर5 महीने पहले

1. देश में कोरोना संक्रमण के नए मामले सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में मिल रहे हैं। रोजाना 40 हजार से ज्यादा नए संक्रमित वहां मिल रहे हैं।
2. देश में ग्रामीण बेरोजगारी दर 6.7% है...और देश की कुल ग्रामीण आबादी का 18.6% हिस्सा उत्तर प्रदेश में रहता है।

यहां हमने दो आंकड़े दिए हैं। अगर हम पूछें कि दोनों में डरावना कौन सा है? निश्चित ही आपका जवाब होगा कि महाराष्ट्र में संक्रमण के आंकड़े ज्यादा भयावह हैं। कोरोना के खतरे से बड़ा डर भला और क्या होगा। मगर जमीनी हकीकत ये है कि दूसरा आंकड़ा ज्यादा डरावना है। इस खौफ को महसूस करना हो तो वाराणसी और गोरखपुर स्टेशन पर मुंबई या पुणे की ट्रेन के इंतजार में खड़े लोगों से मिलिए। गांवों में बेरोजगारी ऐसी है कि भुखमरी की नौबत है।

नतीजा ये कि कोरोना के खतरे के बावजूद लोग काम की तलाश में मुंबई जा रहे हैं। देश की आर्थिक राजधानी के हालात बिल्कुल उलट हैं। वहां कोरोना के डर से लोगों का पलायन जारी है। मगर स्थिति ये है कि रोज जितने लोग मुंबई से लौट रहे हैं, उससे ज्यादा लोग मुंबई जा रहे हैं।

हर दिन करीब 13 हजार लोग जा रहे हैं मुंबई, दिल्ली और चेन्नई
दैनिक भास्कर की टीम ने वाराणसी और गोरखपुर के रेलवे स्टेशन का हाल जाना। दोनों ही शहरों में महानगरों की ओर रुख करने वालों की भीड़ स्टेशन पर मौजूद हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे मंडल से प्रत्येक दिन औसतन 13000 यात्री मुंबई, दिल्ली एवं चेन्नई जा रहे हैं।

गोरखपुर स्टेशन की तरह कानपुर और वाराणसी में भी काम ढूंढने निकले लोग मिले। उनके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी।
गोरखपुर स्टेशन की तरह कानपुर और वाराणसी में भी काम ढूंढने निकले लोग मिले। उनके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी।

मजदूर बोले- काम न तलाशें तो परिवार भूखों मर जाएगा
वाराणसी स्टेशन पर मौजूद रामजी कनौजिया कहते हैं- हम घर पर बैठेंगे तो बच्चे खाएंगे क्या। सिर्फ गेहूं से पेट नहीं भरता...एक साल से बैठे हुए हैं। अगर यहीं काम मिल जाता तो हमें मुंबई जाने की क्या जरूरत होती। परिवार को भूखा नहीं देख सकते, भले ही हमें जान खतरे में डालनी पड़े।

यहां नौकरी होती तो कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती
गोरखपुर स्टेशन पर सत्येंद्र राम मिले। पुणे जाने वाली ट्रेन के इंतजार में थे। जब पूछा कि कोरोना के मामले बढ़ने के बाद भी पुणे क्यों जा रहे हैं, तो बोले-काम तो ढूंढना ही होगा, नहीं तो परिवार कैसे चलेगा। देहात में तो कोई रोजगार है नहीं, हमारी मजबूरी है बड़े शहर जाना ही होगा। जब हमने पूछा कि कोरोना से डर नहीं लगता...बोले-डर क्यों नहीं लगता, मगर परिवार चलाना है तो काम तो करना ही होगा।

मुंबई से लौट रहे लोगों की कहानी, कोरोना और लॉकडाउन का डर

कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर आई एलटीटी-गोरखपुर ट्रेन में सफर कर रहे मुंबई कोरला में रहने वाले आजाद अली ने बताया कि वह गोरखपुर के रहने वाले हैं। मुंबई में सालों से एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। इस समय हालात कोरोना के पहले और सेकेंड फेज जैसे नहीं हैं, लेकिन लगातार बढ़ रहे कोरोना केस की वजह से प्रवासियों के दिल में लॉकडाउन का डर सताने लगा है।

यही कारण है कि वह वहां से चले आए हैं। कोरोना की थर्ड वेव गुजरने के बाद ही अब वह वापस मुंबई जाएंगे। घाटकोपर मुंबई में रहने वाले सादान लकड़ी कारोबारी हैं। मूलरूप से वह बस्ती के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि वह सालों से मुंबई में ही रह रहे हैं। मुंबई में अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन कब लॉकडाउन लग जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है।

मुंबई से आ रही ट्रेनें फुल
कानपुर सेंट्रल से होकर मुंबई के लिए स्पेशल ट्रेनों को जोड़कर करीब 15 ट्रेनें मुंबई जाती हैं। ज्यादातर इन सभी ट्रेनों में टिकट उपलब्ध नहीं हैं। पीआरओ अमित सिंह ने बताया कि मुंबई से लौटने वाली ट्रेनों में पैसेंजर्स का लोड बढ़ा है। लॉकडाउन जैसी स्थित आती है तो स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इससे लोगों को आसानी से ट्रेनों में रिजर्वेशन टिकट उपलब्ध हो सके। फिलहाल, 10 जनवरी तक ज्यादातर ट्रेनों में टिकट नहीं मिल पा रहे हैं।