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गोरखपुर में राजधानी सिलहटा बांध टूटा:30 हजार की आबादी पर खतरा, गोरखपुर-वाराणसी हाईवे भी बंद, शहर को जोड़ने वाले सभी नेशनल हाईवे पानी में डूबे

गोरखपुर3 महीने पहले
नौसड़ से लेकर कौड़ीराम रोड पर राप्ती नदी का पानी आ गया। गोरखपुर-वाराणसी रोड फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

गोरखपुर बाढ़ लोगों पर खतरा बनकर मंडरा रही है। शुक्रवार करीब 3 बजे चौरीचौरा तहसील क्षेत्र का राजधानी सिलहटा बांध टूट गया। बाढ़ से उफनाई गोर्रा नदी ने ब्रह्मपुर ब्लॉक में जयरामकोल गांव के टोला जोगिया के पास बांध तोड़ दिया। तटबंध टूटने से लगभग 30 हजार की आबादी प्रभावित हो गई है। तहसील प्रशासन बाढ़ राहत व बचाव में जुटा हुआ है। गुरुवार को भी कौड़ीराम ब्लॉक के भरवलिया-बसावनपुर रिंग बांध टूटने से 2 गांव जलमग्न हो गए थे।

वहीं, नदियों के बढ़ते जलस्तर से शहर को जोड़ने वाले करीब सभी नेशनल हाईवे डूब चुके हैं। गुरुवार की देर रात गोरखपुर का संपर्क वाराणसी से टूट गया। यहां नौसड़ से लेकर कौड़ीराम रोड पर राप्ती नदी का पानी आ गया। ऐसे में गोरखपुर-वाराणसी रोड बंद कर दिया गया है।

इस रोड के वाहन खजनी से होते हुए बांसगांव की तरफ डायवर्ट किए जा रहे हैं। छात्र-छात्राओं को खुद नाव चलाकर स्कूल जाना पड़ रहा है। शहर के बहरामपुर दक्षिणी के रहने वाले दिलीप निषाद की बेटी संध्या 800 मीटर तक खुद नाव चलाकर स्कूल पहुंची।

बाढ़ ग्रस्त इलाकों से पलायन कर रहे इन लोगों ने रेलवे स्टेशनों और सड़क के फुटपाथों को ठिकाना बनाया है।
बाढ़ ग्रस्त इलाकों से पलायन कर रहे इन लोगों ने रेलवे स्टेशनों और सड़क के फुटपाथों को ठिकाना बनाया है।

गुरुवार की सुबह इस मार्ग पर सिर्फ बड़े वाहनों को प्रतिबंधित किया गया था, लेकिन शुक्रवार को यह रूट पूरी तरह से बंद कर दिया गया। वहीं, शहर के 100 से अधिक मोहल्लों में बाढ़ का पानी बढ़ता ही जा रहा है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों से लोग तेजी से पलायन कर रहे हैं। इन लोगों ने रेलवे स्टेशनों और फुटपाथों को ठिकाना बनाया है।

अब तक नदियों में आए उफान की वजह से जिले के 300 से अधिक गांव प्रभावित हो चुके हैं।
अब तक नदियों में आए उफान की वजह से जिले के 300 से अधिक गांव प्रभावित हो चुके हैं।
ग्रामीण इलाकों की तकरीबन 2.5 लाख आबादी मुश्किल में है।
ग्रामीण इलाकों की तकरीबन 2.5 लाख आबादी मुश्किल में है।

300 गांव, 100 से अधिक शहर की कॉलोनियां जलमग्न
ग्रामीण इलाकों में बाढ़ ने इस कदर तबाही मचा रखी है कि जिले के 300 से अधिक गांव प्रभावित हो गए हैं। इन गांवों की तकरीबन ढाई लाख आबादी मुश्किल में है। यहां राहत कार्य के लिए 389 नाव लगाई गई हैं।

इसके अलावा बाढ़ का पानी शहरी इलाके की भी 100 से अधिक कॉलोनियों को अपनी जद में ले चुका है। पानी के दबाव की वजह से जिले के बांधों में दो दर्जन स्थानों पर रिसाव हो रहा है। झंगहा-बरही मार्ग पर पानी चढ़ गया है। जबकि हरपुर-भीटी मार्ग तथा राम-जानकी मार्ग पर भी बड़े वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

