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पुलिस ने किया इंस्पेक्टर जेएन सिंह को 'फरार':मनीष गुप्ता हत्याकांड: वारदात के 19 घंटे बाद रोजनामचे में रवानगी लिखने थाने पहुंचा था आरोपी इंस्पेक्टर, 96 घंटे तक ऑन था उसका मोबाइल

गोरखपुर4 महीने पहले
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कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता हत्याकांड में गोरखपुर पुलिस के नए-नए कारनामे उजागर हो रहे हैं। इस मामले में अब एक नया खुलासा हुआ है। पूरी फिल्म सीन की तरह इस घटना की स्क्रिप्ट में आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और सब इंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा को भागने का मौका दिया गया। दोनों ने वारदात के करीब 19 घंटे और सस्पेंड होने के करीब 6 घंटे बाद थाने की जीडी में बकायदा लिखा पढ़ी की और फिर आराम से फरार हो गए।

27 सितंबर की देर रात हुई घटना को इंस्पेक्टर ने रामगढ़ताल थाने की जीडी में 28 सितंबर की देर शाम को दर्ज किया है। जीडी नंबर 041 पर 28 सितंबर को 19.48 बजे रोजनामचे में लिखे विवरण से भी गोरखपुर पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस वक्त मृतक का परिवार यहां बीआरडी मेडिकल कॉलेज में धरना- प्रदर्शन कर पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर की मांग कर रहा था। ठीक उसी वक्त जीएन सिंह थाने में अपनी रवानगी लिख रहा था।

होटल में चेकिंग के लिए पहुंचे इस्पेक्टर जेएन सिंह। उस वक्त मनीष अपने बिस्तर पर थे।- फाइल
होटल में चेकिंग के लिए पहुंचे इस्पेक्टर जेएन सिंह। उस वक्त मनीष अपने बिस्तर पर थे।- फाइल

इसके बाद उसने थाने का सीयूजी मोबाइल कांस्टेबल मुंशी हरीश कुमार गुप्ता को सुपुर्द करते हुए हिदायत दी है कि इसे एसएसआई अरुण कुमार चौबे को सौंप दें। इसके बाद रात में लखनऊ के नंबर की काली स्कार्पियो से निकल गया था। यानी कि उसे पहले ही इस बात का इशारा मिल चुका था कि अब उसे क्या करना है?

28 को हुई FIR, 2 अक्टूबर तक ऑन था प्राइवेट नंबर
वारदात के अगले दिन मामला तूल पकड़ने के 96 घंटे बाद तक आरोपी इंस्पेक्टर का मोबाइल भी चालू रहा। यानी कि 2 अक्टूबर गुरुवार की सुबह 11.24 बजे तक जेएन सिंह ने अपने प्राइवेट नंबर का वॉट्सऐप भी चेक किया है। उसका लास्ट सीन गुरुवार सुबह 11.24 बजे बजे दिखा रहा है। बावजूद इसके पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाई। आरोपित इंस्पेक्टर जेएन सिंह और चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा ने खुद को बीमार बताकर थाने की जीडी से अपनी रवानगी की है। जबकि इससे पहले वह सस्पेंड हो चुके थे।

रोजानामचे में ये लिखा है इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने
जेएन सिंह ने रोजनामचे में लिखा है कि रात्रि जागरण के कारण हमराह उ.नि. अक्षय कुमार मिश्रा की एवं मुझ प्रभारी निरीक्षक की तबीयत खराब हो गई है। उ.नि. अक्षय कुमार मिश्र को इलाज कराने के लिए रवाना किया गया है। उनके पास मौजूद पिस्टल और 10 चक्र कारतूस था, जिसे कार्यालय दाखिल किया गया है। चूंकि मेरी यानी प्रभारी निरीक्षक की तबीयत भी खराब है। रवाना होने से पहले अपने पास मौजूद रिवॉल्वर मय कारतूस कार्यालय में दाखिल किया है। सीयूजी मोबाइल को कांस्टेबल मुंशी हरीश कुमार गुप्ता को सुपुर्द करते हुए हिदायत दी है कि इसे वरिष्ठ उ.नि. अरुण कुमार चौबे को सुपुर्द करें।

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