सरकारी स्कूल में 'नकल वाला इम्तिहान':कंपोजिट स्कूल में स्टूडेंट्स ने मोबाइल रखकर दिया एग्जाम, देखें VIDEO

गोरखपुरएक महीने पहले
परीक्षा के दौरान स्टूडेंट्स बेखौफ होकर बड़े ही आराम से बकायदा पूछे गए सवालों के जवाब गूगल से तलाश कापियों में लिख रहे हैं। - Dainik Bhaskar
परीक्षा के दौरान स्टूडेंट्स बेखौफ होकर बड़े ही आराम से बकायदा पूछे गए सवालों के जवाब गूगल से तलाश कापियों में लिख रहे हैं।

गोरखपुर के सरकारी स्कूल में पिछले दिनों नकल वाला इम्तिहान देखने को मिला। गोरखपुर के एक कंपोजिट स्कूल में स्टूडेंट मोबाइल रखकर एग्जाम दे रहे हैं। क्लास रूम में परीक्षा के दौरान स्टूडेंट्स बेखौफ होकर बड़े ही आराम से बकायदा पूछे गए सवालों के जवाब गूगल से कॉपियों में लिख रहे हैं। इस नकल का वीडियो शनिवार को सामने आया है। नकल का वीडियो सामने आते ही यह तेजी से शेयर हो रहा है।

क्लास में न टीचर न ही एग्जाम का माहौल
परीक्षा के दौरान नकल का यह वीडियो गोरखपुर के खोराबार सिक्टौर स्थित कंपोजिट स्कूल का है। जहां अप्रैल महीने में एग्जाम चल रहा था। वीडियो में एक नहीं कई बच्चे हाथ में मोबाइल लेकर गूगल पर प्रश्न का उत्तर देख कॉपियों में जवाब लिखते नजर आ रहे हैं। साथ ही बच्चे आपस में ही कुश्ती भी लड़ते नजर आ रहे हैं। क्लासरूम में न तो कोई अध्यापक हैं और न ही परीक्षा का कोई माहौल दिख रहा है। जबकि स्कूल की ​प्रिंसिपल शालिनी गुप्ता इसे हाईटेक स्कूल बताते नहीं थकती हैं।

नकल से कैसे मिलेगी शिक्षा
बच्चों की प्राथमिक शिक्षा ही उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मानी जाती है। अधिकारी प्राथमिक स्कूलों की शिक्षा की दशा सुधारने का लगातार दावा करते हैं। तमाम योजनाएं भी शुरू की गई हैं, लेकिन इस वीडियो के सामने आने के बाद हकीकत कुछ और बयां कर रही है। अब ऐसे में अगर प्राथमिक स्कूलों में नकल होगी तो उन बच्चों की उच्च शिक्षा कैसी होगी और उनका भविष्य कैसा होगा यह आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं।

जवाब नहीं दे पाईं प्रिंसिपल
वहीं, हैरानी वाली बात यह है कि इस वीडियो के बारे में जब स्कूल की ​प्रिंसिपल शालिनी गुप्ता से बात की गई तो वे उल्टा पूछने लगीं कि वीडियो आपके पास कहां से आया है? टाल- मटोल की बात करते हुए फिलहाल, वे इस वीडियो के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं। गांव के प्रधान प्रतिनिधि राजेश निषाद ने कहा कि वीडियो सामने आने के बाद प्रिंसिपल से बात की गई थी। लेकिन इसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ।

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