गोरखपुर...11वीं की छात्र की बेरहमी से हत्या का मामला:इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने ही कराया था जबरदस्ती सुलह, बड़ा भाई नहीं मिला तो छोटे भाई अंकुर की कर दी हत्या

गोरखपुर2 महीने पहले
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मनीष हत्याकांड के आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने अगर इस मामले जबरदस्ती सुलह नहीं कराया होता औतो शायद आज छात्र अंकुर शुक्ला की हत्या नहीं होती। - Dainik Bhaskar
मनीष हत्याकांड के आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने अगर इस मामले जबरदस्ती सुलह नहीं कराया होता औतो शायद आज छात्र अंकुर शुक्ला की हत्या नहीं होती।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुरानी रंजिश में युवक की पीट-पीटकर हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। 5 महीने पहले मनीष हत्याकांड के आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने अगर इस मामले में दोनों पक्षों के बीच जबरदस्ती सुलह नहीं कराया होता और कार्रवाई की होती तो शायद आज छात्र अंकुर शुक्ला की हत्या नहीं होती। पीड़ित परिवार का आरोप है कि राजनैतिक लोगों के दबाव में तत्कालीन इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने 6 जुलाई को इस मामले में सिर्फ पीड़ित परिवार पर दबाव ही नहीं बनाया बल्कि सुलह के नाम पर रुपए भी एंठ लिए।

14 जनू को चोरी करते पकड़ा गया था अवधेश
मृतक अंकुर के भाई राहुल शुक्ला ने बताया कि 14 जून की रात उनके रामगढ़ताल इलाके के रामपुर स्थित आवास गांव के ही अवधेश साहनी नाम का युवक कुछ लोगों के साथ चोरी के नियत से घुस गया। पकड़े जाने पर परिवार के लोगों ने मारपीट कर उसे छोड़ दिया। राहुल के मुताबिक इसकी अगली सुबह गांव के दर्जन भर से अधिक लोग चढ़ गए और हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

कार्रवाई के बजाय पीड़ित पक्ष को ही धमकाती रही पुलिस
राहुल ने बताया कि थाने से लेकर एसएसपी और डीआईजी तक को इस मामले में प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। बल्कि पूरा गांव निषाद बाहुल्य होने की वजह से कुछ राजनीतिक लोगों ने पुलिस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि इसके बाद उल्टा पुलिस ने पीड़ित परिवार को ही धमकाना शुरू कर दिया कि तुम लोगों ने युवक को पीटकर रामगढ़ताल में फेंक दिया था। इसपर कार्रवाई होगी।

दबंगों के डर से किराए का कमरा लेकर रहता है राहुल
राहुल के मुताबिक दबाव बढ़ने पर मजबूरी वश उन्हें न ही ​इस मामले में सिर्फ समझौता करना पड़ा बल्कि 32 हजार रुपए भी अपनी जेब से देने पड़े। इसके बाद से ही गांव के आरोपी पक्ष का दबाव पीड़ित परिवार पर बढ़ने लगा। भय की वजह से राहुल ने रामपुर गांव छोड़कर बुद्धविहार में किराए का कमरा ले लिया और पत्नी और बच्चों के साथ वहीं, रहने लगे। जबकि माता- पिता और दो छोटे भाई गांव पर ही रह रहे थे। राहुल का आरोप है कि गांव के युवक लगातार उन्हें ढूंढ रहे थे, लेकिन उनके गांव में न होने की वजह से इस बीच बुधवार को उनका छोटा भाई अंकुर उन्हें मिल गया। जिसकी बेरहमी से पीटकर हत्या कर दी गई।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बुधवार की दोपहर रामगढ़ताल इलाके के रामपुर में पुरानी रंजिश में एक युवक की बेरहमी से पीट- पीटकर दबंगों ने हत्या कर दी गई। परिजन किशोर को लेकर जिला अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

गगहा इलाके के नर्रे खुर्द गांव निवासी महेन्द्र शुक्ला रामगढ़ताल के रामपुर में मकान बनवा कर परिवार के साथ रहते हैं। वह पूजा-पाठ करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके 3 बेटे राहुल शुक्ला, अंजनेय शुक्ला और सबसे छोटा अंकुर शुक्ला था। अंकुर जोकि 11वीं का छात्र था, दोपहर में माता-पिता से बाल कटवाने जाने की बात कह कर घर से निकला। घर पर माता-पिता अकेले थे। शाम को बड़े भाई राहुल के मोबाइल गांव के ही एक व्यक्ति ने फोन आया। उसने बताया कि उसका छोटा भाई गांव में धर्मेद्र साहनी के घर के पास गंभीर हालत में पड़ा हुआ है।

परिवार ने लाश रखकर किया था सड़क जाम
इसके बाद गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद जब परिवार को युवक का शव सौंपा गया, तो उन्होंने लाश को देवरिया बाईपास पर रखकर सड़क जाम कर दिया। इस दौरान पीड़ित पक्ष और पुलिस प्रशासन के बीच धक्कामुक्की भी हुई। अंत में 48 घंटे के अंदर आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन मिलने के बाद मामला शांत हुआ।

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