गोरखपुर में मनाया जा रहा जीवित्पुत्रिका पर्व:बेटों के दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा निर्जल व्रत, पूजन कर करेंगी बेटों के लंबी उम्र की कामना

गोरखपुर18 दिन पहले
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गोरखपुर सहित देश भर में आज जीवित्पुत्रिका (जीवतिया) का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। मां अपने बेटों के दीर्घायु के लिए निर्जल व्रत रखी हैं। व्रत का पारण सोमवार को होगा। शास्त्रों के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पुत्र की लंबी आयु और कल्याण के लिए जीवत्पुत्रिका या जिमूतवाहन व्रत का विधान है।

पंडित विनोद तिवारी के मुताबिक, आज 18 सितंबर को अष्टमी तिथि का मान शाम 4 बजकर 39 मिनट तक, मृगशिरा नक्षत्र भी शाम 4 बजकर 31 मिनट और इस दिन सौम्य नामक औदायिक योग है।

जीवत्पुत्रिका व्रत का महत्व

पंडित विनोद तिवारी के मुताबिक, धर्मशास्त्र की दृष्टि से यह व्रत स्त्रियों का है। प्रदोष व्यापिनी अष्टमी को अंगीकृत करते हुए आचार्यों ने प्रदोष काल या शाम में जीमूतवाहन के पूजन का विधान निर्दिष्ट किया है। इस व्रत का पारण अष्टमी के बाद नवमी में ही पारण करना चाहिए।

ऐसे करें व्रत
पंडित विनोद तिवारी के मुताबिक, व्रती महिलाएं पवित्र होकर संकल्प के साथ प्रदोष काल में गाय के गोबर से पूजन स्थल को लीप दें और छोटा तालाब भी बना लें। तालाब के निकट एक पाकड़ की डाल लाकर खड़ा कर दें। जिमूतवाहन की कुश निर्मित मूर्ति, जल या मिट्टी के पात्र में स्थापित कर पीली और लाल रूई से उसे अलंकृत करें और धूप, दीप, अक्षत, फूल, माला व नैवेद्यों से पूजन करें।

मिट्टी या गाय के गोबर से चिल्होरिन ;मादा चीलद्ध और सियारिन की मूर्ति बनाकर उसका मस्तक लाल सिंदूर से विभूषित कर दें। अपने वंश की वृद्धि और प्रगति के लिए दिनभर उपवास कर बांस के पत्तों से पूजन करें। पूजन के बाद व्रत महात्म्य की कथा श्रवण करें। अगले दिन दान.पुण्य के पश्चात व्रत का पारण करें।