तिल 200 रुपए किलो, तेल सिर्फ 90 रुपए लीटर:गोरखपुर में करोड़ों का नकली तेल बिक गया, व्हाइट आयल में रंग मिलाकर बन रहा पूजा का तेल

गोरखपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

गोरखपुर में दिपावली पर नकली तिल के तेल का कारोबार हो रहा है। 200 रुपए किलो बिकने वाले तिल के तेल बाजार में 90 रुपए लीटर में उपलब्ध हैं। धनतेरस से पहले ही करोड़ों का नकली तिल का तेल बाजारों में बेचा जा चुका है।

खास बात यह है कि इस तिल के तेल में तिल का एक दाना भी नहीं पड़ा है।

बाजार में मोमबत्ती, नकली कपूर और नकली पूजा तेल

यह नकली तेल सिर्फ व्हाइट आयल में रंग मिलाकर बनाया जा रहा है। जोकि एक पेट्रोलियम प्रोडक्ट है। शहर के इलाहीबाग में अपने घर पर जगमग नकली कपूर, मोमबत्ती और निकली तिल का तेल दिन रात बना रहा है। इस नकली तेल की सप्लाई शहर के साहबगंज मंडी से लेकर पूरे गोरखपुर मंडल में हो रही है।शहर में इसे बेचने के लिए दो डिपो भी बनाए गए हैं।

दैनिक भास्कर टीम को शहर में नकली तिल के कारोबार की जानकारी हुई तो हमारी टीम इसकी पड़ताल करने शहर के साहबगंज मंडी पहुंची। तो यहां की दुकानों पर बोतलों में पैक्ड नकली तेल के बिक्री की भरमार दिखी। इन पैक्ड बोतलों पर स्टिकर तो कई ब्रांड के लगाए गए थे।

नकली तेल का असली गढ़ शहर का इलाहीबाग इलाका है। इलाहीबाग चौराहे से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित एक घर के अंदर जाते ही कुछ लोग यहां काम करते मिले। टीम ने खुद का परिचय महाराजगंज के व्यापारी के रुप में दिया और तिल के तेल की डिमांड की। पहले तो वहां मौजूद लोगों ने बताया, यहां से माल नहीं मिलेगा। सभी माल बिक चुके हैं। अगर चाहिए तो साहबगंज मंडी जाना होगा। लेकिन 100 से अधिक गत्ता तेल की डिमांड करने पर घर के अंदर से एक लड़का बाहर आया। बात करने पर उसने बताया, तेल तो मिल जाएगा, लेकिन दो से तीन दिनों का वक्त लगेगा। माल तैयार हो रहा है। जिनका पहले से आर्डर है, पहले उन्हें ही माल दिया जाएगा। रेट की बात करने पर व्यापारी ने बताया, सिर्फ एक लीटर का बोतल ही मिल पाएगा। इससे छोटे माल नहीं मिल पाएंगे। एक लीटर की पैकिंग में नकली तिल का तेल 90 रुपए लीटर पड़ेगा। जोकि मार्केट में आराम से 150 रुपए लीटर तक बिक जाएगा।

व्हाइट आयल में रंग मिलाते ही बन गया तेल

टीम ने कई लोगों का परिचय देते हुए व्यापारी से बातचीत शुरू की, तो वह बात करते हुए हमें अंदर कारखाने तक लेता गया। इस दौरान वहां कुछ लोग बैठकर बोतलों में तेल की पैकिंग कर रहे थे। बातचीत के दौरान अंजान बनकर तेल बनाने की प्रक्रिया जानने की इच्छा जाहिर की।

वहां काम कर रहे लड़के ने बताया, ''भैया यह जो नीला ड्रम देख रहे हैं, इसी में व्हाइट आयल आता है। जिसमें रंग मिलाकर उसे अच्छी तरह से फेटना पड़ता है। ताकि तेल का कलर आ जाए। इसके बाद इसे बोतलों में पैक कर स्टीकर लगा दिया जाता है। इस दौरान उसने बकायदा हमें तेल बनाकर दिखाया भी।

50 से 55 रुपए लीटर तैयार हो रहा नकली तेल

हालांकि खास बात यह है कि इन बोतलों पर कहीं भी तिल का ​तेल नहीं लिखा गया है। अलग-अलग नामों से पैक्ड इन तेल की बोतलों पर शातिरों ने सिर्फ पूजा तेल ही लिखा है। ताकि वह भगवान की नजरों में ज्यादा न गिरने पाए। व्यापारी के मुताबिक व्हाइट आयल बाजार में 50 से 55 रुपए लीटर उपलब्ध है।

इसके बाद इसमें सिर्फ 5 से 10 रुपए का रंग मिलाकर 100 लीटर से अधिक तेल तैयार हो जाता है। इसके बाद करीब 3.50 रुपए प्रति प्लास्टिक की बोतलों में इसे पैक कर उस पर एक कागज का स्टिकर लगाया जाता है। इसके बाद इन तेलों को गत्तों में पैक्ड कर मार्केट में सप्लाई कर दी जाती है।

जांच कर होगी सख्त कार्रवाई
जबकि सिटी मजिस्ट्रेट अंजनी कुमार सिंह का कहना है, "अगर ऐसा है तो यह पूरी तरह गलत है। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। जहां भी ऐसे तेल बनाए जा रहे, उनकी जांच कराई जाएगी और अगर उसमें पेट्रोलियम पदार्थ मिला तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

खबरें और भी हैं...