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साहब घर से अच्छा तो जेल है:गोरखपुर जेल में बंद दो कैदियों में कोरोना का खौफ, ठुकराई पैरोल; कहा- सजा पूरी करके ही जाएंगे घर

गोरखपुर3 महीने पहले
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22 कैंदियों को पैरोल मिली, जिसमें से दो ने इनकार किया। वहीं, 150 बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया। - Dainik Bhaskar
22 कैंदियों को पैरोल मिली, जिसमें से दो ने इनकार किया। वहीं, 150 बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच जेलों में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए जब सरकार ने बंदियों को घर जाने के लिए पैरोल दिया तो, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जेल में बंद दो कैदियों ने घर जाने से इनकार कर दिया। पैरोल ठुकराते हुए उन्होंने जेल प्रशासन को बताया कि पिछले साल का अनुभव बेहद खराब रहा। अब वह सजा पूरी करके ही घर जाना चाहते हैं। घर से अच्छा तो जेल ही है। दरअसल, पिछली बार भी इन्हें पैरोल मिला था और यह घर गए थे। बाद में ये एक माह बाद पुलिस की मदद से वापस जेल लौट थे।

पिछले साल भी मिला था पैरोल
दरअसल, प्रदेश के सभी जेलों में पिछली बार की तरह इस बार भी भीड़ कम करने के लिए 2152 कैदियों को आठ हफ्ते पैरोल देने की व्यवस्था बनाई गई है। इस बार जब यह फरमान गोरखपुर जेल में पहुंचा तो यहां के भी 22 बंदियों को पैरोल दिया गया। लेकिन इनमें दो सजायाफ्ता बंदी उषा व हरिशंकर ने घर जाने से इनकार कर दिया। चूंकि ये दोनों पिछली बार घर जाने के बाद लेट से जेल पहुंचे थे।

इन मामलों में सजा काट रहे दोनों कैदी
गोरखपुर जेल में बंद उरूवा थाना क्षेत्र के शमदपुर टोला जगदीशपुर की रहने वाली उषा देवी (61) पत्नी सम्हारू, 2011 में दहेज हत्या के आरोप में जेल आई। 9 अक्टूबर 2015 को कोर्ट से 7 साल की सजा हुई। बड़हलगंज के मामखोर निवासी हरिशंकर (49) पुत्र गुलाब शुक्ला वर्ष 2007 में गैर इरादतन हत्या के प्रयास के आरोप में छह साल की सजा हुई। सर्वोच्च न्यायालय मेंं अपील खारिज होने के बाद दूसरी बार 2017 में फिर जेल पहुंचे। तभी से सजा काट रहे। दोनों की सजा आधी से अधिक पूरी हो चुकी है।

22 कैंदियों को पैरोल व 150 बंदियों को अंतरिम जमानत
जिले में 2 कैंदियों ने इस बार पैरोल पर जाने से मना कर दिया है। वहीं, इस साल 22 कैंदियों को पैरोल व 150 बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया है। वहीं, पिछले साल 26 कैदी पैरोल व 250 से ज्यादा बंदी अंतरिम जमानत पर बाहर गए थे। इस संबंध में वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ रामधनी ने बताया कि दो सजायाफ्ता कैदियों ने पैरोल पर जाने से मना किया है। वजह पूछे जाने पर उन्होंने बताया है कि बाहर अभी भी करोना संक्रमण का खतरा कम नहीं हुआ है। जबकि जेल में एक भी संक्रमित नहीं है। ऐसे में उन्होंने इस संक्रमण काल में जेल में रहना ही खुद को सुरक्षित समझा है।

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