गांवों में राहत कार्य के लिए 389 नाव लगाई गई हैं। जिले के बांधों में दो दर्जन स्थानों पर रिसाव हो रहा है।
गांवों में राहत कार्य के लिए 389 नाव लगाई गई हैं। जिले के बांधों में दो दर्जन स्थानों पर रिसाव हो रहा है।
प्रशासन की ओर से मदद नाकाफी साबित हो रही है। लोग सुरक्षित स्‍थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
प्रशासन की ओर से मदद नाकाफी साबित हो रही है। लोग सुरक्षित स्‍थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

बच्चों को दूध और पशुओं को चारे की किल्लत
गोरखपुर के जंगल कौड़िया के रहने वाले फहीम अहमद ने बताया कि पानी चार-पांच दिनों से तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन की ओर से कोई मदद के लिए नहीं आया है। बाढ़ से बचने के लिए सुरक्षित स्‍थानों पर जा रहे हैं। यहीं के रहने वाले राजेश साहनी बताते हैं कि खतरा काफी हो गया है। बच्चों के लिए दूध और खाने-पीने की चीजों की किल्लत हो गई है। पशुओं को चारा तक नसीब नहीं हो रहा है। लोग घर छोड़कर सड़क, बांध और रेलवे स्टेशनों को ठिकाना बना रहे हैं। प्रशासन की ओर से कोई हाल लेने नहीं आया।

बाढ़ का पानी शहरी इलाके के भी 100 से अधिक मोहल्लों को अपनी जद में ले चुका है।
बाढ़ का पानी शहरी इलाके के भी 100 से अधिक मोहल्लों को अपनी जद में ले चुका है।
बहरामपुर दक्षिणी की रहने वाली संध्या निषाद खुद नाव चलाकर स्कूल स्कूल पहुंची।
बहरामपुर दक्षिणी की रहने वाली संध्या निषाद खुद नाव चलाकर स्कूल स्कूल पहुंची।

800 मीटर नाव चलाकर स्कूल पहुंची संध्या
शहर के बहरामपुर दक्षिणी के रहने वाले दिलीप निषाद की बेटी संध्या निषाद खुद नाव चलाकर स्कूल जा रही है। संध्या का पढ़ाई के प्रति इस जुनून के देख उनकी नाव चलाते फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। दरअसल, संध्या यहां अयोध्या दास कन्या इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा है।

संध्या के पिता दिलीप कारपेंटर हैं और इन दिनों पूरे परिवार ने घर की छत पर शरण ले रखी है।
संध्या के पिता दिलीप कारपेंटर हैं और इन दिनों पूरे परिवार ने घर की छत पर शरण ले रखी है।

पानी में डूबा छात्रा का घर, छत पर रह रहा परिवार
इन दिनों पूरा इलाका बाढ़ की जद में होने की वजह से संध्या का घर भी पानी में डूब चुका है। पिता दिलीप कारपेंटर हैं और इन दिनों पूरे परिवार ने घर की छत पर शरण ले रखी है। इस बीच संध्या की सहेलियों ने उसे फोन कर स्कूल आने को कहा। ऐसे में मजबूरन संध्या ने घर से करीब 800 मीटर का सफर खुद नाव चलाकर तय किया। संध्या के पिता ने बताया कि घर में राशन-पानी तक की किल्लत हो रही है, लेकिन बेटी को पढ़ाई का ऐसा जूनून है कि वह खुद नाव चलाकर स्कूल जा रही है।

गोरखपुर के जंगल कौड़िया के रहने वाले फहीम अहमद ने बताया कि पानी चार-पांच दिनों से तेजी से बढ़ रहा है।
गोरखपुर के जंगल कौड़िया के रहने वाले फहीम अहमद ने बताया कि पानी चार-पांच दिनों से तेजी से बढ़ रहा है।
लोग घर छोड़कर सड़क, बांध और रेलवे स्टेशनों को ठिकाना बना रहे हैं।
लोग घर छोड़कर सड़क, बांध और रेलवे स्टेशनों को ठिकाना बना रहे हैं।
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