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गोरखपुर में भी अपनी जड़ें जमा चुके हैं आतंकी:नेपाल वाया गोरखपुर आतंकियों ने की थी प्रदेश भर के धार्मिक स्थलों की रेकी; गोरखपुर से पाकिस्तान भेजे जाते थे इनपुट

गोरखपुर4 महीने पहले
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खुफिया रिपोर्ट के बाद से ही लगातार यहां मंदिर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं, इंडो- नेपाल बार्डर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। - Dainik Bhaskar
खुफिया रिपोर्ट के बाद से ही लगातार यहां मंदिर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं, इंडो- नेपाल बार्डर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में भी आतंकी अपनी गहरी पैठ जमा चुके हैं। राजधानी लखनऊ में रविवार को अलकायदा की विंग अंसार अलकायदा हिंद (AGH) के आतंकी मिनहाज अहमद और मसीरुद्दीन उर्फ मुशीर के पकड़े जाने के बाद जहां प्रदेश भर में हाई अलर्ट हो गया है। वहीं, इस मामले में कई और चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। एटीएस व खुफिया सूत्रों के मुताबिक करीब दो साल पहले ही नेपाल वाया गोरखपुर के रास्ते आतंकियों ने प्रदेश भर के धार्मिक स्थलों की रेकी की थी। ऐसे में इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि देश में प्रसिद्ध गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर की आतंकियों ने रेकी नहीं की थी। यही वजह है कि खुफिया रिपोर्ट के बाद से ही लगातार यहां मंदिर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं, इंडो- नेपाल बार्डर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

आतंकी इनपुट के बाद बढ़ने लगी सुरक्षा
गोरखनाथ मंदिर में जहां पुलिस सिक्योरिटी बैरक बनाने की प्रकिया शुरू हो गई है, वहीं प्रदेश के अतिसंवेदनशील 5 जिलों में एटीएस की स्पॉट टीमों का गठन किया जा रहा। नेपाल के कपिलवस्तु में एजुकेशनल सोसाइटी के नाम पर चल रहे आतंकी के ट्रेनिंग कैंप से ही आकर आंतकियों ने गोरखपुर के रास्ते अयोध्या, काशी विश्वनाथ, प्रयागराज सहित करीब दो दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों की रेकी की थी। इसके इनपुट भी खुफिया एजेंसी को काफी पहले ही मिल चुके थे।

गोरखपुर के शख्स ने रेकी कर पाकिस्तान भेजी थी फोटो
वहीं, अगस्त 2020 में गोरखपुर कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले एक शख्‍स को एटीएस ने पकड़ा था। पूछताछ में उसने कबूल किया था कि उसने यहां एयरफोर्स स्टेशन, कूड़ाघाट स्थित गोरखा रेजीमेंट और रेलवे स्टेशन की फोटो पाकिस्तान में बैठे अपने आका को भेजी थी। उसने बताया था कि पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी ने उसे कैसे अपने जाल में फंसाया था। इस शख्‍स की पाकिस्‍तान में रिश्‍तेदारी है। 2014 से 2018 के बीच वह कई बार अपने उस रिश्‍तेदार के यहां पाकिस्तान भी गया। इसी दौरान आईएसआई ने उसे हनीट्रैप में फंसा लिया। उसे ब्‍लैकमेल किया गया और वापस लौटने पर जासूसी के काम में लगा दिया गया।

पकड़े जाने पहले फार्मेट कर दिया था मोबाइल
सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर उस शख्‍स पर पांच अगस्त को अयोध्या में राममंदिर निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर नजर रखी जा रही थी। इसके बाद उसे गोरखपुर रेलवे स्टेशन के पास से एटीएस लखनऊ की टीम ने उठा लिया और अपने साथ लखनऊ लेते गई। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में उस शख्‍स ने कबूल किया कि वह वाट्सएप ग्रुप के जरिए खुफिया जानकारी पाकिस्तानी एजेंसी को भेजता था। एटीएस की गिरफ्त में आने से उसने अपना मोबाइल फोन फार्मेट कर दिया था। इससे खुफिया जानकारियां पाकिस्‍तान भेजने का कोई सबूत एटीएस के हाथ नहीं लग सका। उसके कबूलनामे के अलावा कोई सबूत न होने की वजह से एटीएस को उसे छोड़ना पड़ा।

