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मनीष गुप्ता हत्याकांड:नवरात्रि के बाद होटल के कमरे का सीन रिक्रीएट कराएगी SIT, कोर्ट से वारंट लेकर आरोपी पुलिस वालों को करेगी गिरफ्तार

गोरखपुर/कानपुर10 दिन पहले
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गुड़गांव से कानपुर पहुंचे मृतक मनीष के दोस्त हरबीर सिंह और प्रदीप सिंह गोरखपुर आने के बजाय गुरुवार की शाम गुड़गांव वापस लौट गए। - Dainik Bhaskar
गुड़गांव से कानपुर पहुंचे मृतक मनीष के दोस्त हरबीर सिंह और प्रदीप सिंह गोरखपुर आने के बजाय गुरुवार की शाम गुड़गांव वापस लौट गए।

कानपुर से दोस्तों संग गोरखपुर घूमने आए प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता हत्याकांड में अब जल्द ही कानपुर SIT फरार पुलिस वालों को गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। इस हत्याकांड की जांच करने गोरखपुर आई SIT, जांच के आखिरी पड़ाव पर है।

अब इसमें सिर्फ दो चीजें बाकी रह गई हैं। एक तो आरोपी बनाए गए फरार पुलिस वालों की गिरफ्तारी और दूसरा होटल कृष्णा पैलेस के रूम नंबर-512 में हुई वारदात का सीन रिक्रीएशन। हालांकि, अब सीन रिक्रिएशन SIT नवरात्रि के बाद ही कराएगी। क्योंकि गुड़गांव से कानपुर पहुंचे मृतक मनीष के दोस्त हरबीर सिंह और प्रदीप सिंह गोरखपुर आने के बजाय गुरुवार की शाम गुड़गांव वापस लौट गए।

नवरात्रि के बाद गोरखपुर आएंगे हरबीर और प्रदीप

हरबीर और प्रदीप दोनों वारदात के बाद से ही काफी डरे और सहमे हुए हैंं। पहले तो वह किसी भी हाल में गोरखपुर आने को तैयार नहीं थे, लेकिन किसी तरह अधिकारियों के समझाने पर वह आने को तैयार हो गए। लेकिन नवरात्रि व्रत और घर पर जलाई गई अखंड ज्योति की वजह से उन्हें वापस गुड़गांव जाना पड़ गया। अब नव​रात्रि के बाद वह गोरखपुर आकर सीन रिक्रिएट कराएंगे।

दूसरी तरफ अभी कानपुर SIT फिलहाल शहर में डेरा डाले रहेगी। SIT इस केस की कड़ियां सुलझाने के साथ ही आरोपित पुलिस वालों की गिरफ्तारी पर अब जोर दे रही है। इसके लिए SIT कोर्ट से आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी कराने की तैयारी में लगी है। ताकि जल्द से जल्द उन्हें किसी भी हाल में कहीं से भी पकड़ा जा सके।

कोर्ट में सरेंडर करने की आशंका

इस बीच खबर यह भी है कि फरार पुलिस वालों पर जल्द ही इनाम भी घोषित किया जा सकता है। वारंट जारी होने के साथ ही उन्हें भगौड़ा घोषित किया जाएगा। दरअसल, SIT को इस बात की आशंका है कि आरोपित पुलिस कर्मी गिरफ्तारी से पहले ही कोर्ट में हाजिर होकर सरेंडर कर सकते हैं। SIT सूत्रों के मुताबिक वारंट की प्रक्रिया भी गुरुवार को शुरू कराई जा चुकी है।

6 टीमें कर रहीं 6 पुलिस वालों की तलाश

आरोपित इंस्पेक्टर जेएन सिंह सहित 6 पुलिसकर्मियों की तलाश में गोरखपुर पुलिस के दो अफसरों के नेतृत्व में 6 टीमें छापेमारी कर रही हैं। एसपी क्राइम पूरे छापेमारी को लीड कर रहे हैं। वहीं, उनके सहयोगी के तौर पर सीओ कैम्पियरगंज ने भी कमान संभाली है। दोनों अफसरों के निशाने पर सभी आरोपितों का घर और ठिकाना है। एसपी क्राइम के नेतृत्व वाली टीम जेएन सिंह की तलाश में लखनऊ में डेरा डाले हुए है। वहीं अमेठी व अन्य जगहों पर छापेमारी चल रही है।

सीओ कैम्पियरगंज के नेतृत्व वाली टीम गाजीपुर और बलिया इलाके में भी गई है। इसके अलावा कानपुर पुलिस की भी कुछ टीमें और एसटीएफ भी उन्हें पकड़ने में लगी हुई है। वहीं, सीओ कैंपियरगंज अजय सिंह की टीम अक्षय मिश्रा, विजय यादव व अन्य की तलाश के लिए गाजीपुर-बलिया इलाके में डेरा डाले हैं।

कानपुर और गोरखपुर पुलिस में कौन मारेगा बाजी?

