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गोरखपुर को एयर क्लिन करेगा MMMUT:नोएडा, मेरठ से पॉल्यूशन हटाएंगे IIT दिल्ली और रूड़की, MMMUT को मिली एमिशन इन्वेंटरी एवं कैरिंग कैपेसिटी के अध्ययन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

गोरखपुर10 महीने पहले
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इन शहरों की हवा में पॉल्यूशन का स्तर हाई पाया गया है। क्लिन एयर परियोजना के तहत ये पहल की गई है। - Dainik Bhaskar
इन शहरों की हवा में पॉल्यूशन का स्तर हाई पाया गया है। क्लिन एयर परियोजना के तहत ये पहल की गई है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय के साथ एक बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। गोरखपुर शहर में वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए क्लिन एयर कार्ययोजना तैयार करने एवं सोर्स अपोर्शन्मेंट, एमिशन इन्वेंटरी एवं कैरिंग कैपेसिटी के अध्ययन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एमएमएमयूटी को सौंपी गई है। इसके साथ ही नोएडा, मेरठ की हवा क्लिन की करने जिम्मेदारी आईआईटी दिल्ली और आईआईटी रूड़की को दी गई है। इन शहरों की हवा में पॉल्यूशन का स्तर हाई पाया गया है। क्लिन एयर परियोजना के तहत ये पहल की गई है।

MMMUT को मिलेंगे 74 लाख रुपए
क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ई-मेल के जरिए परियोजना के प्रधान अन्वेषक एमएमएमयूटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. गोविन्द पाण्डेय को अवगत कराया गया है। हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली द्वारा प्रदत्त स्वीकृति के अनुसार उत्तर प्रदेश के तीन बड़े शहरों नोएडा, गोरखपुर, एवं मेरठ में सोर्स अपोर्शन्मेंट, एमिशन इन्वेंटरी एवं कैरिंग कैपेसिटी के अध्ययन के लिए आईआईटी दिल्ली, एमएमएमयूटी गोरखपुर एवं आईआईटी रुड़की का चयन किया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर गोरखपुर शहर के सोर्स अपोर्शन्मेंट/ एमिशन इन्वेंटरी के अध्ययन के लिए 68 लाख मिलेंगे। साथ ही कैरिंग कैपेसिटी के अध्ययन के लिए 6 लाख रुपए ख्याति प्राप्त संस्थान के रूप में एमएमएमयूटी को उपलब्ध कराई जाएगी।

स्वच्छ वायु मिशन के तहत संस्थानों का हुआ चयन
बीते दिनों भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु मिशन के तहत निर्मित राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क के माध्यम से नेशनल स्तर पर इस कार्य के लिए ख्यातिप्राप्त संस्थानों का चयन किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एमएमएमयूटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. गोविन्द पाण्डेय का परियोजना के प्रधान अन्वेषक के रूप में नामांकन किया गया था। बाद में प्रो. पाण्डेय द्वारा परियोजना के सह प्रधान अन्वेषक के रूप में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सह आचार्य डॉ. अरुण कुमार मिश्र को नामित किया।

बड़े संस्थानों में शामिल हुआ MMMUT
एमएमएमयूटी का नाम देश के उन प्रतिष्ठित संस्थानों में सम्मिलित हो गया है जिन्हें पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में अध्ययन एवं शोध के लिए ‘इंस्टीट्यूट ऑफ़ रेप्यूट’ (ख्याति प्राप्त संस्थान) के रूप में चयनित किया गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों में से जहां एक ओर नोएडा की जिम्मेदारी आईआईटी दिल्ली को और मेरठ की आईआईटी रूड़की को दी गयी है, वहीं दूसरी ओर गोरखपुर की जिम्मेदारी एमएमएमयूटी को मिली है।

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