गोरखपुर...शुरू होते ही विवादों से फंसा विधि विज्ञान प्रयोगशाला:उप निदेशक पर लगे कई गंभीर आरोप, ADG ने कार्रवाई के लिए IG टेक्निकल सर्विसेज को लिखा पत्र

गोरखपुरएक वर्ष पहले
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प्रयोगशाला के उप निदेशक सुरेश चंद्र पर बिना बताए गायब रहने, जांच में और ठेकेदारों से धन उगाही करने सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं। - Dainik Bhaskar
प्रयोगशाला के उप निदेशक सुरेश चंद्र पर बिना बताए गायब रहने, जांच में और ठेकेदारों से धन उगाही करने सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में खुले विधि विज्ञान प्रयोगशाला शुरू होने के साथ ही ही विवादों से घिर गया है। प्रयोगशाला के उप निदेशक सुरेश चंद्र पर बिना बताए गायब रहने, जांच में और ठेकेदारों से धन उगाही करने, अतिथि गृह पर अवैध कब्जा करने सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं। कनिष्ठ प्रयोगशाला सहायक मुहम्मद अजहर हुसैन की लिखित शिकायत पर एडीजी जोन अखिल कुमार ने 27 दिसंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के पुलिस तकनीकी सेवा विभाग के आईजी को कार्यवाई के लिए पत्र लिखा है। एडीजी ने पत्र में कहा है कि सीएम का गृह क्षेत्र होने व उनका बिना बताए गायब रहना बेहद गंभीर मामला है, जिससे राजकीय कार्य में बाधा आ रही है।

ADG से हुई थी शिकायत
प्रयोगशाला के कनिष्ठ सहायक अजहर हुसैन ने बीते 23 दिसंबर 2021 को एडीजी जोन ​से लिखित शिकायत की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि उन निदेशक सुरेश चंद्र वर्मा वर्ष 2021 में 185 दिन से भी अधिक दिन बिना बताए गायब रहे हैं। जिससे राजकीय काम में बाधा आ रही है। कई बार इसकी शिकायत भी वे प्रयोगशाला के उच्चाधिकारियों व मुख्यालय को कर चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं वे 23 दिसंबर को भी बिना बताए गायब हो चुके हैं।

ठेकेदार से ​कर रहे धनउगाही और अतिथि गृह पर है कब्जा
अजहर हुसैन का आरोप है कि जुलाई 2019 में अपनी तैनाती के बाद से ही उप निदेशक सुरेश चंद्र निर्माण करा रहे प्रयोगशाला के ठेकेदार से भवन हस्तांतरण के नाम पर धन उगाही कर रहे हैं। वे होटल आदि का खर्च भी ठेकेदार से वहन कराते हैं। साथ ही निर्माण सामग्री को भी अपने घर ले जाते हैं। प्रयोगशाला में आने वाले वाहनों से भी वसूली करते हैं।

जून 2020 के बाद से ही अतिथि गृह पर भी उन्होंने अवैध कब्जा किया है और उसका प्रयोग अपने निवास गृह के तौर पर करते हैं। लेबरों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली की जाती है और अपने सहायक संजय सिंह के साथ मिलकर शराब पीकर लेबरों व कर्मचारियों से मारपीट भी की जाती है। तंग आकर ठेकेदार ने 26 सितंबर 2021 को कोतवाली थाने में तहरीर दी। वहीं 7 दिसंबर 2021 को पुलिस अधीक्षक तकनीकी सेवा से भी शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

DNA जांच में भी पुलिसकर्मियों से करते हैं धनउगाही
आरोप है कि गोरखपुर व वाराणसी जोन से आने वाले डीएनए जांच के मामलों में तकनीकी कमियों की बात कह कर सादे कागज पर लिखकर देते हैं और पुलिसकर्मियों को हड़काते हैं। इसके साथ ही केस जमा करने से इंकार कर देते हैं। बाद में विवेचक के कहने पर 2 से 3 हजार रूपये की धनउगाही करते हैं और सादे कागज को फाड़ कर फेंक देते हैं। पैसा मिलने के बाद केस जमा कर लेते हैं। जिससे जांच में देरी होती है, जो कि नियम विरूद्ध है। आरोप है कि जांच के लिए आने वाले केसों में केमिकल न होने का हवाला देते हैं। थाने पर आकर जांच करने की बात कहते हैं और धनउगाही करते हैं।

डुमरियागंज थाने के लूट के मामले में वसूली का आरोप
आरोप यह भी है कि सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज थाने से 2021 के मुकदमा अपराध संख्या 133 जो लूट का मामला था जांच के लिए आया। जिसमें लूट के बाद लुटेरों की बाइक छूट गई थी गाड़ी का नंबर मिट गया था। वहां के सीओ अजय कुमार सिंह ने लिखित पत्र के साथ बाइक भेजी थी। ताकि इंजन नंबर व चेचिस नंबर के आधार पर लुटेरों की पहचान हो सके। बाइक को 20 नंवबर 2021 को थाने के सिपाही अमित कुमार राव लाए थे। उप निदेशक सुरेश चंद्र की अनुपस्थिति में उनके सहायक केस प्राप्त करने वाले सहायक संजय सिंह ने कागज में कमी के नाम पर पुलिसकर्मी को परेशान किया और केस जमा करने से इंकार कर दिया। कहा कि थाने पर आकर जांच करेंगे।

विवेचक से भी वसूल लिया केमिकल का पैसा
अधिकारियों के कहने पर कहा कि केमिकल नहीं है। बताया गया कि इसी प्रकार हम लोग खोराबार थाने में जाकर परीक्षण कर चुके हैं और विवेचक ने 2000 रूपये केमिकल के लिए दिए थे। जबकि बाद में ये लोग बिल लगाकर केमिकल का पैसा विभाग से प्राप्त कर लेते हैं। केमिकल भी विभाग से निशुल्क आता है और नियम है कि जो गाड़ी या केस प्रयोगशाला आ जाए उसका परीक्षण वहीं किया जाए। कर्मचारियों ने एडीजी से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में एडीजी जोन अखिल कुमार ने कहा कि शिकायत आई थी। जांच कर कार्रवाई के लिए आईजी तकनीकी सेवा को पत्राचार किया गया है।

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