वहीं, आरोपित पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी को लेकर भी कहीं न कहीं कानपुर और गोरखपुर पुलिस के बीच स्पर्धा शुरू हो गई है। पहले ही इस मामले में अपनी भद पिटवा चुकी गोरखपुर पुलिस का प्रयास है कि कानपुर पुलिस से पहले वह इस मामले में गिरफ्तारी कर खुद पर लगे कुछ दाग धो ले। जबकि कानपुर पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपित उनकी गिरफ्त में होंगे।

SIT ने दर्ज किए 6 लोगों के बयान, 12 को नोटिस

घटना के 5वें दिन गुरुवार को SIT ने 6 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। अब तक इस मामले में 36 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, इसमें ज्यादातर पुलिस वाले हैं। वहीं मनीष गुप्ता के दोस्तों का भी बयान दर्ज किया गया है। जबकि इसके साथ ही इस वारदात से किसी न किसी रूप से जुड़े 12 लोगों को SIT ने नोटिस जारी किया है। ताकि उनके बयान भी हो सकें। इनमें भी अधिकांश पुलिस वाले ही शामिल हैं। जोकि वारदात के बाद आरोपित पुलिस वालों से जुड़े रहे या फिर इस मामले में कहीं न कहीं से उनके तार जुड़ रहे हैं।

संपर्क में रहे लोगों पर भी SIT की रडार

वहीं, इसके साथ ही वारदात के बाद से आरोपित पुलिस वालों के कॉल डिटेल रिकार्ड भी खंगाले जा रहे हैं। जिसमें सामने आया है कि बीते गुुरुवार तक इंस्पेक्टर जेएन सिंह का प्राइवेट नंबर चालू रहा और वह किन लोगों के संपर्क में रहा। इसके अलावा वारदात के बाद उसने किसे थाने में अपना चार्ज दिया, किसे सीयूजी मोबाइल और रिवाल्वर सौंपा, जो पुलिस वाले मृतक मनीष को अस्पताल ले जाने में उनका सहयोग किए। इन सभी से भी SIT पूछताछ कर उनके बयान दर्ज करेगी।

ताकि CBI से पहले हो SIT कर सके पर्दाफाश

वहीं, इस पूरे मामले की जांच में एक और बात का जोर दिया जा रहा है कि इस मामले की CBI जांच शुरू होने से पहले ही SIT इस पूरे हत्याकांड का खुलासा कर सके। हालांकि फिलहाल केंद्र ने अभी CBI जांच की मंजूरी नहीं दी है। ऐसे में SIT टीम का दावा है कि इस मामले में इतने टीम ने इतने पुख्ता सबूत जुटा लिए हैं कि संभवत: अब इसमें CBI जांच की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

गोरखपुर के कोर्ट में दाखिल होगी चार्जशीट

​​​​​​​वहीं, इस मामले की जांच पूरी होने के बाद SIT इस केस की चार्जशीट कानपुर नहीं बल्कि गोरखपुर न्यायालय में ही दाखिल करेगी। SIT टीम के मुताबिक मृतक के परिजनों का आरोप था कि उन्हें गोरखपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है। ऐसे में इस केस की जांच कानपुर पुलिस कर रही है, न कि फिलहाल केस कानपुर में दर्ज किया गया है। ऐसे में फिलहाल इस केस की चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट यहीं के न्यायालय में दाखिल होगी। केस ट्रांसफर होने की दशा में यह केस कानपुर में ट्रांसफर किया जा सकता है।

कई अन्य भी बनाए जा सकते हैं आरोपी

​​​​​​​इतना ही नहीं, SIT जांच के साथ चल रही इस मामले की विवेचना में कई अन्य भी आरोपी बनाए जा सकते हैं। अब तक की जांच में पुलिस की पिटाई से मनीष की मौत का तो मामला सामने आया ही है, लेकिन इसके बाद इस मामले को गुमराह करने, सबूत मिटाए जाने और आरोपियों की मदद करने के आरोप में विवेचना के दौरान कुछ अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए जा सकते हैं। इसमें फिलहाल होटल कर्मचारियों और पुलिस के कई अन्य लोगों की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है।

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