विश्व योग दिवस पर विशेष:गोरखपुर ने विश्व को दिया है क्रिया योग, यहां जन्मे परमहंस योगानंद ने पूरे विश्व में लहराया योग का परचम

गोरखपुर4 महीने पहले
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योगानंद का जन्म 5 जनवरी 1893 को मुफ्तीपुर मोहल्ले में हुआ था। तब उनके पिता भगवती चरण घोष बंगाल-नागपुर रेलवे में गोरखपुर में तैनात थे। - Dainik Bhaskar
योगानंद का जन्म 5 जनवरी 1893 को मुफ्तीपुर मोहल्ले में हुआ था। तब उनके पिता भगवती चरण घोष बंगाल-नागपुर रेलवे में गोरखपुर में तैनात थे।

पूरी दुनियां में योग का परचम लहराने वाले गोरखपुर में जन्मे मुकुन्दलाल घोष यानी परमहंस योगानंद ने अपने अनुयायियों को क्रिया योग का उपदेश दिया। सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि उन्होंने पूरे विश्व में क्रिया योग का प्रचार-प्रसार भी किया। योगानंद के मुताबिक, क्रिया योग ईश्वर से साक्षात्कार की एक प्रभावी विधि है, जिससे अपने जीवन को संवारा और ईश्वर की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है।

21 जून को जब देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है, तो ऐसे में अगर परमहंस योगानंद की बात न हो तो यह योग क्रिया के साथ एक बेमानी होगी। शायद यही वजह है कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी गोरखपुर में परमहंस योगानंद की जन्मस्थली स्मारक के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है।

1893 में गोरखपुर में पैदा हुए थे योगानंद
परमहंस योगानंद बीसवीं सदी के एक आध्यात्मिक गुरु युक्तेशवर गिरि के शिष्य थे। इन्होंने अपने जीवन के कार्य को पश्चिम में किया। योगानन्द प्रथम भारतीय गुरु थे। परमहंस योगानन्द की पुस्तक ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी (एक योगी की आत्मकथा) किताब भी लिखी जा चुकी है। योगानंद का जन्म 5 जनवरी 1893 को मुफ्तीपुर मोहल्ले में कोतवाली के पास एक मकान में हुआ था। तब उनके पिता भगवती चरण घोष बंगाल-नागपुर रेलवे में बतौर कर्मचारी गोरखपुर में तैनात थे। यहां उन्होंने किराये पर मकान लिया था। इसी मकान में परमहंस योगानंद का जन्म हुआ।

गोरखपुर में बिताए थे 8 वर्ष
माता-पिता ने उनका नाम मुकुंद रखा था। आठ वर्ष की आयु तक मुकुंद का बचपन यहीं बीता। उनके बचपन की बहुत सी यादों का जिक्र उनके भाई सानंदलाल घोष ने अपनी पुस्तक 'मेजदा में किया है। मुकुंद आठ भाई-बहन में चौथे नंबर पर थे। उनके भाई ने अपनी पुस्‍तक में कई ऐसे प्रसंगों का जिक्र किया है। जिसमें उनके दिव्‍य व्‍यक्तित्‍व का आभास बचपन से ही होता है। उन्‍होंने बताया है कि जब योगानंद का जन्‍म हुआ उस समय दिव्‍य प्रकाश की अनुभूति हुई। गोरखपुर में बिताए आठ वर्षों में ही योगानंद ने कई ऐसे सिद्ध प्रयोग दिखाए जिसे देख उनके परिवार सहित पड़ोसी भी अचरज में पड़ जाया करते थे।

प्रथम भारतीय गुरु थे योगानंद
योगानंद परमहंस ने 1920 में अमेरिका के लिए प्रस्थान किया और अमेरिका में उन्होंने अनेक यात्राएं की और क्रिया योग का प्रचार-प्रसार किया। विश्व को क्रिया योग के लिए प्रेरित किया। लोगों के बीच व्याख्यान देने, लेखन तथा निरंतर विश्वव्यापी कार्य को दिशा देने में अपने जीवन को लगा दिया।

क्या है क्रिया योग
क्रिया योग का मतलब है कि वे प्रणालियां जिनके द्वारा सेहत, आध्यात्मिक विकास, या एकता-चेतना का अनुभव हो। पतंजलि के 2000 साल पुराने योग सूत्र में लिखा है कि क्रिया योग का मतलब है मन और इन्द्रियों को वश में रखना, स्वयं विश्लेषण, स्वाध्याय, ध्यान का अभ्यास और अहंकार की भावना का ईश्वर प्राप्ति के लिए त्याग।

क्रिया योग का अभ्यास
क्रिया योग पारंपरिक रूप से गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से ही सीखा जाता है। उन्होंने बताया है कि क्रिया योग में उनकी दीक्षा के बाद, बाबाजी ने मुझे उन प्राचीन कठोर नियमों में निर्देशित किया जो गुरु से शिष्य को संचारित योग कला को नियंत्रित करते हैं।

स्मारक के रूप में विकसित होगी योगानंद की जन्मस्थली
परमहंस योगानंद की जन्मस्थली स्मारक के रूप में विकसित की जाएगी। यहां लाइब्रेरी बनाई जाएगी, जिसमें योग और अध्यात्म से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की पुस्तकें होंगी। यहां संग्रहालय भी बनाया जाएगा। प्रदेश सरकार इसके लिए तैयार है। सरकार ने यह भी तय कर लिया है कि जन्मस्थल को लेकर चल रहा विवाद समाप्त होने के बाद जरूरत पडऩे पर उचित मुआवजा देकर उसे ले लिया जाएगा। इसे लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहां के डीएम को जरूरी निर्देश भी दे चुके हैं। जल्‍द ही इस बारे में निर्णय लिया जाएगा। इससे लोगों को योगानंद के बारे में जानकारी मिलेगी। उन्‍हें पता चलेगा कि योगानंद किस तरह के संत थे।

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