दो साल पहले ही जुड़े थे गोरखपुर से तार
दिसंबर 2019 में राम मंदिर फैसले के बाद UPSTF(उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स) ने कुख्यात आतंकी जलीस अंसारी उर्फ डॉ. बम को कानपुर में गिरफ्तार किया था। तभी इस साजिश का खुलासा हो गया था। डॉ. बम यहां संतकरीबनगर ​नगर जिले के बखिरा अमर डोभा का रहने वाला है। जलीस का एक चचेरा भाई आज भी यहां बखिरा में रह रहा है। पेरोल तोड़कर भागे जलीस ने बताया था कि CAA (नागरिकता संशोधन कानून) और राममंदिर फैसले को लेकर आतंकी संगठनों में आक्रोश है। इसलिए यूपी में सीरियल ब्लास्ट की तैयारी चल रही है। उसने यह भी बताया था कि यक एक बहुत बड़ा मिशन है, जिसे सरकार नहीं रोक सकती। इसे अंजाम देने के लिए यूपी के हर जिलों में फिदायीन तैयार हो रहे हैं। इन फिदायीनों को बम बनाने की तकनीकी सिखाने के लिए ही वह पेरोल तोड़कर कानपुर पहुंचा था।

बम बनाने के मास्टरमाइंड से भी शुरू हुई पूछताछ
दुनिया के 10 सबसे खूंखार आतंकियों में शामिल डॉ. बम अजमेर जेल में बंद है। उसके साथ बाबरी मस्जिद विध्वंस के विरोध में 1993 में देश भर में ब्लास्ट करने में शामिल रहा रायबरेली का प्रोफेसर हबीब अहमद, लखनऊ के नक्खास निवासी डॉ. मुहीउद्दीन जमाल अल्वी और मुंबई का अब्रे रहमत अंसारी भी अजमेर जेल में हैं। 1983 में मुंबई से MBBS करने वाले जलीस अंसारी को दुनिया के सबसे सस्ते और घातक बम बनाने की विधियां मालूम है।

उसके पास मिली डायरी में बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले 600 से ज्यादा रसायनों की लिस्ट थी। वह जेल के अंदर से इन संगठनों को हैंडल करता है। 1993 के सीरियल ब्लास्ट की योजना जलीस और हबीब ने जमाल अल्वी के नक्खास स्थित घर पर ही बैठकर तैयार की थी। जलीस अंसारी ने बम बनाने की शुरुआती विधियां बुलंदशहर के आतंकी अब्दुल करीम टुंडा से सीखी थी। राजस्थान ATS की टीम अजमेर जेल में बंद जलीस और उसके साथियों से पूछताछ कर रही है।

दो साल पहले ही हुई थी रेकी
जलीस अंसारी के कानपुर में पकड़े जाने के कुछ महीने पहले अयोध्या पुलिस ने 7 संदिग्धों को पकड़ा था। इसमें राजस्थान और नेपाल से सटे तराई इलाके के युवक शामिल थे। यह बाइक से घूमकर यूपी के धार्मिक स्थलों की रेकी कर रहे थे। इनके पास से कई धार्मिक स्थलों का नक्शा भी मिला था। कई दिनों तक इनसे पूछताछ चली। मगर आतंकी कनेक्शन का कोई ठोस सुबूत न मिलने की वजह से इन्हें छोड़ना पड़ा था। कुछ दिन बाद बनारस में ISI का एजेंट चंदौली निवासी राशिद अहमद पकड़ा गया। फिर पता चला कि अयोध्या में पकड़े गए युवक रेकी करने के लिए ही भेजे गए थे।

नेपाल बार्डर पर 300 अवैध मदरसों की चल रही जांच
वहीं, जलीस ने खुलासा किया था कि वह कानपुर में आतंकी मौलाना मदनी से मिलने आया था। लेकिन कानपुर में मदनी नहीं मिला। इससे पहले जलीस पकड़ा गया। मौलाना मदनी यहां बिहार के मधुबनी का रहने वाला है। जोकि नेपाल के कपीलवस्तु में एजेकेशनल सोसाइटी (जकात फाउंडेशन) का संचालन कर फिदायीन हमलों की तैयारी कर रहा है। खुफिया एजेंसियों को इस बात के भी इनपुट मिले थे कि मौलाना मदनी के ही इशारों पर भारत नेपाल सीमा पर लगातार आंतक के पैसों के अवैध मदरसों और मस्जिदों का भी निर्माण कराया जा रहा है।

बीते दिनों तत्कालीन एडीजी दावा शेरपा ने यहां नेपाल बॉर्डर पर स्थित मदरसों को लेकर खुफिया विभाग को अलर्ट किया था। गोरखपुर में भी बॉर्डर पर संचालित 300 से अधिक मदरसों की जांच चल रही है। ये मदरसे अचानक अस्तित्व में आए हैं। इनके आय के स्रोत का भी कुछ पता नहीं है। तभी से पुलिस विभाग और खुफिया एजेंसियां मिलकर इनपुट जुटा रही हैं। इन मदरसों का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी ताकतें कर रही हैं।

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